Breaking News:

पहचान : जिसे दुनिया ने कहा ‘पागल’, उससे जोड़ा रिश्ता -

Saturday, August 29, 2026

700 मुनिराजों की रक्षा स्मृति में बृहत रक्षाबंधन विधान हुआ देहरादून में पहली बार -

Saturday, August 29, 2026

साइबर गैंग का भंडाफोड़, 5 शातिर गिरफ्तार -

Thursday, August 27, 2026

उत्तराखंड : आईएएस, पीसीएस और सचिवालय सेवा के 6 अधिकारियों के प्रभार बदले -

Thursday, August 27, 2026

सीनियर सिटीजन वेलफेयर सोसाइटी ने स्कूली बच्चों के साथ मनाया रक्षाबंधन -

Thursday, August 27, 2026

खेल : तुलाज इंटरनेशनल स्कूल और द एशियन स्कूल ने जीती एस.डी. जैन मेमोरियल फुटबॉल चैंपियनशिप -

Wednesday, August 26, 2026

हरिद्वार : अपनी दो सगी बहनों को मौत के घाट उतारने वाला भाई गिरफ्तार -

Wednesday, August 26, 2026

उत्तराखंड में एक सितंबर तक बारिश का अलर्ट -

Wednesday, August 26, 2026

सीएम धामी ने नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ से हुई जन-धन की क्षति पर गहरा दुःख व्यक्त किया -

Wednesday, August 26, 2026

बैंक ऑफ इंडिया की असिस्टेंट मैनेजर प्रगति पन्त को साईं सृजन पटल ने किया सम्मानित -

Wednesday, August 26, 2026

शिमला यूनाइटेड एफसी ने जीता 48वें घूंगटुग टीसुलट्रिम मेमोरियल नेशनल फुटबॉल टूर्नामेंट का खिताब -

Saturday, August 22, 2026

पहचान : नरेश सिंह नयाल को ब्लाइंड फुटबॉल टूर्नामेंट के लिए टेक्निकल डायरेक्टर की मिली जिम्मेदारी -

Saturday, August 22, 2026

भगवान पार्श्वनाथ का 2 दिवसीय निर्वाण कल्याणक महोत्सव बड़े हर्षोल्लास से मनाया गया, जानिए खबर -

Wednesday, August 19, 2026

पहचान : रेल पटरियों की मरम्मत करने वाले प्रह्लाद बने आइपीएस -

Wednesday, August 19, 2026

देहरादून साइक्लिंग क्लब द्वारा “गड्ढों से आज़ादी” पर रिपोर्ट प्रशासन को भेजा गया -

Tuesday, August 18, 2026

आध्यात्मिक श्रमणी आर्यिकारत्न पूर्णमति माताजी का भव्य दीक्षा दिवस समारोह हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न -

Tuesday, August 18, 2026

देहरादून में आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी का 38वां दीक्षोत्सव धूमधाम से शुरू, जानिए खबर -

Monday, August 17, 2026

क्रिकेट : छोटी उम्र में ही खिलाडी अश्वनी शाह को मिली बड़ी जिम्मेदारी, जानिए खबर -

Saturday, August 15, 2026

स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्त हुए सम्मानित -

Saturday, August 15, 2026

चातुर्मास के अवसर पर जैन धर्मशाला में स्वतंत्रता दिवस पर धार्मिक आयोजन, जानिए खबर -

Friday, August 14, 2026



जब रिक्‍शेवाले ने सुसाइड करने से बचाया लड़की को , 8 साल बाद आखिर क्या हुआ, जानिए खबर ..

