Breaking News:

कई बार असफल हुए, रील बनाने लगे पर पेपर नहीं छोड़े, आज इनकम टैक्स अफसर -

Sunday, May 31, 2026

उत्तराखंड से चार खिलाड़ी एक बार फिर एशियन पैरा गेम्स 2026 का बनेंगे हिस्सा -

Sunday, May 31, 2026

प्रो.ढींगरा ने किया साईं सृजन पटल पत्रिका के 22 वें अंक का विमोचन, जानिए खबर -

Sunday, May 31, 2026

उत्तराखंड : गर्मी से राहत के आसार, बारिश का अलर्ट -

Wednesday, May 27, 2026

सड़क पर दो साध्वियों की मौत पर गुस्से में जैन समाज -

Tuesday, May 26, 2026

शिक्षा अंकुर स्कूल में यातायात जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन, जानिए खबर -

Monday, May 25, 2026

आधुनिक जीवन की अपरिहार्य अनिवार्यता है राम राज्य : साध्वी दीपिका भारती -

Sunday, May 24, 2026

बचपन से ही बच्चों में हो राष्ट्र सेवा की भावना : सुरेश दुबे -

Saturday, May 23, 2026

15वॉ समर फुटबाल कैंप 1 जून से 25 जून तक, जानिए खबर -

Saturday, May 23, 2026

मिड-डे मील बनाने वाली का बेटा बना आइएएस -

Wednesday, May 20, 2026

अमित का गरीबी से आईपीएल तक का सफर -

Wednesday, May 20, 2026

गरीबी, अकेलेपन और संघर्षों से रेसलर तक का सफर, जानिए खबर -

Wednesday, May 20, 2026

साईं सृजन पटल ने मेधावी छात्रा शांभवी लोहनी को किया सम्मानित -

Monday, May 18, 2026

श्री रामकथा के उपलक्ष्य में भव्य मंगल कलश यात्रा सफलतापूर्वक सम्पन्न, जानिए खबर -

Sunday, May 17, 2026

खिलाड़ी शेफाली रावत ने किया कमाल, जानिए खबर -

Sunday, April 19, 2026

पियूष गौड़ बने उत्तराखंड सर्व समाज महासंघ के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष -

Saturday, April 18, 2026

मानवधिकार एवं सामाजिक न्याय संगठन छात्र को किया सम्मानित -

Saturday, April 18, 2026

सचिवालय सुपर लीग 2026 का खिताब सचिवालय बुल्स के नाम, जानिए खबर -

Saturday, April 18, 2026

पानी के लीकेज व दूषित जलापूर्ति पर उत्तराखंड जल संस्थान को दिया ज्ञापन -

Saturday, April 18, 2026

पकौड़ों की ठेली से आइएएस तक का सफर…. -

Thursday, April 16, 2026



बाल श्रम बिल संशोधन को शामिल करने की आधिकारिक मंजूरी

 

