Breaking News:

जरा हटके : लैंड-लव-थूक जिहाद के बाद अब विकेश नेगी ने उठाया ‘नौकरी जिहाद’ का मुद्दा -

Sunday, June 21, 2026

हेमकुंड यात्रा से जुड़े प्रकरण को सांप्रदायिक रंग देने वालों पर होगी कार्रवाईः गृह सचिव उत्तराखंड -

Sunday, June 21, 2026

कुलपति द्वारा एक वर्ष में गढ़वाल विवि ने नए आयाम स्थापित किए, जानिए खबर -

Sunday, June 21, 2026

जैन धर्म : श्रुत पंचमी के पावन अवसर पर भव्य कार्यक्रम आयोजित -

Saturday, June 20, 2026

जैन कुल उपनिति संस्कार का आयोजन, जानिए खबर -

Saturday, June 20, 2026

लोहाघाट में कार खाई में गिरने से लगी आग में दो लोगों की मौत, तीन घायल -

Saturday, June 20, 2026

भूमि खरीद घोटाले में धामी सरकार का बड़ा एक्शन, जानिए खबर -

Saturday, June 20, 2026

युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, जानिए खबर -

Saturday, June 20, 2026

पहचान : डीआईटी यूनिवर्सिटी की एनसीसी गर्ल्स कैडेट्स ने संस्थान और राष्ट्र का नाम किया रोशन -

Wednesday, June 17, 2026

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय संघ की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को दिलाई शपथ -

Wednesday, June 17, 2026

मोदीपुरम से ऋषिकेश तक हाई स्पीड नमो भारत ट्रेन का सपना होने जा रहा सच -

Wednesday, June 17, 2026

दोषियों को कड़ा सबक सिखाए सरकारः अनुप पांडेय -

Monday, June 15, 2026

देहरादून साइक्लिंग क्लब द्वारा श्रद्धांजलि साइकिल रैली आयोजित -

Sunday, June 14, 2026

शहरी पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन की दिशा में युवाओं की पहल, जानिए खबर -

Sunday, June 14, 2026

CANON C50 कैमरे की सभी नई तकनीक की जानकारी दी गयी -

Sunday, June 14, 2026

फुटबाल रेफ्रीयों के लिए फिटनेस और अपडेट वर्कशॉप आयोजक -

Saturday, June 13, 2026

संघर्ष, अनुशासन और आत्मविश्वास की मिसाल बनी बिनीता रावत -

Saturday, June 13, 2026

देहरादून में डेयरी संचालकों का फूटा गुस्सा: आसमान छूते दामों और उत्पीड़न के खिलाफ खोला मोर्चा -

Thursday, June 11, 2026

दागी अधिकारी को MD बनाने के लिए बदले नियम, चयन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल, जानिए खबर -

