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देहरादून में डेयरी संचालकों का फूटा गुस्सा: आसमान छूते दामों और उत्पीड़न के खिलाफ खोला मोर्चा

 

देहरादून | राजधानी देहरादून और आसपास के इलाकों में डेयरी संचालन और पशुपालन का व्यवसाय मुश्किलों के दौर में है। महंगाई की मार, पुलिस द्वारा उत्पीड़न और अराजक तत्वों की मनमानी से परेशान डेयरी संचालक एवं पशुपालक संघ ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ की एक बैठक में अध्यक्ष डी.एस. यादव के नेतृत्व में पशुपालकों ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है।डेयरी संघ का साफ कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में जनता के लिए दूध की आपूर्ति ठप हो सकती है।

पशुपालकों की 5 मुख्य मांगें और बड़ी समस्याएं:

भूसे और दाने की आसमान छूती कीमतें: बाजार में पशुओं के चारे, भूसे और दाने के दाम बेतहाशा बढ़ चुके हैं। महंगाई के इस दौर में पशुओं का पेट भरना डेयरी संचालकों के बजट से बाहर हो गया है। संघ ने सरकार से कीमतों को नियंत्रित करने की मांग की है।मृत पशुओं के उठान में अवैध वसूली: किसी पशु की मृत्यु होने पर उसे सुरक्षित तरीके से उठवाने में भारी दिक्कत आ रही है। आरोप है कि इस कार्य के लिए ठेकेदारों और संबंधित कर्मियों द्वारा मनमाने पैसों की अवैध वसूली की जा रही है। पशुपालकों ने इसके लिए एक पारदर्शी व्यवस्था बनाने की मांग की है।

टैक्स, चालान और पुलिस द्वारा उत्पीड़न पर लगे रोक: संघ की मांग है कि पशु चारा, भूसा और दाना ले जाने वाले वाहनों को टैक्स और चालान से पूरी तरह छूट दी जाए। परिवहन के दौरान पुलिस द्वारा किए जाने वाले अनावश्यक उत्पीड़न को तुरंत रोका जाए।शहरी क्षेत्रों में भी मिले पशु एम्बुलेंस: ग्रामीण क्षेत्रों की तर्ज पर देहरादून जैसे शहरी क्षेत्रों के लिए भी ‘पशु एम्बुलेंस’ की सेवा अनिवार्य की जाए। साथ ही, पशुओं के इलाज के लिए दवाइयां और टीके सरकारी सब्सिडी दरों पर उपलब्ध कराए जाएं।पशु परिवहन के दौरान सुरक्षा की गारंटी: वैध रूप से पशुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते समय कुछ अराजक तत्वों और संगठनों द्वारा डराने-धमकाने और व्यवधान पैदा करने के मामले सामने आ रहे हैं। दुखद यह है कि स्थानीय प्रशासन भी ऐसे समय में सहयोग नहीं करता। संघ ने वैध परिवहनकर्ताओं को पूरी प्रशासनिक सुरक्षा देने की मांग की है।

‘दूध की किल्लत के लिए तैयार रहे जनता और प्रशासन’

“महंगाई और प्रशासनिक उदासीनता के कारण वर्तमान में डेयरी व्यवसाय चलाना लगभग असंभव हो गया है। यदि सरकार ने हमारी इन जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उचित कार्रवाई नहीं की, तो पशुपालक इस सेवा को बंद करने पर मजबूर होंगे। इसका सीधा असर आम जनता तक पहुंचने वाली दूध की सप्लाई पर पड़ेगा।”  डी.एस. यादव, अध्यक्ष (डेयरी संचालक एवं पशुपालक संघ, देहरादून)

पशुपालकों ने चेतावनी दी है कि यह उनकी आजीविका का सवाल है और अब वे इस आर-पार की लड़ाई में पीछे नहीं हटेंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर संकट पर क्या कदम उठाता है।

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