Rickshaw-puller-girl-viral-storyअच्छे काम करने का फल कही न कही जरूर प्राप्त होता है लेकिन कुछ लोग कहते हैं कि कितने भी अच्‍छे काम करो, लेकिन जिंदगी में जो मिलना होता है वहीं मिलता है, परन्तु रिक्‍शा चलाने वाले इस आदमी की इमोशनल स्‍टोरी सुनकर आप भी कहेंगे कि अच्‍छा काम कभी बेकार नहीं जाता। जिंदगी कब हमें कौन सा खूबसूरत उपहार दे दे, हम नहीं जान सकते। फेसबुक पर वायरल हुई बबलू शेख नाम के इस रिक्‍शाचालक की सच्‍ची कहानी एक यूजर GMB Akash ने शेयर की है। इस रिक्‍शाचालक ने एक जवान लड़की की जान बचा ली, जब वो ट्रेन से कटकर आत्‍महत्‍या करने पहुंची थी। लड़की ने बबलू से कहा मुझसे कभी मत मिलना और बबलू अपने सीने में यह बात दबाए रहा। 8 साल बाद जब बबलू अस्‍पताल के बेड पर पड़ा दर्द से कराह रहा था, उस समय वही लड़की लौटी एक ऐसी कहानी के साथ, जिसने बबलू के सारे जख्‍म एक झटके मे भर दिए। बबलू शेख नाम का यह शख्‍स करीब 30 साल से रिक्‍शा चला रहा है। बबलू बताता है कि वो हमेशा से एक बेटी चाहता था, लेकिन उसके 3 लड़के थे। अपनी पत्‍नी से हमेशा कहता था कि लड़कियां किस्‍मत वालों को ही मिलती हैं, हमारी किस्‍मत में बेटी नहीं है। एक रोज एक आदमी ने अपनी जवान बेटी को कॉलेज छोडने के लिए मुझे हायर किया। उसने कहा कि देखो ध्‍यान से ले जाना। वो अपनी बेटी से बोला कि रिक्‍शा ठीक से पकड़कर बैठना कहीं गिर मत जाना।मैं उसे रिक्शे पर बिठाकर कुछ दूर चला था कि मुझे उसके रोने की आवाज सुनाई दी। मैंने रिक्‍शा रोककर उससे बात करने की सोची कि आखिर वो रो क्‍यों रही है, लेकिन उसने मुझे झिड़कते हुए कहा कि पीछे मुड़कर मत देखो। कुछ देर बात लड़की ने रिक्‍शा रोकने को कहा और वो किसी को फोन लगाकर बात करने लगी। फोन पर बात करते हुए वो लगातार रो रोकर चिल्‍ला रही थी। उसकी बातों से मुझे लगा कि वो शायद किसी लड़के के साथ घर से भागना चाहती है। यह सोचते ही मुझे गुस्‍सा आने लगा। मुझे लगा कि अच्‍छा है कि मेरी बेटी नहीं है। मैं यह बात सोच ही रहा था तभी….अचानक वो रिक्‍शे से कूदी और पास से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक की ओर भागने लगी। वो शायद आत्‍महत्‍या करने जा रही है। पहले मुझे लगा कि जाने दो वो जहां जा रही है, लेकिन मेरे दिल ने मुझे आगे बढ़ने ही नहीं दिया। मैनें रिक्‍शा किनारे लगाया और उसके पीछे भागते हुए रेलवे ट्रैक पर पहुंच गया। मैने उसे समझाते हुए वहां से चलने का कहा, लेकिन उसने मुझे गंवार और बेवकूफ आदमी कहते हुए झिड़क दिया। वो बहुत बहुत जोर जोर से रो रही थी। मैनें उसे रोने दिया ताकि उसका दिल हल्‍का हो जाए। मैं उसे इस सुनसान इलाके में अकेला छोड़ने में डर रहा था। उस बेचारी लडकी की खातिर मैं वहां घंटों तक रुका रहा। तभी बारिश होने लगी। इसके कुछ देर आखिरकार उसने मुझसे कहा कि रिक्‍शा लाइए। मैं रिक्‍शा लाया और फिर पूरी स्‍पीड में उसे उसके घर की ओर लेकर चला। हमने आपस में कोई बात नहीं की। जब मैंने लड़की को उसके घर छोड़ा तो उसने मुझसे कहा कि आप प्‍लीज यहां दोबारा कभी मत आइएगा। मैं सिर झुकाकर चुपचाप वहां से चला गया।इस घटना को 8 साल से ज्यादा समय बीत चुका था। एक बार रोड पर रिक्‍शा चलाते समय मेरा एक्‍सीडेंट हो गया। मैं पूरी तरह बेहोश था। कुछ लोग मुझे उठाकर अस्‍पताल ले गए। कुछ देर बाद जब मुझे होश आया तो एक लड़की मेरे पास खड़ी थी। उसने मेरा हाथ पकड़कर कहा कि अब कैसे हैं। मुझसे मिलने दोबारा कभी घर क्‍यों नहीं आए। उसके ऐसा कहने के बाद मैं सोचता रहा कि डॉक्‍टर की ड्रेस में वो लड़की कौन है। मेरा इलाज अच्‍छा चल रहा था। मुझे बड़े डॉक्‍टर के पास ले जाया गया। उस लड़की ने बड़े डॉक्‍टर से कहा कि ये मेरे पापा हैं। इस पर बड़े डॉक्‍टर ने लडकी से अंग्रेजी में कुछ बात की। लड़की ने मेरा हाथ पकड़कर कहा कि अगर मेरे ये पिता उस समय मेरा सपोर्ट नहीं करते तो आज मैं डॉक्‍टर नहीं बन पाती। उस लड़की के ऐसा कहते ही मैनें आंखें मूंद लीं। उस समय मुझे कितनी खुशी महसूस हो रही थी मैं किसी से बता नहीं सकता था। सालों पहले मिली वो लड़की आज डॉक्‍टर बेटी बनकर मुझे मिल गई थी।

Leave A Comment