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डिलीवरी बॉय से वेटर तक, फिर आज है कम्पनी के मालिक

 

अहमदाबाद | प्रफुल्‍ल बिल्‍लोर को लोग एमबीए चाय वाला के नाम से जानते हैं। उन्‍हें बहुत कम उम्र में सफलता हासिल की। उन्‍होंने अपनी सफलता की नींव छोटे-छोटे कदम बढ़ाकर रखी। इस सफर में उन्‍होंने बहुत कुछ सुनना भी पड़ा और सहना भी। लेकिन, वह बढ़ते गए। फिर 23 साल में चाय बेचकर करोड़पति बने। प्रफुल्‍ल बिल्‍लोर हमेशा से एमबीए करना चाहते थे। लेकिन, कई प्रयासों के बाद भी कैट निकाल पाने में सफल नहीं हुए। इसके लिए उन्‍होंने काफी मेहनत भी की। इस बात से वह काफी उदास भी हुए। इसके बाद उन्‍होंने अलग-अलग शहरो में कुछ नया खोजना शुरू किय। अहमदाबाद में मेक्डॉनल्ड में डिलीवरी बॉय की नौकरी शुरू की। यहां उन्हें करीब एक घंटे के 35 रुपये मिलते थे। कुछ दिन बाद उनका प्रमोशन होने पर वह वेटर बन गए। जॉब करते हुए प्रफुल्‍ल के दिमाग में एक बात आई। उन्‍होंने सोचा कि जब विदेशी कंपनियां हमारे देश बर्गर बेचकर इतना ज्यादा कमा सकती हैं तो क्यों न वह भी अपना खुद का कोई प्रोडक्ट चुनें जो पूरे देश को कनेक्ट करता हो। काफी दिमाग लगाने के बाद वह इस नतीजे पर पहुंचे कि सिर्फ चाय है जो हर जगह कॉमन है। नॉर्थ से साउथ और ईस्‍ट से वेस्‍ट हर कोई इसे पीता है। इसके बाद प्रफुल्‍ल अपना कैफे शुरू करना चाहते थे। लेकिन, इसके लिए पैसे नहीं थे। तो उन्‍होंने सोचा क्‍यों न छोटी शुरुआत ही की जाए। इसके बाद उन्‍होंने चाय का इस्टॉल लगाने का फैसला किया। इसके लिए भी उन्हें बर्तन, स्टॉल और दूसरी चीजों की जरूरत थी। उन्‍होंने झूठ बोलकर पिता से इसके लिए पैसे लिए। प्रफुल्‍ल सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक मैक्डॉनल्ड में काम करते थे। वापस आने के बाद शाम को 8 से 10 तक चाय बेचते थे। उनके चाय बेचने का तरीका दूसरों से अलग था। ग्राहकों से वह अंग्रेजी में बात करते थे। इसकी वजह से वह लोगों की नजरों में आने लगे। जब वह अपने चाय के खोपचे से अच्छे पैसे कमाने लगे तो उन्होंने नौकरी छोड़ दी। प्रफुल्‍ल ने इसके बाद अहमदाबाद में जगह तलाशना शुरू किया। उन्होंने हॉस्पिटल के सामने एक जगह किराये पर ली। इसके लिए उन्हें 9 हजार रुपये हर महीने देना पड़ता था। नये स्टॉल का नाम रखा एमबीए चाय वाला। इसका पूरा नाम था ‘मिस्‍टर बिल्‍लोर अहमदाबाद चाय वाला’। कारोबार बढ़ते हुए इतना बड़ा हो गया कि आज इसका टर्नओवर करोड़ो में है।

 

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