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किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि उपज का समूहन….

देहरादून | नाबार्ड द्वारा 29 दिसम्बर, 2020 को स्टेट क्रेडिट सेमिनार वर्ष 2021-22 का आयोजन किया गया। सेमिनार के मुख्य अतिथि माननीय कृषि मंत्री सुबोध उनियाल तथा विशिष्ट अतिथि सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत उत्तराखण्ड सरकार ने स्टेट फोकस पेपर का विमोचन किया। साथ ही इस अवसर पर किच्छा के विधायक राजेश शुक्ला, वित्त सचिव- सौजन्या, भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक राजेश कुमार, उत्तराखण्ड बागवानी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ए.के. कर्नाटक, उत्तराखण्ड कॉपरेटिव फेडरेशन के उपाध्यक्ष हयात सिंह मेहता, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के समन्वयक डी.पी. भट्ट, निबंधक सहकारी समितियाँ बी.एम. मिश्रा, अपर सचिव कृषि- राम बिलास यादव, सहकारी बैंकों के महाप्रबंधक, वाणिज्यिक बैंकों के क्षेत्रीय प्रभारी, उत्तराखंड ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष, राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारी, एनजीओ, एफपीएओ, प्रगतिशील किसान तथा डीडीएम एवं नाबार्ड के अधिकारी/ स्टाफ सदस्य मौजूद थे। स्टेट फोकस पेपर में आगामी वित्त वर्ष के लिए अनुमानित परिव्यय तथा ज़िले में कृषि, कृषीतर क्षेत्रों में ऋण संभाव्यताओं, प्रत्येक क्षेत्र/ उपक्षेत्रों के अंतर्गत बुनियादी ढांचे की स्थिति तथा इनके अंतरालों का समेकित आकलन किया गया है ।  नाबार्ड के इस ‘रोड-मैप’ के आधार पर राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति उत्तराखण्ड राज्य के लिए वार्षिक ऋण योजना बनाती है तथा अग्रणी बैंक योजना के तहत बैंकों के लिए लक्ष्य निर्धारित करती है । राज्य सरकार को भी इससे अपने वार्षिक बजट में ऋण उपयोग एवं विकास के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे, लिंकेज और विस्तार सेवाओं हेतु उचित प्रावधान करने में सहायता मिलती है । नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. ज्ञानेंद्र मणि ने अतिथियों का स्वागत करते हुए अपने वक्तव्य में स्टेट फोकस पेपर तथा पीएलपी की पृष्टभूमि पर प्रकाश डाला और इस वर्ष स्टेट फोकस पेपर के विषय “किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि उपज का समूहन” की विशेषता बताई है। डॉ. मणि ने नाबार्ड के पास उपलब्ध विभिन्न निधियों जिसमें आरआईडीएफ के अतिरिक्त एलटीआईएफ, सूक्ष्म सिंचाई, डेयरी प्रोससिंग, नीडा, स्वच्छ भारत मिशन- ग्रामीण, वाटरशैड, एआईएफ, वित्तीय समावेशन के विभिन्न उत्पाद, जलवायु परिवर्तन, ग्राम्य विकास निधि आदि के बारे में बताया तथा राज्य सरकार व बैंकों से अनुरोध किया कि इन निधियों का अधिक से अधिक उपयोग करें और राज्य के विकास में सहयोग करें। राज्य के विकास में नाबार्ड द्वारा बुनियादी जरूरतों, नीतिगत पहलों तथा विकास की प्राथमिकताओं और ऋण वितरण प्रणाली की क्षमता को ध्यान में रखते हुए उत्तराखण्ड के लिए वर्ष 2021-22 हेतु रूपए 27160.16 करोड़ की ऋण संभाव्यता का आंकलन किया गया है जिसमें से कृषि के लिए रुपए 12648.50 करोड़ का आकलन है. यह ऋण संभाव्यता विगत वर्ष से 10 प्रतिशत अधिक है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के समन्वयक डी.पी. भट्ट ने स्टेट फोकस पेपर में प्रस्तुत ऋण संभाव्यताओं पर मिलकर कार्य करने तथा केसीसी के माध्यम से किसानों तक समय पर ऋण पहुँचाने के लिए सभी बैंकर्स से अनुरोध किया। सीडी रेश्यो बढ़ाने तथा वित्तीय साक्षरता पर जागरूकता बढ़ाने पर भी बल दिया।

