कुलपति द्वारा एक वर्ष में गढ़वाल विवि ने नए आयाम स्थापित किए, जानिए खबर
श्रीनगर (गढ़वाल) 21 जून। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार, कौशल और जीवन की स्पष्ट दिशा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को अधोसंरचना, नवाचार और कौशल आधारित शिक्षा के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा। यह बात उन्होंने चौरास परिसर स्थित एकेडमिक एक्टिविटी सेंटर में आयोजित उनके एक वर्ष के कार्यकाल पूर्ण होने पर आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम के दौरान कहीं। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे अनेक विद्यार्थी हैं जो वर्षों तक अध्ययनरत रहते हैं, लेकिन उन्हें आगे की दिशा और अवसरों की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाती। ऐसे में शिक्षकों की भूमिका केवल शिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें विद्यार्थियों के मेंटर के रूप में उनका मार्गदर्शन भी करना होगा, ताकि वे बेहतर करियर और अवसरों की ओर अग्रसर हो सकें। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की इंजीनियरिंग टीम द्वारा अधोसंरचना विकास की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसे शीघ्र ही केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि मजबूत आधारभूत सुविधाएं विकसित होने के बाद विश्वविद्यालय में नए शैक्षणिक प्रयोग, अनुसंधान गतिविधियां और नवाचारों को गति मिलेगी। प्रो. सिंह ने कहा कि चारों परिसरों की बढ़ती शैक्षणिक आवश्यकताओं को देखते हुए शिक्षकों और कर्मचारियों के नए पदों की मांग की गई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शीघ्र आगे बढ़ेगी और जल्द ही रोस्टर प्रकाशित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बदलते समय की मांग को देखते हुए विश्वविद्यालय में रोजगारोन्मुख और कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए नए स्किल कोर्स शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ने के लिए उद्यमिता आधारित पाठ्यक्रम विकसित किए जाएंगे। उत्तराखंड से लगातार हो रहे पलायन पर चिंता व्यक्त करते हुए कुलपति ने कहा कि प्रदेश के लगभग तीन हजार गांव खाली हो चुके हैं। विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है कि वह ऐसी शिक्षा और कौशल प्रदान करे, जिससे स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार और आजीविका के अवसर प्राप्त हो सकें। कुलपति ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का श्रेय पूरी टीम को देते हुए कहा कि कोई भी कुलपति अकेले विश्वविद्यालय का संचालन नहीं कर सकता। अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों से ही संस्थान आगे बढ़ता है।





