Thursday, June 11, 2026

पहचान : ऋषिकेश में घर-घर टिफिन पहुंचाने वाली बेटी बनी एसडीएम -

Sunday, June 7, 2026



तेरापन्थी गुरुदेव के प्रति व्यक्त की कृतज्ञता, जानिए खबर

गुरुदेव ने जोधपुर समाज की माँग को पर्याप्त समय देकर गंभीरता से सुना और बाद में यह आश्वासन दिया 2022 छापर चतुर्मास के पश्चात जोधपुर को स्पर्स करेंगे । गुरुदेव 2013 में जोधपुर पधारे थे । इस दल में तेरापन्थी महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विजयराज तेरापंथ क्षेत्रिय सभा सरदारपुरा के अध्यक्ष माणक तातेड मंत्री महावीर चौपड़ा सभा के पूर्व अध्यक्ष पन्नालाल कागोत शांतिलाल चोपड़ा तेरापंथ महिला मण्डल मंत्री चन्द्रा जीरावला पूर्व अध्यक्ष विमला बैद ,उपाध्यक्ष मोनिका चौरडिया तेरापंथ युवक परिसद् अध्यक्ष महावीर चौधरी मन्त्री कैलाश तातेड पूर्व अध्यक्ष रतन चौपड़ा सतीश बाफना सुनिल बैद एंव वरिष्ठ सोहनरा तातेड मर्यादाकुमार कोठारी अशोक तातेड एवं सभा , महिला मण्डल युवक परिषद के अनेक कार्यकर्ता सम्मिलित थे । सभा अध्यक्ष माणक तातेड ने गुरुदेव की घोषणा के लिए गुरुदेव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की ।
श्वेताम्बर तेरापन्थ, जैन धर्म में श्वेताम्बर संघ की एक शाखा का नाम है। इसका उद्भव विक्रम संवत् 1817 (सन् 1760) में हुआ। इसका प्रवर्तन मुनि भीखण (भिक्षु स्वामी) ने किया था जो कालान्तर में आचार्य भिक्षु कहलाये। वे मूलतः स्थानकवासी संघ के सदस्य और आचार्य रघुनाथ जी के शिष्य थे। आचार्य संत भीखण ने जब आत्मकल्याण की भावना से प्रेरित होकर शिथिलता का बहिष्कार किया था, तब उनके सामने नया संघ स्थापित करने की बात नहीं थी। परंतु जैनधर्म के मूल तत्वों का प्रचार एवं साधुसंघ में आई हुई शिथिलता को दूर करना था। उस ध्येय मे वे कष्टों की परवाह न करते हुए अपने मार्ग पर अडिग रहे। संस्था के नामकरण के बारे में भी उन्होंने कभी नहीं सोचा था, फिर भी संस्था का नाम तेरापंथ हो ही गया। इसका कारण निम्नोक्त घटना है। भिक्षु स्वामी द्वारा लिखित मर्यादापत्र  का प्रथम पृष्ट जोधपुर में एक बार आचार्य भिक्षु के सिद्धांतों को माननेवाले 13 श्रावक एक दूकान में बैठकर सामायिक कर रहे थे। उधर से वहाँ के तत्कालीन दीवान फतेहसिंह जी सिंधी गुजरे तो देखा, श्रावक यहाँ सामायिक क्यों कर रहे हैं। उन्होंने इसका कारण पूछा। उत्तर में श्रावकों ने बताया श्रीमन् हमारे संत भीखण जी ने स्थानकों को छोड़ दिया है। वे कहते हैं, एक घर को छोड़कर गाँव गाँव में स्थानक बनवाना साधुओं के लिये उचित नहीं है। हम भी उनके विचारों से सहमत हैं। इसलिये यहाँ सामायिक कर रहे हैं। दीवान जी के आग्रह पर उन्होंने सारा विवरण सुनाया, उस समय वहाँ एक सेवक जाति का कवि खड़ा सारी घटना सुन रहा था। उसने तत्काल 13 की संख्या को ध्यान में लेकर एक दोहा कह डाला– आप आपरौ गिलो करै, ते आप आपरो मंत।सुणज्यो रे शहर रा लाका, ऐ तेरापंथी तंत॥ बस यही घटना तेरापंथ के नाम का कारण बनी। जब स्वामी जी को इस बात का पता चला कि हमारा नाम तेरापंथी पड़ गया है तो उन्होंने तत्काल आसन छोड़कर भगवान को नमस्कार करते हुए इस शब्द का अर्थ किया — हे भगवान यह तेरा पंथ है। हमने तेरा अर्थात् तुम्हारा पंथ स्वीकार किया है। अत: तेरा पंथी है। तेरापन्थ मे १० आचार्यो की गौरवशाली परम्परा है। आचार्य श्री भिक्षु२आचार्य श्री भारीमाल आचार्य श्री रायचन्द आचार्य श्री जीतमल आचार्य श्री मघराज आचार्य श्री माणकलाल आचार्य श्री डालचन्द आचार्य श्री कालूराम९आचार्य श्री तुलसी आचार्य श्री महाप्रज्ञ  आचार्य श्री महाश्रमण |

Leave A Comment