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अब रात के अंधेरे में भी देख सकेंगे भारतीय सेना व अर्धसैनिकों बलों के जवान, जानिए खबर

देहरादून । अब भारतीय सेना व अर्ध सैनिक बलों के जवान रात के घुप्प अंधेरे में भी दुश्मन की गतिविधियों को देख सकेंगे यह कारनामा होगा आयुध निर्माणी देहरादून में बनाए गये मोनो कुलर नाईट साईट के द्वारा। यह जानकारी देते हुए आयुध निर्माणी देहरादून के महाप्रबंधक पी के दिक्षित ने बताया कि देहरादून स्थित निर्माणी में यह साईट विकसित की गयी है और अब यह परीक्षण के बाद अर्धसैनिक बलों को सौंप दी गयी जबकि सेना को भी सौंपने की तैयारी की जा रही है।   दिक्षित यहां आयुध निर्माणी दिवस की पूर्व संध्या पर पत्रकारों से अनौपचारिक बात कर रहे थे। उन्होंने बताया कि अभी तक भारतीय सेना व अर्धसैनिक बलों को ऐसे उपकरण दिए जाते थे जो कि सिर्फ स्टार लाईट में दुश्मनों केा देखने के काम आते थे लेकिन अब रात के धुप्प अंधेरे में भी सेना व अर्धसैनिक बलों के जवान दुश्मन को देख सकेंगे। इसके लिए आयुध निर्माणी की रिसर्च विंग ने एक ऐसा मोनोकुलर विकसित किया है जो कि अब रात को घुप्प अंधेरे में भी दुश्मन को देख सकेंगे। इस उपकरण को विकसित करने में निर्माणी को छह माह का समय लगा और यह पूरी तरह से थर्मल इमेजिंग पर आधारित है। इसको विकसित करने के बाद जब इसका परीक्षण किया गया तो  यह सेना व अर्धसैनिक बलों की कसौटी पर खरा उतरा। अब निर्माणी इसका उत्पादन कर अभी अर्धसैनिक बलों को इसकी आपूर्ति कर रही है। यह इस समय नक्सल ग्रसित क्षेत्रों में तैनात अर्धसैनिक बलों की पहली पसंद बन गया है। पिछले तीन महीनों में 500 से अधिक मोनोकुलर की आपूर्ति की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि आयुध निर्माणी सेना व अर्धसैनिक बलों को आपूर्ति किए जाने वाले हथियारों की साईट सप्लाई करती है और यह मोनो कुलर इसकी अहम कड़ी है। उन्होंने बताया कि 600 ग्राम वजन वाली यह मोनो कुलर साईट की लगातार मांग बढ़ रही है।
श्री दिक्षित  ने बताया कि आने वाले दिनों में आईआरडीई के साथ मिलकर हम कई परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं जिसका परिणाम जल्दी ही सामने होगा। इसके लिए आई आर डीई के निदेशक बेजामिन लियोनिल द्वारा आयुध निर्माणी को पूरा सहयोग दिया जा रहा।  इसके साथ ही ड्रोन व हेलीकाप्टर से निगरानी के लिए साईट विकसित किए जाने की भी योजना है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में भारतीय नौ सेना के लिए भी एक साईट 12.7 एमएम स्टैबलाईजर रिमोट कंट्रोल गन भी बनाने की योजना है इसका 1000 साईट का आर्डर भी निर्माणी को मिल चुका है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-2020 में 180 करोड़ का लक्ष्य रखा गया था जिसमें से 164 करोड़ हम  पूरा कर चुके हैं और मार्च के समापन तक 180 करोड़ पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके अलावा सेना के लिए विशेष तौर पर बनाई गयी धनुष तोप की आप्टीकल साईट भी आयुध निर्माणी देहरादून में ही बनाई गयी है। यही नहीं सेना के लिए पर्वतारोहण के दौरान काम आने वाले एक विशेष हुक जिसका नाम काराबाईनर है को भी आयुध निर्माणी देहरादून में नयी तकनीक के साथ ही विकसित किया जो कि अब और अधिक सुलभ हो गया है। पर्वतारोह के दौरान किसी भी मौसम का इस पर असर नही पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इस साल हमारी निर्माणी के लिए सबसे गर्व की बात यह है कि यहां की महिला कर्मचारी अंजना नेगी को आयुध निर्माणी बोड की ओर से दिया जाने वाले उच्च सम्मान आयुध देवी से नवाजा गया है। यह सम्मान अंजना की कार्यकुशलता और काशकीय अनुभाग में किए जाने वाले काम के कुशल संचालन के लिए दिया गया है। उन्होंने बताया 18 मार्च को हर साल आयुध निर्माणी दिवस मनाया जाता है इसके लिए इस साल भी पूरी तैयारियां की गयी थी लेकिन कोरोना के प्रकोप को देखते हुए सभी कार्यक्रम स्थगित किए गये हैं। जो कि बोर्ड से मिलने वाले निर्देशों पर भविष्य में कराए जा सकते है। इस दौरान आयुध निर्माणी की सयंुक्त महाप्रबंधक शर्मिष्ठा कौल  शर्मा भी मौजूद थी।

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