डॉ. वीरेन्द्र सिंह रावत को मिला “नेशनल एजुकेशन आइकन अवार्ड-2026”
Posted by Pehchanexpress Admin on Saturday, September 5, 2026 · Leave a Comment

27 वर्षों से खेल, युवा विकास और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए नई दिल्ली में किया गया सम्मानित
नई दिल्ली/ देहरादून । अध्यापक दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के प्रसिद्ध खेल विशेषज्ञ, पूर्व नेशनल फुटबॉल खिलाड़ी, रेफरी, इंटरनेशनल कोच, राज्य आंदोलनकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. वीरेन्द्र सिंह रावत को खेल एवं युवा विकास के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए प्रतिष्ठित “नेशनल एजुकेशन आइकन अवार्ड-2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान नेशनल एजुकेशन एंड ह्यूमैनिटी फाउंडेशन की ओर से नई दिल्ली में प्रदान किया गया। सम्मान समारोह में यह पुरस्कार महान दार्शनिक, शिक्षाविद एवं भारत के पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की स्मृति एवं आदर्शों को समर्पित करते हुए अध्यापक दिवस के अवसर पर प्रदान किया गया।
डॉ. वीरेन्द्र सिंह रावत ने अपने जीवन के लगभग 27 वर्ष खेलों के उचित विकास, खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों एवं रेफरियों के भविष्य को संवारने तथा युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए समर्पित किए हैं। वह आज भी 57 वर्ष की उम्र में युवा पीढ़ी, विशेषकर जेन-जी युवाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रहे हैं और उन्हें खेल, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
खेल विकास के लिए बेबाक आवाज
डॉ. रावत उत्तराखंड और भारत में खेलों के उचित विकास को लेकर लगातार अपनी बेबाक राय रखते रहे हैं। वह मीडिया के माध्यम से खेलों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर, उचित मार्गदर्शन एवं सम्मान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उनका मानना है कि खेल केवल मैदान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खेल युवाओं के व्यक्तित्व, अनुशासन, स्वास्थ्य और भविष्य के निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
युवाओं को नशे और गलत संगत से दूर रहने का संदेश
डॉ. रावत लंबे समय से युवाओं को नशे, गलत संगत और अस्वस्थ जीवनशैली से दूर रहने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका विशेष संदेश है कि युवा नशे और फास्ट फूड से दूर रहें, मोबाइल फोन का अनावश्यक उपयोग कम करें और तकनीक का उपयोग केवल ज्ञान एवं सकारात्मक कार्यों के लिए करें।
वह युवाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने, खेलों से जुड़ने, समाज सेवा करने, अच्छे संस्कार अपनाने और जीवन में सकारात्मक सोच रखने के लिए प्रेरित करते हैं।
उनका कहना है कि यदि हम अपने आसपास रहने वाले किसी व्यक्ति को गलत दिशा में जाते देखते हैं तो उसे रोकना और सही मार्ग दिखाना भी हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है। अच्छी शिक्षा, अच्छे संस्कार, सकारात्मक सोच और जिम्मेदार नागरिकता ही मजबूत राष्ट्र की नींव हैं।
27 वर्षों में हजारों खिलाड़ियों, कोचों और रेफरियों को दिशा देने का प्रयास
डॉ. वीरेन्द्र सिंह रावत ने विगत 27 वर्षों में खेलों के विकास के लिए निरंतर कार्य किया है। उन्होंने खिलाड़ियों के साथ-साथ कोचों और रेफरियों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। उनके अनुसार, उनका उद्देश्य केवल स्वयं आगे बढ़ना नहीं, बल्कि अधिक से अधिक युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर देना है। खेलों के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक दिशा देकर उन्हें देश और समाज के लिए उपयोगी नागरिक बनाने का प्रयास उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। डॉ. रावत को अब तक 100 से अधिक राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। ये सम्मान खेल, युवा जागरूकता, सामाजिक सेवा और खेलों के विकास के क्षेत्र में उनके योगदान को दर्शाते हैं।
“यह सम्मान आने वाली युवा पीढ़ी को समर्पित”
नेशनल एजुकेशन आइकन अवार्ड-2026 प्राप्त करने के बाद डॉ. वीरेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि वह इस सम्मान को देश की आने वाली युवा पीढ़ी को समर्पित करते हैं।
उन्होंने कहा कि पुरस्कार और सम्मान किसी भी व्यक्ति को और अधिक जिम्मेदारी के साथ काम करने की प्रेरणा देते हैं। उनका प्रयास रहेगा कि आने वाले समय में भी युवाओं को खेल, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार और सामाजिक सेवा के माध्यम से सकारात्मक दिशा मिलती रहे। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में मेहनत, अनुशासन, सकारात्मक सोच और अच्छे संस्कारों को अपनाएं तथा देश निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।
“मेरा सबसे बड़ा सम्मान युवाओं का सही दिशा में आगे बढ़ना है” डॉ. रावत का कहना है कि उनके लिए किसी भी पुरस्कार से बड़ी उपलब्धि यह है कि उनके प्रयासों से कोई युवा गलत रास्ते से बचकर खेल, शिक्षा और समाज सेवा की ओर आगे बढ़े। “यदि एक युवा भी नशे और गलत संगत से बचकर अपने जीवन में सफलता की ओर बढ़ता है, तो मेरे लिए यही सबसे बड़ा सम्मान है।” उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य आज के युवाओं के हाथों में है और यदि युवा स्वस्थ, शिक्षित, अनुशासित, संस्कारी और सकारात्मक रहेंगे तो भारत को दुनिया का मजबूत और विकसित राष्ट्र बनाने में कोई बाधा नहीं होगी। अध्यापक दिवस के अवसर पर डॉ. वीरेन्द्र सिंह रावत ने देशभर के समस्त शिक्षकों, शिक्षाविदों, खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, रेफरियों एवं युवा साथियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल शिक्षा नहीं देते, बल्कि वे समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करते हैं। इसलिए प्रत्येक युवा को अपने शिक्षकों का सम्मान करते हुए उनके बताए सकारात्मक मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।