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योग की क्रियाओं से कोई साइड-इफैक्ट्स नहीं होते : योगाचार्य दीपक रतूड़ी

 

 

 

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21 जून को योग दिवस घोषित होने पर हितेन्द्र सक्सेना ने गुरूकुल कांगडी के योगाचार्य श्री दीपक रतूड़ी जी से बातचीत के मुख्श अंश-

प्रश्न: सर्वप्रथम आपको योग दिवस के लिए बधाई, दीपक जी संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को योग दिवस घोषित
किया है कैसा लग रहा है ?

बहुत खुषी भी हुई और हैरानी भी क्योंकि योग दिवस तो सालों पहले ही घोषित हो जाना चाहिए था, लेकिन इसमें इतना समय लग गया। खुशी इस बात की है भारत के साथ-साथ विश्व ने योग को पूर्णं विष्वास और दिल से स्वीकार किया है। यही कारण है कि वैष्विक स्तर पर योग को स्वीकार किया जा रहा है। अगली कड़ी में जनता को योग के प्र्रति और जागरूक करना होगा ताकि वे योग के बहुउपयोगी आयामों का अधिक से अधिक लाभ ले पाएं।

प्रश्न: दीपक जी आजकल ऐसी धारणा बन गई है कि कोई बीमार होता है, तो उसे योग करके ठीक होने के
उपाय बताए जाते हैं ये कहां तक उचित है ?

नहीं ऐसा नहीं है, ऐसा भ्रम या प्रलोभन फैलाना गलत है। योग में कई अभ्यास व क्रियाएं ऐसी हैं जिनके नियमित अभ्यास से सम्पूर्णं शरीर को स्वस्थ्य व निरोगी बनाया जा सकता है, वहीं कुछ योगाभ्यास ऐसे हैं जिनको लंबे समय तक किए जाने से शरीर के कई रोगों को नियंत्रित किया जा सकता है। योग क्रियाओं में आप ऐसे परिणाम अपेक्षित नहीं कर सकते जिनको करके आपको तत्काल परिणाम प्राप्त हो जाएं जैसे सिरदर्द होने पर एस्प्रिन या सेरीडाॅन की गोली खाकर मिलते हैं। चूंकि योग कि क्रियाओं के कोई साइड-इफैक्ट्स नहीं होते इसलिए नियमित व सही ढंग से किए गए योग के परिणाम दूरगामी व अधिक प्रभावी होते हैं। हमारे पास कुछ विद्यार्थी ऐसे होते हैं जो 60 वर्ष की आयु में भी सूर्य नमस्कार बहुत अच्छे तरीके से कर सकते हैं तथा कुछ ऐसे विद्यार्थी भी होते हैं जो 15-16 वर्ष की उम्र में भी सूर्य नमस्कार तथा कठिन अभ्यास नहीं कर पाते। तो इसके लिए हम उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए पहले उनकी उन व्याधियों को दूर करते हैं और फिर उन्हें धीरे-धीरे वो सारे अभ्यास कराने लगते हैं जो उनके शरीर के मुताबिक उन्हें दिक्कत न करें।

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प्रश्न: आप अपनी दिनचर्या के बारे में हमारे पाठकों को बताइये।

