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आर्थिक व सामाजिक विकास की धुरी है उच्च शिक्षा : राज्यपाल

रूड़की | राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने मंगलवार को रूड़की में काॅलेज ऑफ इंजीनियरिंग रूड़की के दीक्षांत समारोह में प्रतिभाग किया। रूड़की को भारत की ‘‘इंजीनियरिंग कैपिटल’’ बताते हुए राज्यपाल मौर्य ने कहा कि रूड़की के नाम पर इंजीनियरिंग के कई बड़े कीर्तिमान हैं। यहाॅं भारत ही नहीं बल्कि एशिया का सबसे पहला इंजीनियरिंग काॅलेज खोला गया जो वर्तमान में आई.आई.टी. रूड़की के नाम से विश्व विख्यात है। इंजीनियरिंग और शिक्षा का मानव समाज तथा राष्ट्र की भलाई के लिये उपयोग पर बल देते हुए राज्यपाल मौर्य ने कहा कि हमारे देश में ऐसे कई महान वैज्ञानिक इंजीनियर और शिक्षाविद् हुए हैं जिन्होंने अपनी भलाई से पहले समाज और राष्ट्र की भलाई को आगे रखा। शिक्षा और शोध कार्य सदैव मानवता के कल्याण के लिए होने चाहिए। शिक्षा में मानवीय मूल्यों तथा सांस्कृतिक चेतना का समावेश अवश्य होना चाहिए। विद्यार्थियों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के लिए काॅलेज को आसपास के गांवो में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं अन्य जागरूकता के कार्यक्रम चलाने चाहिए। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि अपनी बुद्धिमत्ता और शिक्षा का उपयोग उत्तराखण्ड की स्थानीय समस्याएं दूर करने में भी करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ नौकरी पाना नहीं है बल्कि विद्यार्थियों की शिक्षा देश की माटी के काम भी आनी चाहिए। विद्यार्थियों को परिवर्तनों के साथ सफलतापूर्वक कदम से कदम मिलाकर चलने का सुझाव देते हुए राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान में तकनीकी के क्षेत्र में तेजी से परिवर्तन हो रहे है। कृत्रिम बुद्धिमता (आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस) तथा यूजर फे्रण्डली तकनीकि हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रही है। अब ‘‘इण्टरनेट ऑफ थिंग्स’’ का जमाना है। महिला सशक्तिकरण पर बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि काॅलेज कैम्पस से लेकर कम्पनियों और दफ्तरों में हर जगह महिलाओं को बराबरी का अधिकार होना चाहिए। महिलाओं को डिसीजन मेकिंग में भी समानता का अधिकार मिलना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि उच्च शिक्षा आर्थिक व सामाजिक विकास की धुरी है इसलिए उच्च शिक्षा में आज पाठयकर्मो एवं प्रचलित पद्धतियों से भी अधिक कार्य करने की जरूरत है । युवा वर्ग देश की ताकत है इस वर्ग की सृजनशीलता ही देश को विश्व की प्रगति की प्रथम पंक्ति में खड़ा कर सकती है। इसलिए राष्ट्र का भविष्य आज के युवाओ पर एवं उनकी दूरदर्शी सोच पर ही निर्भर करता है। आज हमारे देश को उच्च स्तरीय शोध एवं खोज की सबसे बडी जरूरत है। समारोह में 721 छात्र-छात्राओ को स्नातक व परास्नातक की उपाधिया प्रदान की गयी। गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियो में शाहरूख खान (एईआई), रूहिना अंजुम (सिविल), पूर्वा नष्वा (सी एस), वर्षा अग्रवाल (आईटी), कार्तिक आहूजा (ईएन), विभूति चैहान (ईटी), विशाल नरूला (एमई), सताक्षी जिंदल (एमबीए), दीपक सिंह राणा (एमसीए) रहे । सिल्वर मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में नंदन सिंह (एईआई), गौतम नरूला (सिविल), रिद्हम अरोरा (सीएस), रजत गोयल (आईटी), शालिनी बडोनी (ईएन), मेधा पाण्डेय (ईटी), राहूल कुमार (एम ई), साक्षी मित्तल (एमबीए), एवं नेहा बुतोला (एमसीए) थी । काॅलेज ऑफ इंजीनियरिंग रूड़की के अध्यक्ष जे0 सी0 जैन, महानिदेशक कोर डाॅ0 एस पी गुप्ता, उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय देहरादून की रजिस्ट्रार डाॅ0 अनीता रावत, काॅलेज की वाइस चेयरपर्सन सुनीता जैन ने भी दीक्षांत समारोह को सम्बोधित किया।

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