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एसबीआई का घाटा 7718 करोड़ पर पहुंचा जानिए ख़बर

एसबीआई ने आज अपनी चौथी तिमाही यानी जनवरी-मार्च 2018 के नतीजे घोषित किए. बैंक ने बताया कि इन तीन महीनों के दौरान उसे 7,718 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है. भारत के बैंकिंग इतिहास में ये दूसरा सबसे बड़ा घाटा है. बैंक के मुताबिक, उसे विभिन्न शुल्कों से कमाई वित्त वर्ष 2016-17 की चौथी तिमाही के 7,434 करोड़ रुपये से बढ़कर 2017-18 की चौथी तिमाही में 8,430 करोड़ रुपये हो गया। सालाना आधार पर यह 13.40% की वृद्धि है। बैंक ने बताया कि उन्होंने राइट-ऑफ किए गए लोन में से उसने 21.18 प्रतिशत की रिकवरी हुई है। बैंक ने कहा कि वित्त वर्ष 2017 में 59,461 करोड़ रुपये के मुकाबले पिछले वित्त वर्ष में 0.08% की वृद्धि के साथ उसे 59,511 करोड़ रुपये की ऑपरेटिंग प्रॉफिट रही। घाटे का इससे बड़ा आंकड़ा पिछले हफ्ते पंजाब नेशनल बैंक दिखा चुका है. ये वही बैंक है जिसे हीरा व्यापारी नीरव मोदी ने 13,000 करोड़ रुपए से अधिक की चपत लगा दी थी और इससे पहले कि बैंक और भारतीय रिज़र्व बैंक को इसका पता चलता वो आराम से विदेश फ़रार हो गए. पंजाब नेशनल बैंक ने अपनी बैलेंस शीट दिखाते हुए कहा था कि जनवरी-मार्च तिमाही में उसे 13,417 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है. स्टेट बैंक को अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में 2,416 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था यानी चौथी तिमाही में ये घाटा बढ़कर तीन गुना हो गया है. घाटे का आंकड़ा इतना भारी-भरकम दिखने की वजह बैंक की ओर से बढ़ाई गई प्रोविजनिंग है. इसका मतलब है कि बैंक अप्रैल-मई-जून महीने में भी डूबे कर्ज़ बढ़ने की आशंका जता रहा है. तिमाही आधार पर चौथी तिमाही में बैंक ने प्रोविजनिंग 18,876 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 28,096 करोड़ रुपए की है. हालांकि बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार को उम्मीद है इन एनपीए में से बैंक आधे से अधिक की वसूली करने में कामयाब रहेगा. संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, “स्टेट बैंक ने 12 बड़े कर्ज़दारों का नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल में ले गया है और बैंक को उम्मीद है कि जब बैंकरप्सी की प्रक्रिया होगी तो बैंक का घाटा 50 से 52 फ़ीसदी से अधिक नहीं होगा.

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