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गंगा को प्रदूषण मुक्त बनायेंः चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश । बीएचईएल, गंगा एक्शन परिवार और फिक्की के संयुक्त तत्वावधान में हरिद्वार में मार्च 2020 से पहले पांच बायोडाइजेस्टर शौचालय काम्पलेक्स  के निर्माण हेतु परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती, अनिल कपूर, निदेशक (मानव संसाधन) बीएचईएल, नई दिल्ली, संजय गुलाटी, कार्यपालक निदेशक, बीएचईएल, हरिद्वार, निरंकार सक्सेना, डिप्टी सेक्रेटरी जनरल, फिक्की, नई दिल्ली, संजय सिन्हा जी, महाप्रबंधक (मानव संसाधन) हीप बीएचईएल, हरिद्वार और गंगा एक्शन परिवार से गंगा नन्दिनी त्रिपाठी की विस्तृत चर्चा हुई। चर्चा के दौरान बीएचईएल प्रतिनिधि ने बताया कि भारत हैवी इलेक्ट्रीकल्स लिमिटेड द्वारा कार्पोरेट सामाजिक दायित्व, फिक्की और गंगा एक्शन परिवार की संयुक्त पहल से 25 बायोडाइजेस्टर शौचालय काम्पलेक्स के निर्माण का संकल्प लिया गया था अब तक 20 शौचालय काम्पलेक्स बनकर तैयार हो गये है जिसमें तीन ऋषिकेश में है। बायो डाइजेस्टर शौचालय सीवेज की समस्या का बेहतर समाधान है जो पर्यावरण के अनुकूल भी है।हरिद्वार और ऋषिकेश जो की भारत की प्रमुख आध्यात्मिक शहर है यहां पर भारत सहित विश्व के अनेक देशों से साधक आते है अतः इन शहरों को स्वच्छ रखना जरूरी है। बायो डाइजेस्टर शौचालयों का निर्माण हरित और स्वच्छ कुम्भ की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। इसके निर्माण से बाहर से आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को शौचालय की सुविधा प्रदान करने के साथ तीर्थ क्षेत्र में सीवेज प्रबंधन एवं गंगा जी की स्वच्छता और पवित्रता को भी बनायें रखा जा सकता है।भारत के यशस्वी और ऊर्जावान श्री नरेन्द्र मोदी जी के कनिष्क भाई प्रहृलाद मोदी ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से भेंट कर श्री मद्भागवत कथा और परमार्थ गंगा आरती में सहभाग किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि हरिद्वार और ऋषिकेश में बायोडाइजेस्टर शौचालय काम्पलेक्स के निर्माण से गंगा को शुद्ध, पवित्र और निर्मल बनायें रखने में काफी हद तक मदद मिलेगी। वर्ष 2021 के कुम्भ से पहले हमारा लक्ष्य होना चाहिये की दिव्य गंगा को प्रदूषण मुक्त बनायें और उसे उसका वास्तविक स्वरूप प्रदान करें। स्वामी जी ने कहा कि विश्व का सबसे बड़ा मेला कुम्भ भारत की संस्कृति का प्रतीक है। कुम्भ मेला अध्यात्म के केन्द्र के साथ अपनी जड़ांे से जुड़ने का एक माध्यम है। इसके माध्यम से लोग अपनी संस्कृति को पहचानते है, अपनी गौरवमयी संस्कृति के दर्शन करते है और इस गौरवमय संस्कृति के अंग बनते है। साथ ही कुम्भ  स्वच्छता को आत्मसात करने का सबसे बेहतर माध्यम है। स्वामी जी ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन का अर्थ केवल सड़कों को स्वच्छ करना नहीं है बल्कि स्वच्छ भारत का अर्थ है। हमारी नदियों-नालों और हमारे आस-पास के वातावरण को स्वच्छ करना, हर गांव और शहर को खुले में शौच से मुक्त करना और यही संदेश विश्व स्तर पर हम कुम्भ के माध्यम से दे सकते हंै। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के साथ बीएचईएल और फिक्की के उच्चाधिकारियों ने मिलकर विश्व स्तर पर सभी को स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया।

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