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लोहाघाट में कार खाई में गिरने से लगी आग में दो लोगों की मौत, तीन घायल -

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युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, जानिए खबर -

Saturday, June 20, 2026

पहचान : डीआईटी यूनिवर्सिटी की एनसीसी गर्ल्स कैडेट्स ने संस्थान और राष्ट्र का नाम किया रोशन -

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सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय संघ की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को दिलाई शपथ -

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मोदीपुरम से ऋषिकेश तक हाई स्पीड नमो भारत ट्रेन का सपना होने जा रहा सच -

Wednesday, June 17, 2026

दोषियों को कड़ा सबक सिखाए सरकारः अनुप पांडेय -

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देहरादून साइक्लिंग क्लब द्वारा श्रद्धांजलि साइकिल रैली आयोजित -

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शहरी पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन की दिशा में युवाओं की पहल, जानिए खबर -

Sunday, June 14, 2026

CANON C50 कैमरे की सभी नई तकनीक की जानकारी दी गयी -

Sunday, June 14, 2026

फुटबाल रेफ्रीयों के लिए फिटनेस और अपडेट वर्कशॉप आयोजक -

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संघर्ष, अनुशासन और आत्मविश्वास की मिसाल बनी बिनीता रावत -

Saturday, June 13, 2026

देहरादून में डेयरी संचालकों का फूटा गुस्सा: आसमान छूते दामों और उत्पीड़न के खिलाफ खोला मोर्चा -

Thursday, June 11, 2026

दागी अधिकारी को MD बनाने के लिए बदले नियम, चयन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल, जानिए खबर -

Thursday, June 11, 2026

पहचान : ऋषिकेश में घर-घर टिफिन पहुंचाने वाली बेटी बनी एसडीएम -

Sunday, June 7, 2026



‘सरकार’ हो तो ऐसी

AAP

दिल्ली में दो साल के समय में परिवर्तन देखने को मिली है यह हम नही वहाँ की जनता दिल खोल कर केजरीवाल सरकार की प्रशंसा कर रही है | केजरीवाल सरकार को जनता द्वारा प्रशंसा ऐसे ही नही मिल रही है बल्कि सरकार द्वारा किये गए विकास इसके निगेबान है | जिस तरह से केजरीवाल सरकार शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों की दशा प्राइवेट स्कूलों जैसी कर दी, वही जारी बजट से भी कम बजट में ब्रिज का निर्माण करना, भ्रस्टाचार पर नकेल कसना, स्वास्थ के क्षेत्र में मोहल्ला क्लिनिक बनाना , प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमानी फ़ीस पर पूर्णत…

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बस्तर के आदिवासी किसान की बेटी सावित्री बनेगी IIT इंजीनियर

pehchan

हौसलों की उड़ान में कितनी भी बाधाएं क्यों न हो हौसलों के द्वारा उड़ान कायम रहती है | इस कथन को साबित किया है एक आदिवासी किसान की बेटी ने | कुरंदी बस्तर के आदिवासी किसान की बेटी सावित्री कश्यप ने जेईई एडवांस में 1135 वीं रैंक हासिल की है | संसाधन की कमी को दरकिनार कर सावित्री ने यह साबित कर दिया है मनुष्य जो भी ठान ले तो वह पूरा जरूर होता है | माना की सावित्री कश्यप का चयन कोटे के अनुसार हुआ है लेकिन इस वर्ग में भी पढ़ाई का जज्बा रखना संसाधनों का न हो…

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एक MLA ऐसे भी , आज न घर है न दो जून की रोटी

pehchan

कर्नाटक में MLA बनने से पहले जो सादगी दिखती थी, वही आज भी बरकरार है. डेढ़ साल तक विधायक रहने के बाद भी उन्होंने कभी दौलत की लालच नहीं की और उनकी ईमानदारी के परिणाम का नतीजा यह है कि आज उन्हें अपने परिवार का पेट भरने के लिए ‘दो जून की रोटी’ भी मुहैया नहीं हो पा रही है. इसके बावजूद उनके हौसले बुलंद हैं आप को बता दे की वह दिन की रोटी के लिए महज 40 रुपए कमाकर भी खुश हैं | विदित हो की हुकरम्पा 1983 में राजनीति में कदम रखा था कर्नाटक विधानसभा चुनाव में…

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साक्षी चौहान 38 किलोमीटर का सफर तय कर गरीब बच्चों को बना रही है शिक्षित

NEO

आज के समय में दूसरों के लिए सहायता तो दूर सोचने का भी वक्त नहीं रहता है लेकिन इस कथन को गलत साबित किया है ऋषिकेश की साक्षी चौहान | साक्षी चौहान २५ किलोमीटर का दूरी तय कर गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए ऋषिकेश से देहरादून आती है | देहरादून में स्थित नियो विजन फाउंडेशन एनजीओ के तहत बिना किसी स्वार्थ साक्षी चौहान गरीब बच्चों को गीत संगीत सिखाने के साथ साथ पढ़ाने का सामाजिक कार्य करती है | इस कार्य पर साक्षी चौहान के पिता विनोद चौहान और माता सुनैना देवी को अपने बेटी पर गर्व…

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स्कूल के मध्याह्न भोजन में मिलने वाले अंडे को छिपाकर लाता है बेटा ,खिलाता है बीमार मां को !

