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पकौड़ों की ठेली से आइएएस तक का सफर….

 

देहरादून | राजस्थान के भरतपुर की रहने वाली दीपेश कुमारी की सफलता की कहानी सिर्फ एक IAS बनने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस पिता के संघर्ष, त्याग और विश्वास की कहानी है | जिसने 25 साल तक पकौड़े और नमकीन बेचकर अपने बच्चों के सपनों को जिंदा रखा |
दीपेश के पिता गोविंद कुमार रोज सुबह अपनी ठेली लेकर निकलते थे | धूप हो या बारिश, त्योहार हो या आम दिन, उन्होंने कभी काम से पीछे कदम नहीं हटाया. सात लोगों के परिवार के लिए कमाई करना आसान नहीं था. घर छोटा था, सुविधाएं सीमित थीं, लेकिन बच्चों के भविष्य के सपने बहुत बड़े थे | गोविंद कुमार मानते थे कि अगर उनके पास देने के लिए ज्यादा पैसा नहीं है, तो वे अपने बच्चों को पढ़ाई जरूर दे सकते हैं |

दीपेश का सपना था देश की सेवा करना | इसी सोच के साथ उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का फैसला लिया | यह फैसला आसान नहीं था | नौकरी छोड़ना, दिल्ली जाकर तैयारी करना और परिवार पर दोबारा बोझ बनना, यह सब उनके लिए भावनात्मक रूप से बहुत मुश्किल था | लेकिन पिता गोविंद कुमार ने बेटी को रोका नहीं |साल 2020 में दीपेश ने पहली बार UPSC परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली. यह झटका जरूर था, लेकिन टूटने का नहीं. उन्होंने खुद से सवाल किए, अपनी तैयारी को बेहतर किया और दोबारा जुट गईं | नौकरी से जो पैसे बचाए थे, उसी से दिल्ली में रहकर पढ़ाई की | साल 2021 दीपेश के जीवन का सबसे बड़ा साल बन गया. दूसरी कोशिश में उन्होंने UPSC परीक्षा पास कर ली और ऑल इंडिया 93वीं रैंक हासिल की |

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