आपका यह प्रश्न बहुत ही बढि़या है। अनुशासित दिनचर्या हम सभी के लिए जरूरी है। सही दिनचर्या न होने से शरीर पर योग का प्रभाव बेहद सीमित हो जाता है। मैं प्रतिदिन सुबह 4ः00 बजे उठता हॅॅू। ईष्वर वन्दना के बाद खाली पेट 1 या 2 गिलास पानी पीता हूँ। खाली पेट पानी पीने से पेट की गर्मी को राहत मिलती है व खाली पेट पानी पेट साफ रखने में मदद करता है। मैं सुबह तांबे के बर्तन में रखा पानी पीता हॅॅू। सुबह के समय तांबे के बर्तन का पानी अमृत तुल्य कार्य करता है। दांत साफ करने के लिए मैं आर्युवेदिक दंत मंजन इस्तेमाल करता हॅॅू। गाय का दूध उपलब्ध होने पर दूध में बादाम, अखरोट, काजू, अंजीर, छुआरा, मुनक्का, को पीसकर, काली मिर्च का पाउडर डालकर मिश्रण को उबाल लेता हूॅ व शहद के साथ लेता हॅॅू। अगर मुझे आंवला रस या दूध वगैरा लेना है तो मैं तांबे के बर्तन का पानी नहीं लेता, सादा पानी लेता हूॅ। ये पेय पीने से सप्तधातुओं की पुष्टि होती है अर्थात ये सात धातुएं रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, शुक्र जिनसे हमारा शरीर बना है इससे हमें बल प्राप्त होता है। तथा सुबह खाली पेट जो लोग चाय या काफी पीते हैं वो अपना पाचनतन्त्र स्वयं ही कमजोर करते हैं ऐसा करने से पेट में गैस व एसिडिटी बनेगी। भूख ठीक प्रकार से नहीं लगेगी क्योंकि सारी रात जब हम सोए रहते हैं तो उसके बाद सुबह उठने पर हमारे पेट में जो अग्नि है उसे शान्त करने के लिए जल की आवष्यकता होती है और हम उसमें चाय या काफी डालकर उस अग्नि को और भड़काने का कार्य करते हैं जो सही नहीं है। इसलिए सुबह पानी ही पीएं। सुबह 5 बजे से मेरी योग की कक्षांए प्रारभ्भ हो जाती हैं। मैं करीब 10 से 12 किलोमीटर दूर योग कक्षाओं के लिए जाता हूॅ। सुबह 9 बजे योग कक्षाओं से लौटता हूॅ। मैं दिन में केवल सुबह व शाम को खाना खाता हूॅ। सुबह 9ः00 बजे भरपेट सादा भोजन लेता हॅॅू, दिन में फलाहार या अंकुरित अनाज लेता हूॅ व रात को 7ः00 से 7ः30 बजे तक रात्रि भोजन करके निवृत हो जाता हूॅ। देखिए सुबह व शाम के बीच खाने का संतुलन बेहद जरूरी है। यदि सुबह का खाना सही मात्रा व सही ढंग से लिया जाए तो दिन भर शरीर को थकान व खाने की जरूरत महसूस नहीं होती है। दिन में फल व अंकुरित आहार लेने से शरीर को भारी अनाज की आवष्यकता महसूस नहीं होती। मैं अपनी शाम की कक्षाओं को षाम 7 बजे तक समाप्त कर लेता हॅॅॅॅू और घर आकर जल्दी से जल्दी रात्रि भोजन लेकर निवृत हो जाता हॅॅ। रात्रि भोजन समय पर लेने से पाचन क्रिया मजबूत रहती है व सोने से पूर्व खाने को पाचन के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। मैं दिनभर में नियमित समयान्तराल पर पानी पीता हॅॅू। दिनभर में मैं 12-15 गिलास पानी पी लेता हॅॅू। ंएक खास बात सुबह व शाम के खाने के एक घण्टे के अन्तराल के बाद ही पानी पीना चाहिए। यह पाचनक्रिया के लिए बेहद लाभकारी रहता है। आपको अपने भोजन में कोल्ड ड्रिंक्स, फास्ट फूड को बिल्कुल भी शामिल नहीं करना है। शौक के तौर पर लिए जाने वाले ये आहार कब आपको अपने अधीन कर लेते हैं आपको पता ही नहीं चलेगा। इसके बाद सिर्फ और सिर्फ शारीरिक परेषानियां और बीमारियां। मैं 12 महीने ठण्डे पानी से नहाना पसंद करता हॅू। ठण्डे पानी का स्नान शरीर व मन को अपार शान्ति प्रदान करता है। मैं बहुत कम टीःवी देखना पसंद करता हॅॅॅू। रात्रि को प्रायः 9ः30 बजे सोने चला जाता हॅॅू।

प्रश्न: क्या टी0वी0 देखकर या किताब पढ़कर भी योग सीखा जा सकता है ?

नहीं ये बिल्कुल गलत है क्योंकि बिना गुरू के अभ्यास करना बहुत ही गलत है। ऐसा इसलिए है कि शुरूआत में आप जो भी गलतियां करते हैं उन्हें आपको कराने वाले गुरू ही ठीक करा सकते हैं। अगर आप टी0वी0 देखकर या किताब पढ़कर योग करते हैं तो कई बार उसके बहुत गम्भीर परिणाम हो सकते हैं क्योंकि कई बार हो सकता है आपको कोई बात ठीक ढंग से समझ न आए लेकिन टी0वी0 या किताब में उस चीज को ठीक ढंग से समझाया गया हो। कई बार ये जानलेवा भी हो सकता है। कुंजल यानि खूब सारा पानी पीकर उसको मुंह द्वारा सारा पानी बाहर निकाल दिया जाता है। ये ष्शटकर्म में शोधन क्रिया के अन्र्तगत आता है। ऐसे ही एक बार एक छात्र ने बिना सोचे समझे कुंजल अकेले ही किया। उसने किताब में पढ़कर ऐसा करने का प्रयास किया। उसने खूब सारा पानी पिया तथा बाहर निकालने का प्रयास किया जब बहुत प्रयास करने पर भी उस लड़के का पानी पेट से नहीं निकला तब भी वह जोर लगाता ही रहा और इसी प्रयास में वह बेहोष होकर नीचे गिर गया। उसे तुरन्त अस्पताल ले जाया गया। वहां जाकर पता चला कि बहुत ज्यादा जोर लगाने की वजह से आतें अन्दर से फट गई थी और सारा पानी अन्दर ही फैल गया था। उसके बाद तुरन्त उसका आपरेशन किया गया। इतना सब होने के बाद उसकी जान तो बच गई लेकिन फिर वा योग या कोई भी अन्य अभ्यास करने के लायक नहीं रहा। सो इस तरह बिना गुरू के योगाभ्यास करना कभी-कभी बहुत खतरनाक हो सकता है।

