साईं सृजन पटल के 18वें अंक का हुआ विमोचन
Posted by Pehchanexpress Admin on Monday, February 2, 2026 · Leave a Comment

एम्स ऋषिकेश के डॉ. दिलीप वैष्णव ने किया विमोचन
डोईवाला | एम्स ऋषिकेश के न्यायिक चिकित्सा एवं विष विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. दिलीप वैष्णव ने साईं सृजन पटल मासिक पत्रिका के 18वें अंक का भव्य विमोचन किया। इस विशेष अवसर पर पत्रिका ने एक नया प्रयोग करते हुए गढ़वाली में अपना पहला लेख प्रस्तुत किया, जो भाषा संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।विमोचन समारोह में डॉ. वैष्णव ने पत्रिका की सराहना करते हुए कहा, साईं सृजन पटल न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को भी उजागर करता है। साईं सृजन पटल की मासिक पत्रिका समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक सिद्ध हुई है। उन्होंने पत्रिका के योगदान और इसके सामाजिक तथा शैक्षिक प्रभाव पर विशेष जोर देते हुए कहा, यह हमारे समाज को जागरूक करने का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है।
पत्रिका के संस्थापक और मुख्य संपादक प्रो. (डॉ.) के. एल. तलवाड़ ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, हमारा उद्देश्य न केवल साहित्य को बढ़ावा देना है, बल्कि समाज में रचनात्मकता और सकारात्मक सोच को भी प्रोत्साहित करना है। इस अंक के साथ हम एक नए दिशा की ओर अग्रसर हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह अंक उनके समर्पित लेखक और पाठकों की मेहनत का परिणाम है और यह पत्रिका सामूहिक प्रयासों का फल है।
पत्रिका के उपसंपादक अंकित तिवारी ने इस अवसर पर कहा, हर अंक के माध्यम से हम नए विचारों, लेखों और दृष्टिकोणों को पाठकों के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य साहित्य को जन-जन तक पहुँचाना है, ताकि हर व्यक्ति अपनी सोच को सृजनात्मक दिशा दे सके। उन्होंने यह भी कहा, हमें गर्व है कि हम साईं सृजन पटल के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक महत्वपूर्ण संदेश पहुंचा रहे हैं। इस अवसर पर डॉ. दिलीप वैष्णव को पत्रिका में लेखन सहयोग के लिए लेखक श्री सम्मान से सम्मानित करते हुए स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।इस कार्यक्रम में नीलम तलवाड़ और इंसाइडी क्रिएटिव मीडिया के सीईओ अक्षत , ऋषभ मल्होत्रा सहित तमाम लोग उपस्थित रहे और उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। यह आयोजन न केवल साहित्यिक दृष्टिकोण से, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव लाने में भी महत्वपूर्ण साबित हुआ है। साईं सृजन पटल ने यह सिद्ध कर दिया कि साहित्य समाज की दिशा बदलने की शक्ति रखता है।