भा रही है लोगो को कैदियों द्वारा तैयार किये गये उत्पाद
देहरादून। प्रदर्शनी में देहरादून व हरिद्वार कारागार के स्टाॅल भी लगाये गये हैं जिसमें कैदियों द्वारा तैयार किये गये उत्पाद रखे गये हैं जिसमें दरी, कम्प्यूटर टेबल, कालीन, कार्पेट, फर्नीचर का सामान व गौरेया के लिए लकड़ी का घर आदि इन कैदियों द्वारा तैयार किया गया है। उत्तराखण्ड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद एवं विकास आयुक्त (हथकरघा) भारत सरकार द्वारा आयोजित नेशनल हैण्डलूम एक्सपो में छठे दिन देहरादून वासियों का रूझान जयपुरी रजाईयों पर ज्यादा देखने को मिला। यह प्रदर्शनी 13 जनवरी तक चलेगी। राष्ट्रीय हैण्डलूम प्रदर्शनी में परेड ग्राउड में 110 हथकरघा के स्टाॅल लगाये गये हैं जिनमें से…
अपने सपने संस्था ने ठंड में फुटपाथ पर सो रहे जरुरतमंदो को उढ़ाये कम्बल
देहरादून। अपने सपने के वोलेंटियर्स ने देहरादून के अलग-अलग स्थानों पर सडक फुटपाथ पर सोये लोगों को कम्बल दे कर अपना नववर्ष मनाया। संस्था ने अपने क्लेमेंट टाउन स्थित कार्यलय से घंटाघर और फिर चकराता रोड़ से बल्लूपुर चैक तक 31 दिसम्बर की मध्य रात यह अभियान जारी रखा। गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी संस्था के वोलेंटियर्स ने अपना नववर्ष इसी अंदाज में मनाया था। यह कम्बल संस्था ने देहरादून के आम नागरिको से एकत्रित किये थे। इस अभियान को करने का उद्देश्य यही था की सभी लोगों को जीने का हक है एवं इस ठिठुरती सर्दी में एक भी व्यक्ति की ठंड से…
पुलिसवाला गरीब परिवार की बेटियों की पढ़ाई और उनके शादी का उठाते है खर्च
सिपाही जितेंद्र लावारिस वृद्ध का अंतिम संस्कार भी करते है झांसी | आदिवासियों की झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली मनीषा और सोनाली यह कभी नहीं सोच सकती थी की उनकी पढ़ाई और शादी हो पाएगी या नहीं लेकिन उनके सपनो को अपना सपना बनाने वाले कोई और नहीं बल्कि एक पुलिसवाला है झांसी जिले के आईटीआई के पास बेहद गरीब परिवार की बेटियां हैं। 22 दिसंबर को इनकी शादी होनी थी लेकिन किसी ने मदद नहीं की। ऐसे में एक कांस्टेबल ने 2 बहनों को कन्यादान किया। इस मौके पर दोनों बहने भावुक हो गई और कहा कि कांस्टेबल अंकल…
अपने सपने संस्था ने ” लेफ्ट टू लेफ्ट” का पालन करने का दिया संदेश
आर्ट प्रतियोगिता में पी टी उषा ग्रुप से अवन्तिका प्रथम,कल्पना चावला ग्रुप से दुर्गा द्वितीय, गौरा देवी ग्रुप से चाँदनी तृतीय स्थान प्राप्त किये देहरादून | अपने सपने संस्था द्वारा सुभाषनगर स्थित अपने प्रांगण में आज दिनांक 28/12/2017 को यातायात नियम का पालन के रूप में ” लेफ्ट टू लेफ्ट ” रूपी आर्ट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया | आयोजित प्रतियोगिता में संस्था के तीन समूहों के बच्चों ने प्रतिभाग किया | जिसमे कल्पना चावला ग्रुप, पी टी उषा ग्रुप, गौरा देवी ग्रुप ने यातायात का पालन रूपी विषय पर अपनी सोच को कला के माध्यम से प्रदर्शित किये |…
दिल तो, बच्चा है जी…….
