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सर्वेक्षण : 95 % वयस्कों ने अपने मताधिकार का किया है उपयोग

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मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखण्ड द्वारा कराये गये एक सर्वेक्षण में नागरिकों एवं मतदाताओं के चुनावी ज्ञान एवं अभिरूचि से संबंधित कई महत्वपूर्ण तथ्य प्रकाश में आये हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी ने सर्वेक्षण के परिणामों को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे राज्य में निर्वाचन प्रक्रिया की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायता मिलेगी। साथ ही मतदाता जागरूकता के कार्यक्रम और प्रभावी रूप से संचालित किये जा सकेंगे। सर्वेक्षण की जानकारी देते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी ने बताया कि अधिकांश मतदाता मतदान के प्रति जागरूक पाये गये। 49 प्रतिशत मतदाताओं ने ‘मतदान मेरा अधिकार है‘, 20 प्रतिशत ने ‘मतदान मेरा कर्त्तव्य है‘ तथा 17 प्रतिशत मतदाताओं ने ‘मतदान देश को दिशा देता है‘ ऐसा सोचकर मतदान किया। सर्वेक्षण में प्रतिभाग करने वाले 95 % वयस्कों ने कम से कम एक बार वोट देने की बात स्वीकार की। शेष 5% अभिवक्ताओं ने कभी भी वोट नहीं दिया है। 94 % लोगों को मतदान हेतु न्यूनतम अर्ह आयु 18 वर्ष होने की जानकारी है, जबकि वोटर के रूप में पंजीकरण के लिये अर्हकारी तिथि तथा राष्ट्रीय मतदाता दिवस की अधिकांश को जानकारी नहीं थी। उत्तराखण्ड के 90 % मतदाताओं द्वारा मतदान केन्द्रों पर विकलांग, वृद्धों तथा महिलाओं के लिये अलग से पंक्ति होने की पुष्टि की। इसी प्रकार 80 % द्वारा पेयजल सुविधाओं तथा 83 % द्वारा शौचालय सुविधा की पुष्टि की गई। 83 % मतदाताओं का विश्वास था कि भारत में मतदान स्वतंत्र रूप में होता है। अधिकांश मतदाताओं ने बताया कि उन्हें निर्वाचन संबंधी सूचनाएं प्रमुखतः टी.वी. तथा विज्ञापनों से प्राप्त होती है। बहुत कम मतदाता चुनाव संबंधी जानकारी के लिये इण्टरनेट का उपयोग करते हैं। चुनाव प्रक्रिया में सुधार हेतु सुझाव देते हुए मतदाताओं ने वृद्ध, विकलांग तथा रोगियों के लिये विशेष व्यवस्था की जरूरत बताई। 100 तथा 108 नम्बर की तरह चुनाव प्रक्रिया एवं संबंधित जानकारी के लिये टोल फ्री नम्बर लाभदायक होगा। मतदाताओं ने यह भी सुझाव दिया है कि चुनाव परिणाम घोषित करते हुए परिणाम मतदेय स्थलवार न घोषित किये जायें, जिससे मतदान की गोपनीयता और मजबूत हो। यह सर्वेक्षण राज्य के सभी 70 विधान सभा क्षेत्रों में एक साथ किया गया। प्रत्येक विधान सभा क्षेत्र से 30 परिवारों का सैम्पल लिया गया। प्रत्येक विधान सभा में 5 ऐसे पोलिंग स्टेशनों को सैम्पिलंग में लिया गया जहाँ बहुत कम मतदान हुआ था। सर्वेक्षण हेतु अनुसूची निर्वाचन विभाग के परामर्श से बनाई गई थी। परिवार के पात्र व्यक्तियों का चयन किश ग्रिड पद्धति से किया गया था। सर्वेक्षण में सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया गया था।

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