नाबार्ड के ग्रामीण व कृषि क्षेत्र के प्रयासों की सरहाना की

वीर चंद गढ़वाली उत्तराखण्ड बागवानी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ए.के. कर्नाटक ने नाबार्ड के ग्रामीण व कृषि क्षेत्र के प्रयासों की सरहाना की तथा उत्तराखण्ड के पहाड़ों से हर वर्ष हो रहे उपजाऊ मिट्टी के कटाव को रोकने पर मिलकर कार्य करने का अनुरोध किया। सेमिनार में भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक राजेश कुमार ने कहा कि नाबार्ड ने स्टेट फोकस पेपर को अथक मेहनत से तैयार किया है तथा जो योजनाएं प्रस्तुत की हैं उन पर कार्यान्वयन करने की जिम्मेदारी सभी बैंकों व एलडीएम की है। उन्होंने कहा कि किसानों का हित ही देश हित है तथा कृषि में क्रेडिट बढ़ाने पर बल दिया। सिक्किम के ऑर्गेनिक मॉडल को अपनाकर उत्तराखण्ड को भी ऑर्गेनिक के क्षेत्र में काम करने का सुझाव दिया। सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने नाबार्ड को स्टेट फोकस पेपर बनाने के लिए बधाई दी तथा खुशी जाहिर करते हुए कहा कि नाबार्ड राज्य की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। नाबार्ड द्वारा सहकारी बैंकों को पुर्नवित्त सहायता द्वारा बैंकों के संसाधनों में वृद्धि की जा रही है तथा साथ ही पैक्स का कम्प्यूटीकरण, पैक्स को बहुउद्देशीय सेवा केंद्र बनाने आदि के माध्यम से सहयोग कर रहा है। स्टेट फोकस पेपर की थीम को प्रासंगिक बताते हुए उन्होने राज्य सरकार द्वारा किसानों के लिए किए जा रहे कार्यों पर प्रकाश डाला जिसमें किसानों के लिए 3 लाख तक का ब्याज रहित ऋण, डेयरी क्षेत्र में पशुधन बढ़ाने हेतु 50 प्रतिशत की छूट, स्थानीय कृषि उत्पाद को एमएसपी पर खरीद, सहकारी बैंकों ऋण वसूली आदि प्रमुख हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नाबार्ड द्वारा तैयार यह दस्तावेज राज्य में ऋण प्रवाह को बढ़ावा देगा तथा रोजगार सृजन में मदद करेगा। सेमिनार के मुख्य अतिथि माननीय कृषि मंत्री सुबोध उनियाल जी ने स्टेट क्रेडिट सेमिनार के आयोजन के लिए नाबार्ड को बधाई दी तथा नाबार्ड के सभी विकासपरक कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस कोविड महामारी काल में भी नाबार्ड स्वयं आगे आकर कार्य कर रहा है जो सराहनीय व प्रशंसनीय है। इस वर्ष का विषय “किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि उपज का समूहन” निश्चित रूप से भारत सरकार की योजना किसानों की आय को दोगुना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि केवल कृषि से किसानों की आय को दोगुना नहीं किया जा सकता है जरूरत है- मिश्रित खेती करने, अन्य संबंधित गतिविधियों का अपनाने तथा बिचौलियों को दूर रखने, उत्पादों के बेहतर ब्रांडिग तथा पैकेजिंग की। पहाड़ी में जहाँ भूमि जोत छोटे व बिखरी है वहाँ समूह में खेती करने की आवश्यकता है। राज्य सरकार प्रत्येक न्याय पंचायत में एक आईएमए विलेज विकसित कर किसानों के लिए आय के नए स्रोत्र सृजित करेंगी। साथ ही स्थानीय उत्पाद को बढ़ावा देने तथा बाजार की मांग के अनुसार खेती करने जिसमें मशरूम, जड़ी-बूटी, सुगन्धित पौधे तथा मधु मक्खी पालन आदि को अपनाने पर जोर दिया। राज्य में फसलों को जंगली जानवरों से बचाने तथा इनपुट लागत को कम करने हेतु रोपवे पर कार्य का सुझाव दिया। साथ ही उन्होंने बैंकर्स से अनुरोध किया कि सरकार की स्कीमों का फायदा सही लोगों को मिले इसके लिए बैंकर्स ऋण देते समय अधिक सतर्क रहे और मल्टिपल फाईनेंसिंग न करने की भी सलाह दी। किसानों को अधिक से अधिक सुविधा प्रदान कर कोरोना में लौटे लोगों को कृषि से पुनः जोड़ने पर बल दिया। सभी बैंकों से भी अनुरोध किया कि स्टेट फोकस पेपर में उठाए सभी मुद्दों पर मिलकर काम करें ताकि एक संगठित प्रयास से राज्य को अधिक उन्नत बना सकें। सेमिनार में आकांक्षा वाधवा, प्रबंधक ने प्रजेंटेशन के माध्यम से नाबार्ड के कई पहलू रखे व कार्यक्रम का संचालन विकास कुमार जैन ने किया। स्टेट क्रेडिट सेमिनार में प्रगतिशील किसान प्रेम चंद शर्मा ने भी अपने विचार रखे। अंत में महाप्रबंधक भास्कर पंत ने उपस्थित सेमिनार में भाग लेने वाले सभी अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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