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उत्तराखंड : सचिवालय ए ने जीता मोनाल कप 2025 का खिताब -

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मोनाल कप के लिए सचिवालय ए और पैंथर्स के बीच होगा फाइनल मुकाबला -

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निशा 6 बार हुई असफल, नहीं हारी हिम्मत बनी आइएएस -

Thursday, December 11, 2025

उत्तराखंड : छोटे-छोटे अपराधों में कारावास की सजा के बजाए अब सिर्फ अर्थ दंड का प्रावधान -

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अंकित तिवारी ने अपने जन्मदिन पर दिया रक्तदान का संदेश, जानिए खबर -

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मोनाल कप : सेमीफाइनल में पहुंची सचिवालय ए और सचिवालय डेंजर्स की टीम -

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इनसे सीखे : गरीबी से लड़कर पवन बने आइएएस -

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डॉ विरेन्द्र सिंह रावत को मिला लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड 2025 -

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मोनाल कप 2025 : हरिकेन और सचिवालय ईगल्स टीम की बड़ी जीत -

Tuesday, December 9, 2025

रॉयल स्ट्राइकर्स और सचिवालय ए की टीम मोनाल कप प्रतियोगिता के अगले दौर में पहुंची -

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दुःखद : ट्रैक्टर-ट्रॉली व बाइक की जोरदार भिड़ंत से गई दो लोगों की जान -

Saturday, December 6, 2025

मोनाल कप : मैच के अगले दौर में पहुँचे सचिवालय रॉयल स्ट्राइकर, सचिवालय ए , सचिवालय वॉरियर्स और सचिवालय पैंथर -

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नौसेना दिवस-2025 : राज्यपाल ने किया डॉक्यूमेंट्री का विमोचन, नौसेना की भूमिका की सराहना की -

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Friday, December 5, 2025



आखिर आंसू क्यों न निकले …

 

sapne

दारोगा जी ने बृद्ध को उलट पलट कर देखा तो दारोगा जी सन्न रह गए बृद्ध की साँसे चल रही थीं उसके ऊपर थोड़ा पानी छिड़का तो उसने जल्द ही आँखे खोल दी और बहुत अचम्भित होकर अपने चारों और खड़ी भीड़ को देखा दारोगा जी ने कई प्रश्न पूछे लेकिन बृद्ध शुन्य में निहारता रहा बड़े प्रयासों के बाद उसने इशारा किया कि उसे कुछ खिला दो , दारोगा जी ने पास ही एक घर का दरवाजा खटखटाया , उस घर की मैडम ने तुरंत ही खाने को रोटियाँ सब्जी पानी सब दिया, दारोगा जी ने अपने हाथों से बृद्ध को निबाला खिलाया इस बृद्ध को तीन दिनों से खाना नहीं मिला था भूख से तड़प कर शरीर से जान निकल ही जाने वाली थी कि किसी ने आकर एक निबाला दिया तो जान बच गयी मैं सोच कर ही हताशा से भर गया , एक वक़्त खाना न मिले तो कितनी तड़प लगती है , और इसके पास तो तड़पने के सिवाय कोई चारा ही नहीं था , तड़पते हुए इसने हज़ारों गाड़ियों को कारों को अपने सामने से आता जाता हुआ देखा होगा हज़ारो लोग खाने पीने का सामान को लाते लेजाते हुए देखा होगा सोच रहा हूँ कि उस वक़्त उसके दिमाग में क्या चल रहा होगा , खैर भूख के सामने शरीर घुटने टेक ही देता है शर्मनाक लगता है ये सोचना कि आज़ादी के 69 वर्षों के बाद भी इंसान भूख से तड़प तड़प कर मर जा रहा है, भला हो उस इंसान का जिसने कॉल करके सूचना तो दी, उस मैडम का जिन्होंने खाना दिया और ईश्वर भला करे दारोगा जी का जिन्होंने मानवीयता का परिचय देते हुए एक शानदार उदहारण प्रस्तुत किया ग़ाज़ीपुर में तैनात दारोगा जी जय किशोर अवस्थी को पहचान एक्सप्रेस संस्था सलाम करती है |

 

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