PAHAL

रांची/गोड्‌डा। झारखंड के गोड्‌डा जिला के पांडुबथान सरकारी विद्यालय की कक्षा तीन में पढ़ने वाले अमित कोड़ा को नहीं पता कि मदर्स डे क्या है। हां इतना जरूर जानता है कि यह 9 वर्ष का बच्चा की उसकी मां के लिए अंडे खाना सबसे ज्यादा जरूरी है। जानकारी अनुसार टीबी रोग की मरीज सावित्री की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं कि वह पौष्टिक आहार ले सके, जबकि डॉक्टरों ने इन्हें खाने को कहा है। मां की हालत ने उसे स्कूल में मध्याह्न भोजन में मिलने वाले अंडे को छिपाकर घर लाने की युक्ति सूझी। अमित हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार…

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आज हैं महाराष्ट्र के ब्रांड एम्बेस्डर जो कभी चाय बेचने को थे मजबूर …

good

हम अपने बचपन के दिनों में अपनी दादा-दादी से किस्से-कहानियां सुना करते थे कि फलां के पास किस तरह एक भी पैसे नहीं थे | फलां ने किस प्रकार रात-रात भर जाग कर पढ़ाई की थी. उसे किस तरह पैसे के अभाव में मजदूरी करनी पड़ी. किस प्रकार रिक्शा खींचना पड़ा और चाय की रेहड़ी तक लगानी पड़ी | महाराष्ट्र राज्य के पुणे शहर में रहने वाले सोमनाथ गिरम के सफलता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है | वे एक बेहद गरीब परिवार में जन्मे थे और कभी दो जून की रोटी के लिए भी संघर्ष किया करते थे…

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पूर्व मुख्य्मंत्री का परिवार मजदूरी करने को मजबूर

EX BIHAR CM

पूर्णिया | बिहार के इस दलित मुख्यमंत्री के परिवार से मिलिए जिन्हें तीन बार मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला. जी हाँ, यह भोला पासवान शास्त्री का परिवार है जो पूर्णिया जिले के काझा कोठी के पास बैरगाछी गांव में रहता है. तस्वीर में इनकी हालत साफ नजर आती है और बिहार के दूसरे पूर्व मुख्यमंत्रियों से इनकी तुलना करेंगे तो जमीन आसमान का फर्क साफ नजर आएगा. हाल हाल तक यह परिवार मनरेगा के लिए मजदूरी करता रहा है ! बैरगाछी वैसे तो समृद्ध गांव लगता है, मगर शास्त्री जी का घर गांव के पिछवाड़े में है. जैसा कि अमूमन…

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दिव्यांग डिम्पी ने जीवन की दुश्वारियों को मजबूत इरादों से किया परास्त

dimpi

रुद्रप्रयाग | कौन कहता है कि आसमान में छेद नहीं हो सकता। एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो। कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है अगस्त्यमुनि क्षेत्र की बालिकाओं ने। जिन्होंने विकट परिस्थितियों को मात देकर सफलता के झण्डे गाड़े हैं। उनकी इस सफलता पर उनके मां बाप तो गौरवान्वित महसूस कर ही रहे हैं, बल्कि पूरा क्षेत्र ही उनकी सफलता पर बधाई देते हुए गौरवान्वित हो रहा है। इसमें पहला नाम है डिम्पी बैंजवाल का, जिसने जीवन की दुश्वारियों को अपने मजबूत इरादों से परास्त किया है। उसने दिव्यांग होते हुए हाई स्कूल की बोर्ड परीक्षा 62 प्रतिशत…

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18 साल पहले तब और अब …

jose

यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में जोसी एपोंटे ने अपना डिप्लोमा हासिल किया तो दर्शकों में तालियां बजाने वालों में एक खास मेहमान मौजूद थे। ये खास मेहमान थे वो पुलिस अफसर जिन्होंने जोसी को मौत के मुंह से सुरक्षित निकाला था। बीते हफ्ते ईस्टर्न कनेक्टिकट स्टेट यूनिवर्सिटी में जोसी ने डिप्लोमा हासिल किया तो पीटर गेट्ज भी पूरे जोश के साथ तालियां बजा रहे थे। जोसी ने कहा, जब मैं 5 साल की थी तो मौत के मुंह में करीब करीब जा चुकी थी। लेकिन ये पीटर और अथॉरिटी के दूसरे अधिकारी ही थे जिनकी वजह से आज मैं जीवित…

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8 घंटे मजदूरी करने वाली मीरा 54 % से बोर्ड परीक्षा की पास

meera

रांची। सीबीएसई बोर्ड में जब 95 फीसदी मार्क्स भी कम लगने लगे तब 10वीं में किसी के 54 पर्सेंट लाने की बात से शायद ही किसी को हैरानी हो। लेकिन ये जानकर आप को हैरानी होगी कि हर दिन अपने 8 घंटे ईंट उठाने वाली छात्रा ये 54 पर्सेंट अंक हासिल की हुई है । जिजान से मेहनत के बाद घर के काम भी करने वाली मीरा गोया को मुश्किल से 2 ही घंटे पढ़ाई के लिए मिल पाते थे। झारखंड के नयातोली गांव की 16 साल की मीरा ने अब जब ये कामयाबी हासिल की है तो देशभर में…

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