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अमित का गरीबी से आईपीएल तक का सफर -

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गरीबी, अकेलेपन और संघर्षों से रेसलर तक का सफर, जानिए खबर -

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साईं सृजन पटल ने मेधावी छात्रा शांभवी लोहनी को किया सम्मानित -

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पियूष गौड़ बने उत्तराखंड सर्व समाज महासंघ के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष -

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मानवधिकार एवं सामाजिक न्याय संगठन छात्र को किया सम्मानित -

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सचिवालय सुपर लीग 2026 का खिताब सचिवालय बुल्स के नाम, जानिए खबर -

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पानी के लीकेज व दूषित जलापूर्ति पर उत्तराखंड जल संस्थान को दिया ज्ञापन -

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Thursday, April 16, 2026



स्कूल के मध्याह्न भोजन में मिलने वाले अंडे को छिपाकर लाता है बेटा ,खिलाता है बीमार मां को !

PAHAL

रांची/गोड्‌डा। झारखंड के गोड्‌डा जिला के पांडुबथान सरकारी विद्यालय की कक्षा तीन में पढ़ने वाले अमित कोड़ा को नहीं पता कि मदर्स डे क्या है। हां इतना जरूर जानता है कि यह 9 वर्ष का बच्चा की उसकी मां के लिए अंडे खाना सबसे ज्यादा जरूरी है। जानकारी अनुसार टीबी रोग की मरीज सावित्री की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं कि वह पौष्टिक आहार ले सके, जबकि डॉक्टरों ने इन्हें खाने को कहा है। मां की हालत ने उसे स्कूल में मध्याह्न भोजन में मिलने वाले अंडे को छिपाकर घर लाने की युक्ति सूझी। अमित हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार…

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आज हैं महाराष्ट्र के ब्रांड एम्बेस्डर जो कभी चाय बेचने को थे मजबूर …

good

हम अपने बचपन के दिनों में अपनी दादा-दादी से किस्से-कहानियां सुना करते थे कि फलां के पास किस तरह एक भी पैसे नहीं थे | फलां ने किस प्रकार रात-रात भर जाग कर पढ़ाई की थी. उसे किस तरह पैसे के अभाव में मजदूरी करनी पड़ी. किस प्रकार रिक्शा खींचना पड़ा और चाय की रेहड़ी तक लगानी पड़ी | महाराष्ट्र राज्य के पुणे शहर में रहने वाले सोमनाथ गिरम के सफलता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है | वे एक बेहद गरीब परिवार में जन्मे थे और कभी दो जून की रोटी के लिए भी संघर्ष किया करते थे…

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पूर्व मुख्य्मंत्री का परिवार मजदूरी करने को मजबूर

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पूर्णिया | बिहार के इस दलित मुख्यमंत्री के परिवार से मिलिए जिन्हें तीन बार मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला. जी हाँ, यह भोला पासवान शास्त्री का परिवार है जो पूर्णिया जिले के काझा कोठी के पास बैरगाछी गांव में रहता है. तस्वीर में इनकी हालत साफ नजर आती है और बिहार के दूसरे पूर्व मुख्यमंत्रियों से इनकी तुलना करेंगे तो जमीन आसमान का फर्क साफ नजर आएगा. हाल हाल तक यह परिवार मनरेगा के लिए मजदूरी करता रहा है ! बैरगाछी वैसे तो समृद्ध गांव लगता है, मगर शास्त्री जी का घर गांव के पिछवाड़े में है. जैसा कि अमूमन…

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दिव्यांग डिम्पी ने जीवन की दुश्वारियों को मजबूत इरादों से किया परास्त

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रुद्रप्रयाग | कौन कहता है कि आसमान में छेद नहीं हो सकता। एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो। कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है अगस्त्यमुनि क्षेत्र की बालिकाओं ने। जिन्होंने विकट परिस्थितियों को मात देकर सफलता के झण्डे गाड़े हैं। उनकी इस सफलता पर उनके मां बाप तो गौरवान्वित महसूस कर ही रहे हैं, बल्कि पूरा क्षेत्र ही उनकी सफलता पर बधाई देते हुए गौरवान्वित हो रहा है। इसमें पहला नाम है डिम्पी बैंजवाल का, जिसने जीवन की दुश्वारियों को अपने मजबूत इरादों से परास्त किया है। उसने दिव्यांग होते हुए हाई स्कूल की बोर्ड परीक्षा 62 प्रतिशत…

