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‘साईं सृजन पटल’ का शुभारंभ

सृजनशीलता और नवाचार की नई पहल

देहरादून(अंकित तिवारी) | सृजनशीलता और लेखन का क्षेत्र हमेशा से समाज के विकास और समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। देहरादून के आर.के.पुरम में ‘साईं सृजन पटल’ के उद्घाटन के साथ ही साहित्यिक और सृजनशील गतिविधियों को नया प्रोत्साहन मिला है। इस सृजन पटल की स्थापना पूर्व प्राचार्य डा.के.एल. तलवाड़ द्वारा की गई है, जो कि उत्तराखंड के साहित्यिक जगत में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। इस पटल का उद्घाटन प्रसिद्ध साहित्यकार और पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक डा. सविता मोहन द्वारा किया गया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि लेखन और सृजन में वातावरण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। स्वस्थ और प्रेरणादायक वातावरण से सकारात्मक विचार स्वतः ही लेखनी में प्रकट होते हैं। उनका मानना है कि ऐसे प्रयास न केवल साहित्यिक अभिरुचियों को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि युवाओं को भी सृजनात्मकता के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं। डा. तलवाड़, जिन्होंने कर्णप्रयाग पीजी कालेज से सेवानिवृत्त होने के बाद इस पहल की शुरुआत की, अपने शैक्षिक जीवन में भी नवाचार और सृजनशीलता को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते रहे हैं। उनकी यह पहल एक सृजनशील मंच के रूप में उभरने की पूरी क्षमता रखती है, जहां युवा समाचार लेखन, प्रेस फोटोग्राफी, रिपोर्टिंग, फीचर लेखन और अभिलेखों के रखरखाव जैसी महत्वपूर्ण विधाओं में प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। विशिष्ट अतिथि डा. जानकी पंवार, जो कि कोटद्वार पीजी कालेज से सेवानिवृत्त प्राचार्य हैं, ने भी इस पहल की सराहना की और डा. तलवाड़ के इस प्रयास को लेखन कार्य को प्रोत्साहित करने के लिए एक सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सृजन पटल के माध्यम से युवाओं को न केवल लेखन के तकनीकी पहलुओं की जानकारी मिलेगी, बल्कि उन्हें अपने विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने का मंच भी मिलेगा।इस पटल के माध्यम से मेधावी विद्यार्थियों को स्व. साईं दास तलवाड़ छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी, जो कि उनके सृजनात्मक और शैक्षिक विकास में सहायक सिद्ध होगी। इस अवसर पर इन्साइडी क्रिएटिव मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के सी.ई.ओ. अक्षत और निदेशक नीलम तलवाड़ सहित ज्योति, आकांक्षा, आश्रय,रजत, शिवम,विमल, अनुष्का, स्नेहा,अक्षय, जितेंद्र व हेमंत हुरला अन्य स्टाफ मेंबर्स की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और भी विशेष बना दिया। ‘साईं सृजन पटल’ की स्थापना साहित्य और सृजनशीलता के क्षेत्र में एक नई दिशा की ओर संकेत करती है। इस पहल से न केवल साहित्य प्रेमियों को एक नया मंच मिलेगा, बल्कि भविष्य में यह पटल नए साहित्यिक और सृजनशील प्रतिभाओं के उभरने का माध्यम भी बनेगा। समाज के सृजनशील और शिक्षित वर्ग के लिए यह एक प्रेरणा स्रोत साबित हो सकता है, जिससे आने वाली पीढ़ियां सृजनशीलता के महत्व को समझते हुए आगे बढ़ सकेंगी।

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