Breaking News:

दुःखद : पिता ने मोबाइल फोन चलाने से किया मना 14 वर्षीय किशोरी ने लगाई फांसी -

Thursday, June 25, 2026

देश प्यार और मोहब्बत से चलेगा, नफरत से नहींः मदनी -

Thursday, June 25, 2026

धमकी देने वालों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाईः मुख्यमंत्री धामी -

Thursday, June 25, 2026

जूनून और साहस के आगे झुकी दिव्यांगता -

Thursday, June 25, 2026

आईपीएस अमित सिन्हा को डॉ विरेन्द्र सिंह रावत ने दी बधाई, जानिए खबर -

Thursday, June 25, 2026

जरा हटके : लैंड-लव-थूक जिहाद के बाद अब विकेश नेगी ने उठाया ‘नौकरी जिहाद’ का मुद्दा -

Sunday, June 21, 2026

हेमकुंड यात्रा से जुड़े प्रकरण को सांप्रदायिक रंग देने वालों पर होगी कार्रवाईः गृह सचिव उत्तराखंड -

Sunday, June 21, 2026

कुलपति द्वारा एक वर्ष में गढ़वाल विवि ने नए आयाम स्थापित किए, जानिए खबर -

Sunday, June 21, 2026

जैन धर्म : श्रुत पंचमी के पावन अवसर पर भव्य कार्यक्रम आयोजित -

Saturday, June 20, 2026

जैन कुल उपनिति संस्कार का आयोजन, जानिए खबर -

Saturday, June 20, 2026

लोहाघाट में कार खाई में गिरने से लगी आग में दो लोगों की मौत, तीन घायल -

Saturday, June 20, 2026

भूमि खरीद घोटाले में धामी सरकार का बड़ा एक्शन, जानिए खबर -

Saturday, June 20, 2026

युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, जानिए खबर -

Saturday, June 20, 2026

पहचान : डीआईटी यूनिवर्सिटी की एनसीसी गर्ल्स कैडेट्स ने संस्थान और राष्ट्र का नाम किया रोशन -

Wednesday, June 17, 2026

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय संघ की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को दिलाई शपथ -

Wednesday, June 17, 2026

मोदीपुरम से ऋषिकेश तक हाई स्पीड नमो भारत ट्रेन का सपना होने जा रहा सच -

Wednesday, June 17, 2026

दोषियों को कड़ा सबक सिखाए सरकारः अनुप पांडेय -

Monday, June 15, 2026

देहरादून साइक्लिंग क्लब द्वारा श्रद्धांजलि साइकिल रैली आयोजित -

Sunday, June 14, 2026

शहरी पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन की दिशा में युवाओं की पहल, जानिए खबर -