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18 साल पहले तब और अब …

jose

यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में जोसी एपोंटे ने अपना डिप्लोमा हासिल किया तो दर्शकों में तालियां बजाने वालों में एक खास मेहमान मौजूद थे। ये खास मेहमान थे वो पुलिस अफसर जिन्होंने जोसी को मौत के मुंह से सुरक्षित निकाला था। बीते हफ्ते ईस्टर्न कनेक्टिकट स्टेट यूनिवर्सिटी में जोसी ने डिप्लोमा हासिल किया तो पीटर गेट्ज भी पूरे जोश के साथ तालियां बजा रहे थे। जोसी ने कहा, जब मैं 5 साल की थी तो मौत के मुंह में करीब करीब जा चुकी थी। लेकिन ये पीटर और अथॉरिटी के दूसरे अधिकारी ही थे जिनकी वजह से आज मैं जीवित…

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8 घंटे मजदूरी करने वाली मीरा 54 % से बोर्ड परीक्षा की पास

meera

रांची। सीबीएसई बोर्ड में जब 95 फीसदी मार्क्स भी कम लगने लगे तब 10वीं में किसी के 54 पर्सेंट लाने की बात से शायद ही किसी को हैरानी हो। लेकिन ये जानकर आप को हैरानी होगी कि हर दिन अपने 8 घंटे ईंट उठाने वाली छात्रा ये 54 पर्सेंट अंक हासिल की हुई है । जिजान से मेहनत के बाद घर के काम भी करने वाली मीरा गोया को मुश्किल से 2 ही घंटे पढ़ाई के लिए मिल पाते थे। झारखंड के नयातोली गांव की 16 साल की मीरा ने अब जब ये कामयाबी हासिल की है तो देशभर में…

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बचपन में सड़कों पर मांगी है भीख, आज हैं करोड़ों की कंपनी के मालिक

pehchan

जब चाहत हो किसी चीज के पाने की वह पूरा जरूर होता है ऐसी ही एक कहानी हर उस शख्स की हो सकती है जो हालात के सामने घुटने टेकने के बजाय उनसे लड़ने की ठान लेते हैं | हिम्मते मर्दा तो मददे खुदा जैसी कहावतें भी इन्हीं शख्सियतों के लिए कही गई हैं | 50 वर्षीय रेणुका आराध्या घनघोर गरीबी से निकल कर आज अपना करोड़ों का साम्राज्य स्थापित करने वाले इस शख्स की जिंदगी हम सभी हताश-निराश लोगों के लिए प्रेरणा हो सकती है | रेणुका बंगलुरू के नजदीक एनेकल तालुक के गोपसांद्रा गांव से ताल्लुक रखते हैं…

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बचपन में माँ के साथ चूड़िया बेचता था , आज है आईएएस

IAS

जज्बे रूपी उड़ान सिखना हो तो रमेश घोलप से सीखें | पारिवारिक हालातो ने जहां रमेश घोलप को अपनी माँ के साथ चूड़िया बेचने पर मजबूर होना पड़ा इतना ही नहीं बचपन में पोलियो होने पर भी उनके जज्बे को कोई डिगा नहीं सका | आईएएस बनकर ही डीएम लिया | यह स्टोरी उन लाखो युवाओं के लिए प्रेणना बन सकती है जो आईएएस बनकर देश और समाज की सेवा करना चाहते है | कहानी ऐसे शख्स की है जिसका बचपन विकलांगता और परिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ तले दबा हो | लेकिन रमेश ने इन हालातो को अपना बैसाखी नहीं…

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विभागीय लापरवाही के आगे बेबस हुआ छात्र

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देहरादून। जनता जन आंदोलन चेरिटेबल ट्रस्ट ने डाक विभाग और पासपोर्ट विभाग की लापरवाही के चलते विदेश में अपनी प्रतिभा दिखाने से सुभाष कोठियाल चूकने को लेकर शहीद स्मारक में धरना दिया। जनता जन आन्दोलन चेरिटेबल ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरुण खन्ना का कहना था कि नई टिहरी के कंडियाल गांव निवासी सुभाष कोठियाल जापान में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन नहीं कर पायेगा। केंद्र सरकार का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय देश भर से लगभग 60 बच्चों को एक सप्ताह के स्टडी टूर पर जापान भेज रहा है। उत्तराखंड से इस टूर में जाने वाला सुभाष एकमात्र छात्र है। कंडियाल गांव…

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97 साल के बुजुर्ग ने दी एमए की परीक्षा

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पटना: शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती और न ही शिक्षा उम्र की मोहताज है , इस बात को एक बार फिर साबित किया है 97 वर्ष की उम्र में स्नातकोत्तर (एमए) की परीक्षा दे रहे बुजुर्ग राजकुमार वैश्य ने । विदित हो की वैश्य ने वर्ष 1938 में स्नातक (बीए) की परीक्षा पास की थी और फिर नौकरी करने लगे। करीब 39 साल पहले वह नौकरी से रिटायर हुए। इस वक्त उनकी उम्र 97 साल है, लेकिन उच्च शिक्षा पाने की लगन के चलते उन्होंने अब एमए की परीक्षा दी है। जानकारी अनुसार राजकुमार वैश्य मूल रूप से बरेली…

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