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पहचान : खिलाडी गंभीर सिंह चौहान और दीपक सिंह रावत ने बढ़ाया उत्तराखंड का मान, जानिए खबर

देहरादून | CABI क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड इन इंडिया ने अपने समर्थनम ट्रस्ट बेंगलुरु के ऑफिस से जारी की 24 खिलाड़ियों की लिस्ट जिसमें उत्तराखंड के दो खिलाड़ी दीपक सिंह रावत और गंभीर सिंह चौहान शामिल हैं।ये इंडिया प्रोबेबल्स हैं और इन्हीं में से इनकी फिटनेस,परफॉर्मेंस, स्किल्स और टीम कॉम्बिनेशन के मापदंडों पर नेशनल कोचिंग कैंप और सिलेक्शन ट्रायल्स के बाद फाइनल 17 खिलाड़ियों का स्क्वायड की घोषणा होगी।खिलाड़ियों पर पूरी नजर रखी जाएगी। CABI के चेयरमैन डॉ महंतेश जी के ने कहा कि “एशिया कप पूरे एक दशक बाद लौटा है और भारतीय टीम इसमें चैंपियन बनने की पूरी प्रबल दावेदारी के साथ उतरेगी।”पहला संस्करण भी 2016 में भारत में ही केरल के कोच्चि शहर में हुआ था जिसे भारतीय टीम ने जीता था।अब दूसरा संस्करण बाग्लादेश की राजधानी ढाका शहर में 13 नवंबर 2026 से खेला जाएगा।ब्लाइंड क्रिकेट टीम में कुल(प्लेइंग) 11 खिलाड़ियों में 4 खिलाड़ी B1 कैटेगरी के,3 खिलाड़ी B2 कैटेगरी के तथा 4 खिलाड़ी B3 कैटेगरी के होते हैं।जिनमें B1 कैटेगरी के खिलाड़ी पूर्णतः दृष्टि दिव्यांग होते हैं तथा B2 और B3 कैटेगरी के खिलाड़ी अल्प दृष्टि दिव्यांग होते हैं।उत्तराखंड से दो खिलाड़ियों का नाम चयनित होने से CABU क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड उत्तराखंड के जेनरल सेक्रेटरी श्री अमनदीप आर्य ने खुशी जताई है और दोनों खिलाड़ियों और उनके कोच नरेश सिंह नयाल को बधाइयां दी हैं।उन्होंने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तराखंड में ब्लाइंड क्रिकेट के स्टार को बढ़ाने के लिए कार्य होते रहेंगे और यह सिलेक्शन उनमें और जोर देगा।इसके लिए एन आई ई पी वी डी में कार्यरत कोच नरेश नयाल भी बधाई के पात्र हैं।उनका जज्बा और खिलाड़ियों को तैयार करने की लगन अतुलनीय है।दोनों खिलाड़ियों के चयन से राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान और उनके परिवार में खुशी की लहर है।अब सभी को फाइनल टीम सिलेक्शन का इंतजार है।गंभीर इससे पहले भी इंडिया को दो बार रिप्रेजेंट कर चुके हैं।जबकि दीपक सिंह रावत के पास ये पहला मौका है कि वे टीम में अपनी जगह बना पाने के लिए कड़ी मेहनत करें।जबकि दीपक सिंह रावत वर्तमान में राजकीय प्राथमिक पाठशाला गमरी मोरी उत्तरकाशी में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं।वैसे दीपक उत्तरकाशी के ही किमदार सरनौल के मूल निवासी हैं।उनकी शिक्षा दीक्षा तुलनाका और फिर राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान देहरादून से ही हुई है।दोनों ही बचपन से अपने कोच नरेश नयाल के साथ ही ट्रेकिंग करते आए हैं और अब एक नए मुकाम पर जा रहे हैं।कोच ने कहा उनके लिए भी यह गर्व की बात है। कि वे इनको कम उम्र से तैयार कर के अपने प्रदेश उत्तराखंड और फिर देश का नाम करवाने में कार्यरत हैं।

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