class of modi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में हुई केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आधिकारिक बाल श्रम (प्रतिबंध और नियमन) बिल, 2012 में संशोधनों को शामिल करने की मंजूरी दे दी गई।आधिकारिक बाल श्रम (प्रतिबंध और नियमन) बिल, 2012 के संशोधनों से बाल श्रम (प्रतिबंध और नियमन) बिल, 1986 में कई संशोधन होंगे। सभी कार्यों और प्रक्रियाओं में 14 साल से कम उम्र के बच्‍चों को काम पर रखना प्रतिबंधित होगा। इस पर प्रतिबंध की आयु मुक्‍त और अनिवार्य शिक्षा कानून, 2009 के तहत निर्धारित आयु से जोड़ दी गई है। हालांकि इसका एक अपवाद है जहां बच्‍चा परिवार या परिवार के ऐसे कारोबार में काम कर रहा हो जो निर्धारित खतरनाक काम और प्रक्रिया के तहत न आता हो। यह काम भी वह स्‍कूल से आने के बाद और छुट्टियों में करता हो। जहां बच्‍चा विज्ञापन, फिल्‍म, टेलीविजन धारावाहिकों या ऐसे किसी मनोरंजन या सर्कस को छोड़कर किसी खेल गतिविधि में काम कर रहा हो। हालांकि इसमें शर्ते और सुरक्षा से जुड़े कदम शामिल हो सकते हैं। ऐसे काम बच्‍चे की स्‍कूली शिक्षा को प्रभावित न करते हों। मंत्रिमंडल ने 14 साल से कम उम्र के बच्‍चों को काम पर रखने पर प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि यह कदम उठाते वक्‍त देश के सामाजिक ताने-बाने और सामाजिक-आर्थिक स्‍थितियों को भी ध्‍यान में रखना होगा। देश में बड़े पैमाने पर परिवारों के भीतर बच्‍चे कृषि कार्य या कारीगरी में अपने माता-पिता की मदद करते हैं और इस तरह अपने माता-पिता की मदद करते हुए वे इस काम के गुर भी सीखते हैं। इसलिए बच्‍चे की शिक्षा और देश की सामाजिक-आर्थिक स्‍थिति के साथ इसके ताने-बाने के बीच संतुलन बैठाने की जरुरत है। यही वजह है कि कैबिनेट ने बाल श्रम कानून में संशोधनों को मंजूरी देते हुए बच्‍चों को उनके परिवार या परिवार के उद्यम में मदद देने की अनुमति दे दी है। हालांकि परिवार के अंदर चलने वाले ये काम खतरनाक किस्‍म के न हों। बच्‍चे इस काम को स्‍कूल से आने के बाद और छुट्टियों के दौरान कर सकते हैं। बच्‍चे विज्ञापन, फिल्‍म, टेलीविजन धारावाहिकों या ऐसे किसी मनोरंजन या सर्कस को छोड़कर किसी खेल गतिविधि में काम कर सकते हैं। हालांकि इसमें शर्ते और सुरक्षा से जुड़े कदम शामिल हो सकते हैं। ऐसे काम बच्‍चे की स्‍कूली शिक्षा को प्रभावित न करते हों।बाल श्रम (प्रतिबंध और नियमन) कानून के तहत किशोरों (14 से 18 वर्ष की उम्र) के काम की नई परिभाषा तय की गई है। इसमें खतरनाक कामों और प्रक्रिया में उनके श्रम को प्रतिबंधित किया गया है। कानून का उल्‍लंघन न हो, इसके लिए नए संशोधनों में नियोक्‍ताओं के खिलाफ कड़े दंड के प्रावधानों का प्रस्‍ताव है। पहली बार कानून का उल्‍लंघन कर अपराध करने पर छह महीने से कम की कैद नहीं होगी। लेकिन यह अवधि दो साल तक बढ़ाई जा सकती है। जुर्माने की रकम भी 20,000 से कम नहीं होगी और इसे 50,000 रुपए तक बढ़ाया जा सकता है या फिर जुर्माना और सजा एक साथ हो सकती है। इसके पहले सजा की अवधि तीन महीने से कम की नहीं होती थी और जुर्माने की रकम 10,000 थी, जो 20,000 रुपए तक बढ़ाई जा सकती थी या फिर दोनों एक साथ चलते थे। दूसरी बार अपराध करने पर न्‍यूनतम कैद की अवधि एक साल की होगी और इसे बढ़ाकर तीन साल तक किया जा सकता है। इसके पहले दूसरी बार या उसके बाद भी अपराध करने पर कैद की न्‍यूनतम अवधि छह महीने की थी, जो दो साल तक बढ़ाई जा सकती थी।कानून का उल्‍लंघन करते हुए बच्‍चे या किशोर को काम पर रखने के नियोक्‍ता के अपराध को संज्ञेय बना दिया गया। माता-पिता/अभिभावकों के लिए सजा : मूल कानून में बाल श्रम अपराध के लिए माता-पिता के लिए भी वही सजा है जो नियोक्‍ताओं के लिए हैं। हालांकि माता-पिता और अभिभावकों की सामाजिक-आर्थिक स्‍थिति को देखते हुए पहली बार अपराध करने पर किसी सजा का प्रावधान नहीं होगा। दूसरी और उसके बाद के अपराध के लिए जुर्माना लगाया जाएगा जो 10,000 रुपए तक बढ़ाया जा सकता है।एक या अधिक जिलों में बाल और किशोर श्रम पुनर्वास कोष की स्‍थापना होगी। इस कोष से बाल और किशोर श्रम से छुड़ाए गए बच्‍चों का पुनर्वास होगा। इस तरह यह कानून अपने आप में पुनर्वास गतिविधियों के लिए कोष साबित होगा।

Leave A Comment