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हरियाली है तो दिवाली है ….

ऋषिकेश । परमार्थ निकेतन द्वारा स्वच्छ और हरित दीपावली मनाने का संदेश देते हुये पटाखेे के साथ नहीं बल्कि पेड़ों का रोपण कर दीपावली मनाने का संदेश दिया। परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज की प्रेरणा से परमाार्थ गुरूकुल के प्यारे-प्यारे ऋषिकुमारों ने हाथों में पौधों को लेकर संकल्प लिया कि इस दीपावली के पावन पर्व पर पटाखे नहीं जलायंेगे बल्कि पौधों का रोपण करेंगे और पौधों का ही उपहार देंगे। उन्होने कहा कि न पटाखे होंगे, प्रदूषण होगा, प्रदूषण से कम करना है तो पेड़ लगाने होंगे। इस बार केवल पेड़ और माटी के दीयों के साथ दीपावली मनायेंगे। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने दीपावली के पावन पर्व पर देशवासियों को शुभकामनायें और बधाई देते हुये कहा कि मुझे तो लगता इस बार की दीपावली हरियाली से भरी हो। हरियाली है तो दिवाली है। युवाओं को संदेश देते हुये कहा कि पटाखे कम जलायें और पेड़घ् ज्यादा लगायें। पटाखे और पेड़े नहीं बल्कि पौधों का उपहार दें। उन्होने कहा कि पर्वो पर नये सामान खरीद कर लायें साथ ही संस्कारों को भी घर में लाये और उसे बनायें रखे। नये सामान के साथ घर-परिवार में नये विचार, नया उत्साह, नयी उमंग और नयी तरंग को भी लाये। श्रेष्ठ संस्कार और नयी उमंग अगर हमारे जीवन में आये तो सचमुच सच्ची दीपावली होगी। स्वामी जी ने कहा कि हमारा कल्चर, नेचर और फ्यूचर इन तीनों का संगम हो यह दिवाली। इस बार कुछ नया, कुछ अलग हो, दीपावली ऐसी मनायें जो निराली होय हरियाली से भरी होगीय खुशहाली से युक्त हो।स्वामी जी ने दिवाली के अवसर पर दीपों का महत्व बताते हुये कहा कि दीये से जुड़ने का अर्थ है अपनी माटी से जुड़ना। दीप, परम्परा और सभ्यता का प्रतीक है हड़प्पा संस्कृति से लेकर आधुनिक संस्कृति, संवेदनायें और आशाओं को समेटे दीपक स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता हैं। दीया जीवटता की मिसाल कायम करता है और सिखाता है कि किस प्रकार जीवन में विपरीत परिस्थितियों का सामना जीवटता के साथ कर आगे बढ़ते रहना है। उन्होेने कहा कि याद रखे कि हमारे द्वारा खरीदे गये दीयों से कई घरों में चूल्हे  जलते है। आज भी वे लोग त्योहारों के अवसर पर सड़कों के किनारों पर दीये लेकर बैठते है और ग्राहकों के आने का इंतजार करते है परन्तु उपभोक्तावादी संस्कृति के कारण अब उनकी ओर शायद किसी का ध्यान जाता है। स्वामी जी ने कहा कि हमें दीपों की संस्कृति को फिर से जाग्रत करना होगा। सच्ची दीपावली तो वही है जब हम दूसरों के घरों में, दिलों में भी रोशनी कर पायें। इस दीपावली पर प्रसन्नता के, मुस्कान के और खुशियों के मिलकर दीप जलायें ताकि हमारा वतन पूरे विश्व में इन प्रेरणाओं का प्रतीक बनें। स्वामी जी ने कहा कि हमारे पूरे देश में इस दीपावली पर प्रेम, सद्भाव, समरसता और स्वच्छता के दीप जलायें क्योकि स्वच्छता के उपहार की आज हमारे देश को जरूरत है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के साथ परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने पौधों का रोपण कर हरित दीपावली मनाने का संदेश दिया। सभी ने स्वच्छता का उपहार देश को प्रदान करने का संकल्प लिया। परमार्थ गंगा तट पर अद्भुत अवसर था जब सभी न शहीदों के नाम पर दीप जलायें और देशभक्ति से युक्त छोटी दीपावली मनायी। स्वामी जी ने उजाले, उमंग और निरालेपन से युक्त दिवाली मानाने का संदेश दिया।

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