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कश्मीरी अलगाववादी मसरत कर सकता है हर्जाने की मांग

पहले ही अलगाववादी ने नेता की रिहाई पर शर्मिंदगी झेल रही सरकार को लग सकता है एक और झटका, जम्मू कश्मीर से ये खबर आ रही है की जम्मू-कश्मीर का अलगाववादी नेता खुद को गैर कानूनी रूप से हिरासत में रखे जाने को लेकर अब सरकार से मुआवजा मांगने की तैयारी कर रहा है। साफ़ तौर पर अब ये सरकार के लिए बड़ी शर्मिंदगी की बात होगी | केंद्रीय गृह मंत्रालयpehchan express को इसकी चिंता भी  सताने लगी है। गौरतलब है की  मसरत को सितंबर 2014 से लेकर मार्च 2015 तक हिरासत में रखा गया था।

जिस जन सुरक्षा कानून के अंतर्गत मसरत की गिरफ्तारी हुई थी इसकी अवधि पिछले साल सितंबर में ही खत्म हो गई थी लेकिन इसके बावजूद उसे फरवरी तक गैर कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया। अगर मसरत आलम इस मामले को लेकर कोर्ट जाता है तो इस बात की पूरी संभावना है कि फैसला उसके पक्ष में आएगा। गृह मंत्रालय अब राज्य सरकार से उम्मीद कर रही है कि वह मसरत की जमानत को लेकर सबूतों का बारीकी से अध्ययन करके यह बताएगी कि क्या उसने जमानत के बाद किसी प्रकार का कोई कानून तोड़ा है।
गृह मंत्रालय के अधिकारी ने नाम ना छपने की शर्त पर  कहा कि इस पूरे मामले को शुरू से ही गलत तरीके से हैंडल किया गया। सर्वप्रथम तो उसकी हिरासत को लेकर राज्य के अधिकारियों ने लापरवाही बरती फिर राज्य सरकार ने ढिलाई दिखाई। मसरत खुद को हिरासत में रखे जाने को लेकर पहले भी कोर्ट गया है और अब भी वह ऐसा ही करने की तैयारी कर रहा है और अगर वह ऐसा करता है तो इससे केंद्र और राज्य सरकार दोनों की किरकिरी होगी। इतना ही नहीं वह कोर्ट से राहत पाने के बाद लोगों को यह संदेश देने में सफल हो सकता है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ अन्याय होता है।

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