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ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए ग्रोथ सेंटर

देहरादून | आज मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि उत्तराखण्ड की प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2018-19 में 1,98,738 रूपए है जो कि देश की औसत प्रति व्यक्ति आय से 72,332 रूपए अधिक है। विकास का लाभ दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने व पलायन को रोकने के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में क्लस्टर आधारित एप्रोच पर ग्रोथ सेंटर विकसित किए जा रहे हैं। 58 ग्रोथ सेंटर को मंजूरी दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों को बिना ब्याज के 5 लाख रूपए तक का ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है। गत वर्ष केदारनाथ में 2 करोड़ रूपए से अधिक का प्रसाद महिला समूहों द्वारा बेचा गया। प्रदेश के 625 मंदिरों में प्रसाद योजना का विस्तार किया जा रहा है। मंशादेवी, बदरीनाथ, जागेश्वर, बागेश्वर से शुरूआत हो चुकी है। आशा कार्यकत्रियों का वार्षिक पारिश्रमिक 5 हजार रूपए से बढ़ाकर 17 हजार रूपए किया है। ‘मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना’ में बीस हजार आंगनबाड़ी केंद्रों के ढ़ाई लाख बच्चों को निःशुल्क दूध उपलब्ध कराया जा रहा है।

खेती में ‘मिट्टी से बाजार तक’ की रणनीति

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए ‘मिट्टी से बाजार तक’ की रणनीति पर काम किया जा रहा है। भारत सरकार के सहयोग से 3340 करोड़ की समेकित सहकारी विकास परियोजना प्रारम्भ की गई है। इससे लगभग 55 हजार लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। परम्परागत कृषि विकास योजना के पहले चरण में स्वीकृत 3900 जैविक क्लस्टरों में काम शुरू किया जा चुका है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में उत्तराखण्ड में लगभग 85 प्रतिशत लाभार्थियों का पंजीकरण किया जा चुका है। 5 लाख 50 हजार किसान लाभान्वित भी हो चुके हैं। प्रदेश में लघु, सीमांत व बी.पी.एल. किसानों को 1 लाख रूपए व स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रूपए तक का ब्याज रहित ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है। जिन किसान भाईयों के पास कृषि उपकरण नहीं हैं, उनके लिए ‘‘फार्म मशीनरी बैंक’’ योजना शुरू की गई है। इसके लिए राज्य सरकार 80 फीसदी तक सब्सिडी उपलब्ध करा रही है।

क्लीन एनर्जी पर विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री ने कहा कि घर-घर तक बिजली पहुंचाने के लिए सौभाग्य योजना के तहत शत प्रतिशत विद्युतिकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। उत्तर भारत के सभी राज्यों में उत्तराखण्ड में लगभग सभी श्रेणियों में सबसे कम दरों पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। ‘क्लीन-एनर्जी’ पर विशेष फोकस किया जा रहा है। पाईननिडिल व अन्य बायोमास आधारित ऊर्जा उत्पादन नीति लागू की गई है। इसके तहत अभी तक 21 योजनाएं आवंटित की जा चुकी है। इसमें जंगलों से पिरूल कलेक्शन के लिए महिला समूहोंको 1 रूपया प्रति किलो दर से भुगतान मिलेगा। प्रदेश में ऐसे 6 हजार पिरूल संयंत्र स्थापित करने की योजना है। इससे लगभग 60 हजार लोगों को प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। संशोधित सौर ऊर्जा नीति 2018 में 5 मेगावाट तक की सौर ऊर्जा परियोजना, पर्वतीय क्षेत्रों के स्थाई निवासियों के माध्यम से स्थापित की जा सकती हैं। अभी तक 208 लोगों को 148 मेगावाट की परियोजनाओं के आवंटनपत्र सौंपे जा चुके हैं।

जनसहयोग से जलसंरक्षण

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जल शक्ति अभियान में केंद्र सरकार के सहयोग से ‘हर घर जल’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए संकल्पबद्ध है । प्रदेश की जलनीति तैयार की जा रही है। देहरादून में सूर्यधार, पिथौरागढ़ में थरकोट, चम्पावत में कोलीढ़ेक व अल्मोड़ा में गगास पर जलाशय का निर्माण प्रारम्भ किया गया है। कोसी, बिंदाल व रिस्पना के पुनर्जीविकरण के लिए जन सहभागिता से व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रेविटी आधारित सौंगबांध बनने से देहरादून को 30 वर्ष तक जल की अबाध पूर्ति होगी। वर्ष 2022 तक 5 हजार समस्या ग्रस्त प्राकृतिक जलस्त्रोतों को पुनर्जीवित व सवंर्धित करने का लक्ष्य रखा गया है। मां गंगा का उद्भव स्थल होने के नाते नमामि गंगे अभियानमें उत्तराखण्ड की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके तहत उत्तराखण्ड में स्वीकृत 21 परियोजनाओं में से 9 योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं जबकि शेष योजनाएं फरवरी 2020 तक पूरी कर ली जाएंगी।

होम-स्टे व एडवेंचर टूरिज्म से गांव-गांव पहुंच रहा पर्यटन

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण करते हुए इसे पहले से भी अधिक भव्यता प्रदान की गई है। बद्रीनाथ धाम के लिए भी कार्ययोजना बनाई जा रही है। इस बार चारधाम व हेमकुण्ड साहिब के दर्शनों के लिए रिकार्ड संख्या में श्रद्धालु आए हैं। पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया है। ‘होम-स्टे’ के माध्यम से पर्यटन अब ग्रामीणों की आजीविका का साधन बन रहा है। 13 जिलों में 13 नए थीम बेस्ड डेस्टीनेशन विकसित कर रहे हैं। उत्तराखण्ड में माउंटेनियरिंग, रिवरराफ्टिंग, ट्रैकिंग, केम्पिंग, पैराग्लाईडिंग, माउंटेन बाईकिंग आदि की बहुत सम्भावनाएं हैं। इसके लिए साहसिक पर्यटन का अलग से निदेशालय बनाया जा रहा है। वैलनेस टूरिज्म पर भी फोकस किया जा रहा है। टिहरी झील में सी-प्लेन के संचालन के लिए एमओय ूकिया गया है। पिथौरागढ़ में देश का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डन बनाने जा रहे हैं। देहरादून-मसूरी रोपवे परियोजना का शिलान्यास किया जा चुका है। सुरकंडा देवी व पूर्णागिरी देवी मंदिर के लिए रोपवे का निर्माण कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में फिल्मों की अधिक से अधिक शूटिंग हो, इसके लिए हमने राज्य में फिल्मों के अनुकूल माहौल बनाया है। यही कारण है कि भारत सरकार द्वारा ‘मोस्ट फ्रेंडली स्टेट फाॅर फिल्म शूटिंग’ भी घोषित किया गया है।

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