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मसूरी की माल रोड पर साइकल बैन असंवैधानिक : मैड

MAD

देहरादून | देहरादून के शिक्षित छात्रों के संगठन, मेकिंग अ डिफ़्रेन्स बाई बीइंग द डिफ़्रेन्स (मैड) के एक प्रतिनिधि मंडल ने ज़िला अधिकारी रविनाथ रमन से भेंट कर मसूरी के माल रोड पर साइकल बैन पर अपना कड़ा विरोध जताया और असंवैधानिक क़रार दिया। इसके समर्थन में मैड ने ज़िला अधिकारी को एक चार पृष्ठ का ज्ञापन सौंपा जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के मानूशि संगठन बनाम दिल्ली सरकार के फ़ैसले के विभिन अनुच्छेदों का हवाला दिया गया है। ग़ौरतलब है की इस केस में दिल्ली सरकार ने अपने यातायात नीति के तहत दिल्ली में साइकल रिक्शॉ की तादाद फ़िक्स कर दी थी और उसके अधिक मात्रा में रिक्शॉ चलाने पर पाबंद लगाने का एलान किया था। अपने फ़ैसले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह साफ़ किया था की साइकल एक प्रदूषण मुक्त एवं संग्रक्शन युक्त वाहन है जो बिना मोटर के चलता है और इसलिए इसको मास्टर प्लान में बढ़ावा देने की ज़रूरत है । दिल्ली उच्च न्यायालय ने अनुच्छेद पचास एवं एक्यावन में यह भी साफ़ किया था की किसी भी व्यापारिक गतिविधि का पूर्णतः निषेध सरकार को तभी करना चाहिए जब वह आम जनमानस के लिए घातक हो अन्यथा ये संविधान के अनुच्छेद उनिस के ख़िलाफ़ माना जाएगा जिसमें भारत के हर नागरिक को व्यापार करने का मूलभूत अधिकार प्राप्त है।मैड ने अपने ज्ञापन में यह भी साफ़ किया की इस तरह का निर्णय कथाकथित टैक्सी लौबी के कहने पर लिया गया है जो अस्वीकार करना चाहिए। इसके समर्थन में मैड ने केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु द्वारा दिया गया एक बयान भी सामने रखा जिसमें प्रभु ने लोकसभा में साइकल चलाने को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार को आग्रह किया था ।

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