Breaking News:

सचिवालय सुपर लीग में वारियर्स और माइटी-11का सफर समाप्त -

Tuesday, April 14, 2026

मिस्टर एवं मिस उत्तराखंड 2026 का ताज़ सजा हर्ष चौधरी और तरुषी डोभाल के नाम -

Sunday, April 12, 2026

उत्तराखंड के खिलाडी आदित्य सजवान पर गर्व, जानिए खबर -

Thursday, April 9, 2026

देहरादून में मनाया गया णमोकार दिवस, जानिए खबर -

Thursday, April 9, 2026

सचिवालय सुपर लीग 2026: ‘वॉरियर’ टीम का धमाकेदार जीत -

Thursday, April 9, 2026

“एशिया बुक ऑफ़ अचीवमेंट रिकॉर्ड 2026” से सम्मानित हुए डॉ विरेन्द्र सिंह रावत -

Monday, April 6, 2026

सचिवालय माइटीज की 8 विकेट से जीत, जानिए खबर -

Monday, April 6, 2026

सचिवालय सुपर लीग : उद्घाटन मैच में सचिवालय ए की शानदार जीत -

Friday, April 3, 2026

देहरादून में बढ़ते अपराध और नशे के खिलाफ कांग्रेस का हल्ला बोल, जानिए खबर -

Thursday, April 2, 2026

विदेशी शिक्षा का भरोसेमंद ब्रांड बना TIG, जानिए खबर -

Wednesday, April 1, 2026

विधिक जागरूकता रूपी कार्यशाला का आयोजन -

Wednesday, March 25, 2026

विज्ञान प्रतियोगिता के छात्रों को पुरस्कृत किया गया, जानिए खबर -

Wednesday, March 25, 2026

देहरादून में समिट फिनसर्व ने नए कार्यालय का किया शुभारंभ, जानिए खबर -

Tuesday, March 24, 2026

नन्हे-मुन्नों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, जानिए खबर -

Tuesday, March 24, 2026

‘मिस टैलेंटेड’ बनीं उत्तराखंड की बेटी वैष्णवी लोहनी, जानिए खबर -

Monday, March 23, 2026

कालिख पोते जाने के विरोध में पुतला दहन, जानिए खबर -

Monday, March 23, 2026

समाजसेवी जितेंद्र कुमार डंडोना को मिला “राष्ट्रीय प्रतिष्ठा पुरस्कार” -

Monday, March 23, 2026

19 अप्रैल को दौड़ेगा उत्तराखंड, विजेताओं पर होगी 10 लाख की धनवर्षा -

Thursday, March 19, 2026

मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स द्वारा उत्तराखंड में ब्रांड का दूसरा शोरूम खुला -

Wednesday, March 18, 2026

“वैश्य एकता दिवस” पर हर्ष उल्लास, जानिए खबर -

Tuesday, March 17, 2026



राज्य आंदोलनकारियों को बड़ा झटका, 10% के क्षैतिज आरक्षण असंवैधानिक घोषित

Nainital-High-Court

उच्च न्यायालय ने सरकार और राज्य आंदोलनकारियों को बड़ा झटका देते हुए सरकारी सेवा में दस प्रतिशत के क्षैतिज आरक्षण को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। बुधवार को न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। इससे पहले खंडपीठ में मत विभाजन होने के कारण इस मामले में फैसला नहीं हो पाया था। इसके बाद यह मामला एकल पीठ के पास पहुंचा था और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकल पीठ ने भी करीब तीन महीने पहले सुनवाई पूरी करने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। सरकारी सेवा में दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का तत्कालीन कांग्रेस सरकार काफैसला विवाद में आने के कारण उच्च न्यायालय पहुंचा था। इसमें राज्य आंदोलनकारियों की सीधी नियुक्ति को चुनौती दी गई थी। इस बीच राज्य आंदोलनकारियों की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि सरकार ने दो अलग-अलग शासनादेश जारी कर राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी सेवा में 10% का क्षैतिज आरक्षण दिया है। इसी के तहत उनको नियुक्तियां दी जा रही हैं। हाइकोर्ट ने बुधवार को सुनाए गए अपने फैसले में क्षैतिज आरक्षण को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। खंडपीठ में जजों ने दी थी अलग-अलग राय इस प्रकरण खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई तो उसमें दोनों न्यायमूर्तियों की राय अलग-अलग होने पर मामला मुख्य न्यायाधीश को रेफर कर दिया गया था। खंडपीठ के न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया का मत था कि राज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण देना असंवैधानिक है। इस पीठ के न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी ने आरक्षण को विधि सम्मत माना था। मत विभाजन होने के कारण मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ ने मामला तीसरी बेंच को रेफर किया था। सरकार के सामने आंदोलनकारियों को मनाने की चुनौती क्षैतिज आरक्षण को असंवैधानिक ठहराए जाने से सरकार और राज्य आंदोलनकारियों को बड़ा झटका लगा है। सरकार की ओर से राज्य आंदोलन में आंदोलनकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र करते हुए उनके लिए क्षैतिज आरक्षण को सही ठहराया गया था। ठीक गैरसैंण सत्र से पहले यह फैसला सामने आने से सरकार के सामने अब मायूस आंदोलनकारियों को मनाने की चुनौती भी होगी। राज्य आंदोलनकारी भी इस मामले को अब सरकार के पाले में खिसका रहे हैं। राज्य आंदोलनकारी राजेंद्र बिष्ट का कहना है कि सरकार इस मामले को सदन में लेकर आए और इस पर कानून बनाए।

Leave A Comment