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गांव में नहीं थी बस की सुविधा तो खुद ही थाम लिया स्टेयरिंग

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जब कोई भी यदि अच्छी जिद्द ठान ले तो वह पूर्ण जरूर होता है ऐसा ही काम किया है एक गाँव की बेटी प्रियंका ने | गांव के अड्डे पर बस न रुकना प्रियंका को इतना नागवार गुजरा कि उसने खुद ही चालक बनने की ठान ली। विदित हो की इसके बाद तो चरखी दादरी डिपो के ट्रेनिंग सेंटर में उसने दाखिला भी ले लिया। तकरीबन डेढ़ माह की ट्रेनिंग के बाद मेहनत रंग लाई तो अधिकारी भी उसके लगन और कुशलता के कायल हो गए। इतना ही नहीं उसे ट्रेनिंग के दौरान सर्वोच्च चालक के खिताब से भी नवाजा गया। चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट की ओर से चालक बनने का ऑफर प्रियंका को मिल चुका है । गांव खेड़ी बूरा निवासी प्रियंका (24) अब सड़कों पर रोडवेज बसों को दौड़ाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। अपने मामा शमशेर सिंह के हंसी-मजाक में दिए गए सुझाव को गंभीरता से लेने वाली प्रियंका के चालक बनने की कहानी भी खास दिलचस्प है।

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