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मिस उत्तराखंड 2025 फर्स्ट रनरअप रही वैष्णवी लोहनी को साईं सृजन का सम्मान

डोईवाला | उत्तराखंड की बेटियों ने हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है और इस बार एक और चमकते सितारे के रूप में वैष्णवी लोहनी ने अपना स्थान बनाया है। देहरादून में सिनमिट कम्युनिकेशंस द्वारा आयोजित ‘मिस उत्तराखंड-2025’ के ग्रैंड फिनाले में वैष्णवी ने द्वितीय स्थान (फर्स्ट रनरअप) प्राप्त कर न केवल उत्तराखंड का नाम रोशन किया, बल्कि अपनी सुंदरता, आत्मविश्वास, और परिश्रम से एक मिसाल भी पेश की। इसके साथ ही उन्होंने ‘मिस फोटो जेनिक’ और ‘मिस अल्मोड़ा’ का खिताब भी जीते, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रतीक है। उनकी इस सफलता के बाद साईं सृजन पटल कार्यालय ने उनका भव्य स्वागत किया, जहां उन्हें प्रो. के.एल. तलवाड़ ने सम्मान चिन्ह भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

परिवार का योगदान….

ष्णवी की सफलता में उनके परिवार का भी अहम योगदान रहा है। इस खास मौके पर उनकी माता अर्चना लोहनी, साक्षी डोभाल, नीलम तलवाड़, सांभवी लोहनी और अक्षत तलवाड़ भी मौजूद रहे और वैष्णवी को अपनी शुभकामनाएं दीं। यह एक ऐसे परिवार का उदाहरण है जो अपने बच्चों के सपनों को पूरा करने में निरंतर उन्हें सहयोग और प्रेरणा प्रदान करता है।

साईं सृजन पटल की भूमिका…

साईं सृजन पटल हमेशा से समाज के हर क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्यरत रहा है। यह संस्था युवा पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करती रही है, जिसमें कला, साहित्य, और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख हैं। प्रो. के.एल. तलवाड़ की दिशा में साईं सृजन पटल ने हमेशा युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया है और उन्हें समाज में अपनी पहचान बनाने का अवसर प्रदान किया है।

नवीनतम सफलता और भविष्य की उम्मीदें….

वैष्णवी की इस उपलब्धि ने यह सिद्ध कर दिया है कि उत्तराखंड की युवा पीढ़ी में अपार संभावनाएँ हैं। वैष्णवी की सफलता के साथ-साथ हम उम्मीद कर सकते हैं कि भविष्य में राज्य की और बेटियाँ अपने हुनर और कड़ी मेहनत के दम पर ऐसे ही कई उपलब्धियाँ हासिल करेंगी।वैष्णवी लोहनी की सफलता न केवल उनकी मेहनत और लगन का परिणाम है, बल्कि यह उनके परिवार और समाज के लिए एक प्रेरणा भी है। ऐसे ही प्रेरणादायक व्यक्तित्वों को सम्मानित करके साईं सृजन पटल समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।वैष्णवी लोहनी की सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब तक हमें अपने सपनों के लिए सही दिशा और प्रेरणा मिलती है, तब तक कोई भी लक्ष्य प्राप्त करना संभव होता है। उत्तराखंड की बेटियाँ न केवल राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का कार्य कर रही हैं, बल्कि वे राज्य को गौरवान्वित करने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।

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