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लाकडाउन के दृष्टिगत उत्तराखंड के प्रवासी लोग काफी प्रभावित : सीएम त्रिवेंद्र

देहरादून | मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने  हिल-मेल द्वारा आयोजित ई-रैबार कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि लाकडाउन के दृष्टिगत उत्तराखंड के प्रवासी लोग काफी प्रभावित हुए हैं। प्रदेश के लोग देश के कोने-कोने में अच्छी नौकरी में है। सबसे ज्यादा प्रभावित होस्पीटेलिटी का क्षेत्र हुवा है। उस क्षेत्र में कई लोग ऐसे है जो होटलों में ही रहते हैं, होटलों द्वारा ही उनका खाना हो पाता है, राज्य सरकार उनको दो वक्त का खाना तो मुहैया करा रही है परन्तु वही काफी नही होता, उनमें डिप्रेशन बढ़ता जा रहा है, उन्हें घर आने की जल्दी हो रही है। अतः यह डर भी है कि कही कोई गलत कदम न उठाये। इसलिए हमने फैसला लिया है कि हम सबको सतर्कता के साथ एवं मेडिकल शर्तो को पूरा करते हुए उनके घर वापस लायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे राज्य में पर्याप्त क्षमता है। हरिद्वार शहर में प्रतिदिन हम काफी लोगों को ठीक तरह से मेडिकल चेक करके उनको घर तक पहुंचा सकते हैं। रहने की कोई दिक्कत नही है, हमारे पास कई धर्मशालाए है। बड़े-बड़े होटल है जिनको राज्य सरकार ने कोविड के तहत एक्वायर किया हुवा है। अगर कोई अपने खर्चे से भी रहना चाहता है तो उसके लिए भी हमने अलग से व्यवस्था की हुवी है। इसकी तरह हल्द्वानी एवं उधम सिंह नगर है जहां हमारे पास पर्याप्त व्यवस्थाये हैं। हम यह पूर्ण कोशिश कर रहे हैं कि जितने लोग भी हम लाएं उनका ठीक तरीके से मेडिकल चेक अप करने के पश्चात ही उनको उनके घरों तक भेजें।
उन्होंने कहा कि हमारे राज्य में आईसीयू एवं वैंटीलेटर की कमी थी परन्तु आज हमारे 11 जिलों में आईसीयू उपलब्ध हैं, वेंटिलेटर हो गए हैं और अगले सप्ताह तक जो हमारे दो जनपद रह गए हैं वहां वेंटिलेटर व आईसीयू भी उपलब्ध हो जाएंगे। कोविड-19 हेतु हमने अलग से अस्पताल चिन्हित किए हुए हैं। हम यह भी जानते हैं कि अभी लाखों प्रवासी लोगों ने उत्तराखंड आना है। उनमें से कई लोग इनफेक्टेड हो सकते हैं उनके लिए अभी से हम तैयारी कर रहे हैं। अभी तक हमारे राज्य में कहीं भी वेंटिलेटर व ऑक्सीजन की जरूरत नही पड़ी है, लेकिन हम यह कहना चाहते हैं कि अगर आवश्यकता पड़े तो हम पूरी व्यवस्था के साथ तैयार हैं। हमारे पास सारी व्यवस्थाएं हैं इसी वजह से हमने यह निर्णय लिया है कि हम अपने प्रवासी भाईयों एवं बहनो को वापस लायेंगे, क्योंकि हम अपने लोगों को सड़कों पर नहीं छोड़ सकते। हमने अपने ग्राम प्रधानों को विशेष अधिकार दिए है। गांव में अगर यदि कोई उनकी बात नहीं मानता है जिनको कोरेंटिन किया गया है तो आपदा प्रबंधन के तहत उसके विरुद्ध कार्यवाही की जा सकती है। गांव में अगर किसी के पास खाने की व्यवस्था नहीं है तो हमने प्रधान को यह अधिकार दिया है कि वह इसकी व्यवस्था करें जिसका खर्चा राज्य सरकार द्वारा वहन किया जायेगा। हमने सब का ख्याल रखा है। हम देवभूमि के लोग है हम यह चाहते हैं कि यहां कोई तकलीफ से ना रहे। राज्य सरकार से जो भी मदद होगी वह हम कर रहे हैं। ई-रैबार कार्यक्रम में भूतपूर्व सीएमडी (एयर इंडिया) अश्विनी लोहानी, एयर मार्शल एम एस बुटोला, गीतकार एवं सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी, पूर्व प्रमुख, एनटीआरओ एवं आलोक जोशी, निदेशक, एफटीआईआई भूपेंद्र कैंथोला, वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा एवं वरिष्ठ पत्रकार मनजीत सिंह नेगी उपस्थित थे।

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