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दिव्यंगता : जागरूकता अभियान के तहत निशुल्क शिविर का आयोजन

 

 

देहरादून | अंतरराष्ट्रीय प्रोस्थेटिक ऑर्थोटिक्स दिवस पर डॉ. विजय कुमार नौटियाल ( प्रोस्थेटिस्ट एवं आर्थोटिस्ट ) ने आज हरावाला में आम जन हेतु शारीरिक विकृति से होने वाली दिव्यंगता के बारे में जन जागरूकता अभियान के तहत निशुल्क शिविर का आयोजन कर घुटने से दर्द से पीड़ित, चपटृटे पैर ,रीड की हड्डी के दर्द ,घुटने आपस में टकराने एवं विभिन्न प्रकार की शारीरिक विकृति के रोकथाम एवं निवारण हेतु आज का विशेष शिविर का आयोजन किया गया इसमें विभिन्न प्रकार की दिव्यांगता वाले दिव्यांगजन को दी विशेष जानकारी दी गई।

5 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय प्रोस्थेटिक ऑर्थोटिक्स दिवस पूरे देश में मनाया जा रहा है जिसमें दिव्यांगों के पुनर्वास से संबंधित बहुत सारी जानकारियां आमजन तक पहुंचाने का भी कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में नौटियाल कृत्रिम अंग केंद्र शास्त्री नगर हरिद्वार रोड के डॉ विजय कुमार नौटियाल जी ने बताया कि प्रोस्थेटिक एवं ऑर्थोटिक्स चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जिसमें दिव्यांगजन के शारीरिक पुनर्वास को सुनिश्चित किया जाता है। यह शारीरिक पुनर्वास के क्षेत्र में आधुनिक उपचार के नए आयाम है, जो ऑर्थोपेडिक एवं न्यूरोमस्कुलर विकारों एवं कमियों के साथ-साथ जन्मजात विकृतियों और दुर्घटना में अंग विच्छेदन के पुनर्वास में अग्रणी एवं महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
दिव्यांगजन के शारीरिक एवं सामाजिक पुनर्वास को सुनिश्चित करना , स्वावलंबी उत्पादक एवं आत्मनिर्भर बनाना तथा दिव्यांगजन को समाज में सम्मानजनक जीवन हासिल करने में प्रोस्थेटिक एवं ऑर्थोटिक्स प्रोफेशनल की भूमिका अग्रणी एवं सराहनीय रही है।
जिस प्रकार हमारा देश अन्य क्षेत्रों में तरक्की कर रहा है, उसी प्रकार हमारे देश के प्रोस्थेटिस्ट एवं ऑर्थोटीस्ट दुनिया भर में अपना नाम रोशन कर रहे हैं व संसार की अच्छी से अच्छी तकनीक का प्रयोग कर दिव्यांगजन के जीवन में नई तकनीक का इस्तेमाल कर दिव्यांगजन का पुनर्वास कर उन्हें नया जीवन दे रहे हैं
प्रोस्थेटिक एवं ऑर्थोटिक चिकित्सा विज्ञान की वह दो शाखाएं हैं जिसमें अंग विच्छेदन में पूर्ण पुनर्वास उपलब्ध कराने के साथ-साथ हड्डी रोग, न्यूरो सर्जरी ,प्लास्टिक सर्जरी आदि शाखाओं के साथ सहायक उपकरणों की डिजाइन एवं निर्माण करके सहयोग उपलब्ध कराया जाता है।
प्रोस्थेटिक एवं ऑर्थोटिक प्रोफेशनल का मुख्य कार्य प्रोस्थेटिक शाखा के अंतर्गत अनुवांशिक या किसी दुर्घटना में अंग विच्छेदन को कृत्रिम प्रतिस्थापन कराकर शारीरिक पुनर्वास उपलब्ध कराना होता है। जिस में खोए हुए अंग से संबंधित शारीरिक संरचना का अध्ययन खोए हुए अंग का कृत्रिम प्रारूप तैयार करना एवं कृत्रिम अंग के निर्माण द्वारा शारीरिक पुनर्वास उपलब्ध कराना आदि सम्मिलित होता है।
ऑर्थोटिक शाखा के अंतर्गत चिकित्सा विज्ञान की विभिन्न शाखाओं जिस में मुख्यतः हड्डी रोग न्यूरो सर्जरी एवं प्लास्टिक सर्जरी विशेषज्ञ एवं मरीजों को शारीरिक पुनर्वास से संबंधित उपकरणों बरेसस ,कैलीपर इत्यादि को तैयार कर परामर्श एवं सहयोग उपलब्ध कराया जाता है।प्रोस्थेटिक एवं ऑर्थोटिक उपचार दिव्यांग लोगों को अपनी पूरी क्षमता का एहसास करने और एक स्वतंत्र और पूर्ण जीवन जीने के लिए सक्षम बनाता है यह उनके जीवन को बदल रहा है ।

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