देहरादून | पर्ल्स चैरिटेबल सोसाईटी द्वारा विगत कई वर्षो की भांति आज दिनांक 25 दिसम्बर को भी एक कार्यक्रम, ‘दिल तो, बच्चा है जी’ आयोजित किया गया। जिसमें, विभिन्न आयु वर्ग के करीब 2000 बच्चों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया। जो कि हरित यमुना मिशन फाउंडेशन और ब्लड फ्रेंड द्वारा प्रायोजित किया गया। आसरा फाउंडेशन, अपने सपने, अपना घर, नियो विजन फाउंडेशन , प्रतिष्ठा फॉउंडेशन, नन्हीं दुनिया, संकल्प फॉउंडेशन सहित अन्य भी बच्चों संग बच्चे बन नाचते गाते, खेलते कूदते और उन्हें हर प्रकार की ख़ुशी देने में लगे रहे। सेंटा क्लॉज की पोशाक पहन छोटे बड़े…
जज्बा हो तो सब मुमकिन है, जानिये खबर
दादाबाड़ी | अब वह समय नहीं रहा जब महिलाएं घर की दहलीज तक सीमित थी वर्तमान समय में अब घर से बाहर निकलकर महिलाये जाॅब और बिजनेस तक कर रही है। अब महिलाओं का जज्बा इतना है कि वो अपने हौसलों और हिम्मत से घर-परिवार और महिलाओं की संबल बनी हुई हैं। ऐसी महिलाओं ने अपने जीवन में चुनौतियां स्वीकारी और स्वयं के अलावा अपने समूहों से जुड़ी महिलाओं को भी आर्थिक मजबूती प्रदान कर मुकाम हासिल किया। महिला अधिकारिता विभाग की ओर से गवर्नमेंट म्यूजियम के पास ग्रामीण हाट में लगाई एग्जीबिशन में ऐसी ही महिलाओं की कामयाबी देखने…
मां नहीं बन सकी पर 51 बेसहारा बच्चों की है माँ
मुजफ्फरनगर | जीना इसी का नाम है हर पल किसी शब्द को लेकर अचम्भित रहने वाले एक दंपती की कहानी कुछ ऐसी है जी हां ऐसा ही कुछ हुआ मुजफ्फरनगर के एक दंपती के साथ। शामली के कुदाना गांव की मीना राणा की शादी 1981 में बाघपत के वीरेंद्र राणा से हुई थी। शादी के 10 साल बाद भी उनको कोई संतान नहीं हुई। बाद में पता चला कि मीणा कभी मां नहीं बन सकतीं। किसान पति-पत्नी को जब कोई संतान नहीं हुई तो उन्होंने 1990 में एक दिव्यांग बच्चे को गोद लेने का फैसला किया। लगभग तीन दशक के…
गरीबो और जरुरतमंदो की “चंद्रकला” है यह आईएएस, जानिए खबर
लोकप्रियता का एक हकीकत यह भी है कि वह सोशल मीडिया एक एक हस्तियों को पीछे छोड़ती जा रही है | जी हां अपनी दबंग छवि, दुस्साहस की हद तक भ्रष्टाचार की मुखालफत करने वाली आईएएस बी चंद्रकला अपने कुछ ही वर्षों के प्रशासनिक सफर में किंवदंति सी बन चुकी हैं। उनके कठिन जीवन संघर्षों का कथानक जितना जटिल रहा है, सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान और उसके बाद की यात्रा उससे कुछ कम मुश्किलों भरी नहीं रही है। हमारे समाज में एक कामयाब स्त्री को लेकर जितनी तरह की दुश्वारियां जूझनी पड़ती हैं, बी चंद्रकला उनसे कत्तई…
शिक्षकों ने अपनी सैलरी से बदला पूरे विद्यालय का सूरत
गोरखपुर | जी हां एक विद्यालय में शिक्षकों ने अपनी सैलरी से पूरे विद्यालय को बदल दिया है। स्कूल में प्रोजेक्टर और वाई-फाई की व्यवस्था कर स्मार्ट क्लास बनाई गई हैं। हेडमास्टर आशुतोष कुमार सिंह ने बताया कि इन सब कामों में सब मिलाकर डेढ़ लाख रुपये खर्च हुए हैं। सभी शिक्षकों ने अपनी सैलरी से इस काम में योगदान दिया है। युवा शिक्षकों की इस लगन को देखकर उनके दोस्तों ने भी इस काम में योगदान दिया। गोरखपुर के पिपरौली ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कॉन्वेंट स्कूलों को टक्कर दे रहा है। आईजी मोहित अग्रवाल की पहल ने प्राथमिक…
गरीब महिलाओं को छात्रों ने दिया ‘अधिकार’
नई दिल्ली | पूर्वी दिल्ली की कुछ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में दिल्ली स्कूल ऑफ आर्ट्स ऐंड कॉमर्स के 11 छात्रों ने मदद की। इन स्टू़डेंट्स ने ‘अधिकार’ नाम का एक प्रॉजेक्ट तैयार किया जिसके तहत महिलाओं को शिष्टाचार, आत्मरक्षा के गुर और ड्राइविंग करना सिखाया गया। इसके अलावा इन छात्रों ने महिलाओं को ट्रैफिक के नियमों के बारे में जानकारी दी और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में भी मदद की। इन स्टूडेंट्स ने गरीब महिलाओं को माइक्रो-फाइनैंस के जरिए ई-रिक्शा खरीदने में भी मदद की। रोजगार के इस साधन से ये महिलाएं औसतन 30,000 रुपये महीने की…






























