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पहचान : जूते खरीदने के नही थे पैसे, आज देश के लिए बिंदिया जीत रही मेडल

 

मणिपुर | कहते हैं कि ‘बड़े सपने के लिए बड़ा हौसला चाहिए’ और बिंदिया ने इसे शायद अपने जीवन का सूत्र वाक्य बना लिया है | वेटलिफ्टिंग की यात्रा बिंदिया के लिए बहुत मुश्किल रही है | एक वक्त ऐसा था कि नियमित आय के लिए उनके पास कोई अच्छी नौकरी तक नहीं थी | खेल में अपने करियर को बढ़ाने के लिए जरूरी आमदनी तक नहीं कर पा रही थीं | वेटलिफ्टिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले जूते काफी महंगे होते हैं | बिंदिया के पास उसे खरीदने के लिए पैसे नहीं होते थे | एक साल पहले तक 25,000 रुपयों के लिए भी उन्हें दोस्तों से मदद मांगनी पड़ती थी | बिंदिया ने परिवार की आर्थिक स्थिति और अपनी कम आय जैसी परेशानियों को अपने सपने को पूरा करने के बीच में नहीं आने दिया था | उन्होंने इन मुश्किलों को परे रखकर अपनी ट्रेनिंग, फिटनेस पर पूरा ध्यान दिया और आज वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश के लिए गोल्ड जीतने के बाद कॉमनवेल्थ में सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं | 23 साल की बिंदियारानी देवी ने वेटलिफ्टिंग के 55 किग्रा वेट कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता है | उन्होंने कुल 202 किग्रा का वजन उठाया था | स्नैच के पहले प्रयास में उन्होंने 81 किग्रा वजन, दूसरे प्रयास में 84 और तीसरे प्रयास में 86 किग्रा वजन उठाया था | स्नैच के बाद ओवरऑल उनकी रैंकिंग तीसरे नंबर पर थी और देश को मेडल की पूरी उम्मीद लग रही थी | क्लीन एंड जर्क के पहले प्रयास में मणिपुर की युवा वेटलिफ्टर ने 110 किग्रा वजन उठाया था. हालांकि, दूसरे प्रयास में 114 किग्रा वजन उठाने में वह असफल रही थीं | तीसरे प्रयास में उन्होंने पूरा ज़ोर लगाया था और 116 किग्रा का वजन उठाकर सिल्वर अपने नाम कर लिया | इसके साथ ही पूरा देश एक और मेडल की खुशी में झूम उठा था |

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