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हमसफर कलम…….

 

एक पिता और बेटे का रिश्ता काफी कम एक दोस्त जैसा लगता है लेकिन जब पिता अकेले ही बेटे को पाल रहे हो तो उन्हें माँ, दोस्त, भाई या बहन का किरदार भी अकेले ही निभाना पड़ता है कुछ ऐसा ही रिश्ता था गणेश नेगी और अदव्य नेगी का । अदव्य 28 साल का हो चुका था लेकिन आज भी दोनों बाप बेटे बिना किसी झिझक के अपनी बात एक दूसरे के सामने ज़्यादातर रख ही देते थे । पिता रिटायर्ड टीचर थे अदव्य कि भी नौकरी भी किसी आईटी कंपनी में अच्छी तनख्वाह के साथ चल ही रही थी । 14 फरवरी को अदव्य का जन्मदिन था अदव्य ऑफिस से आया ही था कि उसके पिता ने उसके सामने उसके लिए 2 तोहफे रख दिये । अदव्य ने पहला तोहफा खोला तो उसमें नया टैब था दूसरा खोला तो उसमें एक पेन था। “ये क्या पापा हर जन्मदिन में मेरे लिए एक पेन ले आते हो फिर खुद ही इस्तेमाल कर लेते हो और वैसे भी आपको पता है कि मेरा काम कंप्यूटर में होता है पेन से दूर तक कोई रिश्ता नही मेरा ।” अदव्य ने कहा । “अरे बेटा टीचर रहा हूँ बांटने के लिए ज्ञान और देने के लिए कलम से बेहतर कुछ नही लगता मुझे, इस पेन के रूप में साथ रहूंगा तुम्हारे हमेशा और बुज़ुर्ग हूँ मेरा दिया हुआ तोहफा बड़े काम का ही होगा रखा करो अपने पास” पिता ने जवाब दिया । अदव्य “अच्छा पापा आपको याद है न 3 दिन बाद मुझे आफिस की तरफ से बाली जाना है लेकिन ऐसा गंदा से चेहरा मत बनाओ हफ्ते भर में वापस आ रहा हूं।” पिता ” हां भाई, लोग बाली हनीमून में जाते है मेरा बेटा ऑफिस टूर में जा रहा है ।”
अदव्य ” शुरू मत हो जाओ पापा, भूख लगी है मैं कपड़े बदल कर आता हूं फिर खाना खाते है।” कहकर अदव्य चला गया दोनों बाप बेटे ने मिलकर बातें करी और आखिरकार वो दिन आया जब अदव्य को जाना था । पिता छोड़ने एयरपोर्ट तक गए वहाँ उससे गले लगाकर टाटा बाई बाई कहकर चले आये ।अदव्य कि फ्लाइट थी दिल्ली से क्वालालंपुर और वहाँ से बाली । क्वालालंपुर पहुंचा तो आगे की फ्लाइट में समय था पर फ्लाइट में चढ़ने से पहले उसे एक फॉर्म भरना था । लेकिन वो भरे कैसे? वहाँ की भाषा उसे नही आती और हिंदी या अंग्रेज़ी उसके आस पास कोई नही समझ रहा था । गहरी सांस लेते हुए उसने अपनी छाती में हाथ रखा और अपनी छाती में उसे कुछ उभार से लगा दरअसल पिता ने गले लहते हुए उसकी शर्ट की जेब में वो तोहफे वाला पेन फिर से रख दिया था और वो इतना थका हुआ था कि रास्ते भर उसका ध्यान नहीं गया और रास्ते भर उसके पिता उसके साथ थे ।

– साहस

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