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एक जून से फूलों की घाटी का दीदार, जानिए खबर

देहरादून । समुद्रतल से 3962 मीटर (12995 फीट) की ऊंचाई पर 87.5 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली विश्व धरोहर फूलों की घाटी को एक जून से पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। वन विभाग ने अपनी तैयारी पूरी कर ली हैं। इस बार भारी बर्फबारी के कारण 3 किमी पैदल ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गया था। जिसे सही कर दिया गया है। हाल ही में वन विभाग की एक टीम ने घाटी का निरीक्षण किया था। इस वैली की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली हुई है। जिससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए फूलों की घाटी आकर्षण का केंद्र है। इस बार भी वैली में जाने वाले पर्यटकों की तादाद बढ़ने की उम्मीद है। फूलों की घाटी दुनिया की इकलौती जगह है, जहां प्राकृतिक रूप में 500 से अधिक प्रजाति के फूल खिलते हैं। बीते साल यहां करीब 14000 पर्यटक पहुंचे थे, जिससे करीब 23 लाख की रुपये की आमदनी हुई थी। फूलों की घाटी का दीदार करने लिए भारतीय पर्यटकों को 150 रुपये और विदेश पर्यटकों को 650 रुपये के खर्च करने होंगे। घाटी की खोज वर्ष 1931 में कामेट पर्वतारोहण के बाद ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रेंक स्मिथ ने की थी। वह भटककर यहां पहुंच गए थे और घाटी की सौंदर्य पर इस कदर रीझे कि फिर कई दिन यहीं गुजारे इसकी बेइंतहा खूबसूरती से प्रभावित होकर स्मिथ 1937 में इस घाटी में वापस आये और 1938 में “वैली ऑफ फ्लॉवर्स” नाम से एक किताब प्रकाशित करवायी थी। यूनेस्को ने फूलों की घाटी को विश्व धरोहर का दर्जा प्रदान किया. फूलों की ये प्रजातियां पाई जाती है। हिमाच्छादित पर्वतों से घिरी यह घाटी हर साल बर्फ पिघलने के बाद खुद-ब-खुद बेशुमार फूलों से भर जाती है। यहां आकर ऐसा प्रतीत होता है, मानो कुदरत ने पहाड़ों के बीच फूलों का थाल सजा लिया हो। जुलाई और अगस्त महीन के दौरान यहां एल्पाइन जड़ी की छाल की पंखुडियों में रंग छिपे रहते हैं। यहां सामान्यत पाये जाने वाले फूलों के पौधों में एनीमोन, जर्मेनियम, मार्श, गेंदा, प्रिभुला, पोटेन्टिला, जिउम, तारक, लिलियम, हिमालयी नीला पोस्त, बछनाग, डेलफिनियम, रानुनकुलस, कोरिडालिस, इन्डुला, सौसुरिया, कम्पानुला, पेडिक्युलरिस, मोरिना, इम्पेटिनस, बिस्टोरटा, लिगुलारिया, अनाफलिस, सैक्सिफागा, लोबिलिया, थर्मोपसिस, ट्रौलियस, एक्युलेगिया, कोडोनोपसिस, डैक्टाइलोरहिज्म, साइप्रिपेडियम, स्ट्राबेरी और रोडोडियोड्रान इत्यादि प्रमुख हैं। प्राकृतिक रूप से समृद्ध यह घाटी लुप्तप्राय जानवरों काला भालू, हिम तेंदुआ, भूरा भालू, कस्तूरी मृग, रंग-बिरंगी तितलियों और नीली भेड़ का प्राकृतिक वास भी है। फूलों की घाटी उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है. यहां पहुंचने के लिए ऋषिकेश से बस या फिर टैक्सी के जरिए जोशीमठ पहुंचना होगा, जो करीब 254 किमी दूर है। यहां से फूलों की घाटी के प्रवेश स्थल की दूरी 13 किमी है, जहां पैदल या फिर घोड़े, खच्चरों की मदद से जा सकते हैं। इसके बाद पर्यटक 3 किमी लंबी व आधा किमी चैड़ी फूलों की घाटी में घूम सकते हैं।

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