Sunday, June 14, 2026

CANON C50 कैमरे की सभी नई तकनीक की जानकारी दी गयी -

Sunday, June 14, 2026



कक्षा सात की बालिका ने प्रधानमंत्री के लिए लिखी चिट्ठी, जानिए खबर

negi

रुद्रप्रयाग। कक्षा सात में पढ़ने वाली एक बालिका ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी भेजकर पहाड़ की ज्वलंत समस्याओं को उकेरने के साथ गैरसैंण राजधानी बनाने की विनती की है। चिट्ठी में बालिका ने शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य, प्राकृतिक आपदा, जंगली जानवरों के आतंक जैसी गम्भीर सवालों को उठाया है। नालंदा पब्लिक स्कूल, रुद्रप्रयाग में कक्षा सात में पढ़ रही 13 वर्षीय आकांक्षा नेगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी चिट्ठी में लिखा है कि नमस्ते। मैं पहाड़ के एक छोटे से नगर रुद्रप्रयाग में रहती हूं। पहले अपने गांव राजकीय प्राथमिक विद्यालय कनकचैरी (पोखठा) में पढ़ती थी, लेकिन वहां न तो छात्र थे और न ही अध्यापक। मेरी छोटी बहन कक्षा तीन में पढ़ती है जबकि भाई दूसरी कक्षा में है। गांव में पढ़ने की अच्छी सुविधा नहीं थी। स्कूल भी दूर था तो मेरे पिता मुझे, मेरी बहन व भाई को लेकर रुद्रप्रयाग आ गये। अब मैं एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ रही हूं। मैं बड़ी होकर जज बनना चाहती हूं।  चिट्टी में लिखा गया है कि आपने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा दिया है, लेकिन जब मैं अपनी सहेली तनुजा के बारे में सोचती हूं तो दुख होता है। वो पढ़ने में होशियार है, लेकिन जिस सरकारी स्कूल में पढ़ती है तो वह गांव से बहुत दूर है। हाई स्कूल तो और भी दूर है। गांव के कई बच्चों को नदी पार करनी होती है। जब केदारनाथ आपदा आई थी तो झूला पुल बह गये थे। वो पुल अब भी नहीं बने हैं। गांव के बच्चे नदी पार करते समय ट्राली को भी हाथों से खींचते हैं। ट्राली खींचते समय कई बच्चों की उंगलियां कट जाती हैं। प्रधानमंत्री जी, मैं आपको यह भी बताना चाहती हूं कि गांवों के अधिकांश स्कूलों में न तो अध्यापक हैं और न ही अन्य सुविधाएं। कई स्कूलों में तो शौचालय और पीने का पानी भी नहीं है, जिससे हम लड़कियों को ज्यादा समस्या होती है। मिडिल के बाद हाई स्कूल और इंटर कालेज बहुत दूर हैं। ऐसे में गांव की लड़कियों को पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ जाती है क्योंकि माता-पिता अपनी बेटियों को गांव से अधिक दूर पढ़ने के लिए नहीं भेजते हैं। ऐसे में बेटियां कैसे पढ़ेंगी। हमारे पहाड़ का जीवन बहुत कठिन होता है सर, यहां कई समस्याएं हैं, सड़क, स्वास्थ्य, जंगली जानवर का भय और उससे भी अधिक भूस्खलन, भूकंप और बाढ़ का भय। मेरी मां को आज भी घास-लकड़ी लेने जंगल जाना होता है और वहां हमेशा गुलदार या भालू का भय होता है। मोदी सर, आपने श्रीनगर गढ़वाल में पिछले साल भाषण में गढ़वाली में दो शब्द कहे तो मुझे बहुत अच्छा लगा था। मेरे पिता कहते हैं कि यदि राजधानी गैरसैंण होती तो गांव में ये समस्याएं नहीं होती। नेता और अधिकारी पहाड़ में हमारी तरह रहते तो हमारा दर्द समझ पाते। यदि राजधानी गैरसैंण होती तो लोग पहाड़ छोड़कर मैदानों की ओर नहीं जाते। मेरे पिता कहते हैं कि उन्हें और बड़े लोगों को देहरादून आने-जाने में भी परायेपन का अहसास होता है। यदि गैरसैंण स्थायी राजधानी होती तो पहाड़ के लोगों को अधिक सुविधा होती, अपनेपन का अहसास होता। मोदी जी, आपने कहा था कि पहाड़ की जवानी और पहाड़ का पानी पहाड़ों के काम ही आएगा। ऐसा कब होगा? अधिक कुछ नहीं कहती हूं। आपसे विनती है कि यदि आप सच्चे दिल से चाहते हैं कि बेटियां बचाओ-बेटियां पढ़ाओ, तो मेरा कहना है कि आप हमारे पहाड़ को बचा लो, यदि पहाड़ बचाना है और यहां की बेटियों को पढ़ाना है तो यहां हम लोगों को मूलभूत सुविधाएं चाहिए। आपसे विनती है प्लीज, गैरसैंण राजधानी बना दो। प्लीज, प्लीज।

ॐ ॐ

Leave A Comment