प्रश्न: अन्त में आप पाठकों को क्या कहना चाहेंगे।

मैं पाठकों से यही निवेदन करना चाहूंगा कि योग को अपने जीवन में अवष्य अपनांए। अपनी दिनचर्या को सही करें। भोजन सुबह-षाम ही करें। दिन में भोजन न करें उसके बदले दिन में फल, अंकुरित अन्न ले सकते हैं। पीने का पानी बिल्कुल स्वच्छ हो तथा खाने के एक घण्टे बाद ही पानी पीएं। दिन में कम से कम 10 गिलासा पानी अवष्य पींए। सुबह उठते ही खाली पेट 1 या 2 गिलास पानी अवष्य पींए। पोषण युक्त चीजें खांए। योग हमारे लिए ऐसा है जैसे हमारे लिए भोजन और नींद है। यह हमारी सबसे बड़ी जरूरत है। सप्ताह में एक दिन उपवास जरूर रखें क्योंकि यह हमारे शरीर में से सारी गन्दगी निकालकर शरीर की सफाई का काम करता है। हंसना हमारे लिए बहुत ही जरूरी है क्योंकि जब हम खुल कर हंसते हैं तो सारे आक्सीटाक्सीन बाहर निकलते हैं तथा पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन हमारे फेफड़ों को मिलती है। हमेषा सही श्वास-प्रष्वास करें यानि हमेषा गहरे लम्बे श्वास-प्रष्वास करें क्योंकि ऐसा करने से हमारे फेफड़े सही तरह से आक्सीजन ग्रहण करते हैं तथा पूरी तरह से कार्बन डाई आक्साइड बाहर निकाल पाते हैं। तथा गहरी व लम्बी श्वासों के द्वारा हमारी आयु भी लम्बी होती है। आयुर्वेद में एक कहावत है कि भोजन कम और पानी ज्यादा पीना चाहिए। तथा पेट को 100ः के हिसाब से बांट लें उसमें 50ः भोजन 25ः पानी तथा 25ः वायु के लिए रखना चाहिए। अगर हम 100ः उसमें भोजन ही भर देंगे तो शरीर में कई प्रकार के उपद्रव पैदा हो सकते हैंै। भोजन को अच्छी तरह से चबा-चबा कर खांए। आजकल विटामिन डी-3 की कमी बहुत ज्यादा हो रही है। इसका कारण है धूप की कमी। इसे पूरा करने का आसान सा तरीका है कि सिर्फ 5 मिनट धूप में जीभ निकालकर बैंठें इससे आपके शरीर को 2 घण्टे से ज्यादा धूप प्राप्त हो जाएगी। दिन में एक बार कुछ समय ध्यान अवश्य करें इससे आपको मन में शांति प्राप्त होगी। मिट्टी चिकित्सा के द्वारा शरीर की असाध्य बीमारी को आसानी से खत्म किया जा सकता है। मालिष हमारे लिए बहुंत जरूरी है। इसलिए मालिष करने की आदत बनांए। वायु स्नान यानि कम से कम कपड़ों में रहना। जिससे हमारा शरीर स्वस्थ रहता है। एक्यूप्रेषर थैरेपी अवष्य करें। हमारे हाथ की हथेलियों तथा पैर के तलुवों में हमारा पूरा शरीर है अतः इनमें बिन्दुओं को दबा कर या बीज, मैगनेट लगाकर या रंग चिकित्सा द्वारा हम अपने शरीर में रोग को दूर कर सकते हैं। ज्यादा से ज्यादा श्रम करने की आदत बनांए। पैदल चलने की आदत, सीढ़ी चढ़ने की आदत, घर तथा आॅफिस के सारे काम मषीन से करने की बजाय अपने हाथों से करने की आदत बनांए। दिव्य संगीत को जरूर सुनें। मैने इस दिव्य संगीत के साथ ध्यान करवाकर कई विद्यार्थियों को अनिद्रा, बेचैनी, घबराहट, गुस्सा तथा मानसिक परेषानियों में बहुत लाभ होते हुए देखा है। अतः आप भी योग के द्वारा निरोग रहने का संकल्प लें।

 

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