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उत्तराखंड : शुरू हुई सीमान्त गांवों के स्कूलों में स्मार्ट क्लासेस

CM-UK

देहरादून | उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत शिक्षा क्रान्ति के पथ पर आगे बढ़ते हुए घेस और हिमनी के स्कूलों में के-यान पोर्टेबल मल्टीफंक्शनल(बहुउद्देशीय) डिवाईस भेजी है। यह डिवाईस इन्टरनेट से कनेक्ट होकर वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा प्रदान करती है। इसके माध्यम से बाहरी केन्द्रों से शिक्षक घेस और हिमनी के बच्चों को पढ़ा सकते है। इस डिवाईस में एनसीईआरटी द्वारा पहले से तैयार की हुई रिकाॅर्डेड शिक्षण सामग्री भी मौजूद है, जिसे कक्षाओं के समय या कक्षाओं के बाद आवश्यकतानुसार बच्चों को दिखाया जा सकता है। अवकाश के दिनों में इस डिवाईस और इन्टरनेट के माध्यम से बच्चों को ज्ञानवर्धक मनोरंजन भी प्रदान किया जायेगा। के-यान डिवाईस क्लास रूम की दीवार को ही प्रोजेक्टर स्क्रीन के रूप मेें तब्दील कर देती है। इस डिवाईस के माध्यम से दो अलग-अलग गांवों के बच्चे आपस में वीडियो चैट कर सकते हैं। विदेशों से कोई डाॅक्टर, शिक्षक या अप्रवासी उत्तराखण्डी अपने गांव को, अपने स्कूल को सम्बोधित कर सकते हैं, उनके उन्नयन में अपना योगदान दे सकते है।

तीन महीने के भीतर सीमान्त गांव में बिजली आपूर्ति

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बच्चों से उनके गांव की समस्याओं के बारे में पूछा। एक बच्चे ने बताया कि बिजली न होने के कारण वे घर पर अपना होम वर्क नही कर पाते हैं। जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन महीने के भीतर इस सीमान्त गांव में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जायेगी। मुख्यमंत्री ने इसके लिये ऊर्जा विभााग को निर्देश भी दिये। उल्लेखनीय है कि 2013 की आपदा में इस गांव में विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई थी। बच्चों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने उनसे इन्टरनेट की खुबियों और इसके सकारात्मक उपयोग पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि वे इसकी सहायता से अपने गांव में किसानों की मदद कर सकते है। मुख्यमंत्री के प्रयासों से घेस गांव को मटर की उन्नत खेती के लिये जाना जाने लगा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस गांव में शहद उत्पादन की भी प्रचुर सम्भावनाएं है और शीघ्र ही सरकार द्वारा यहां शहद उत्पादन और विपणन के लिये विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध करायी जायेगी।

ई-मेडिसन और ई-पशु सेवा भी प्रारम्भ
घेस गांव जिसके बारे में कहा जाता है कि घेस के आगे नही देश। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की पहल पर यहां इन्टरनेट कनेक्शन पहुंच गया है। एक सप्ताह पूर्व मुख्यमंत्री ने आईटी विभाग की समीक्षा बैठक में घेस गांव को आईटी इनेबल्ड(सक्षम) गांव बनाने के निर्देश दिये थे। जिसके क्रम में गांव में इन्टरनेट पहुंचाया गया। इन्टरनेट पहुंचने के साथ ही गांव में काॅमन सर्विस सेन्टर भी खुल गया है। इन्टरनेट माध्यम से ग्रामीण विभिन्न क्षेत्रों में सूचना प्रोद्यौगिकी की मदद से अपना जीवन स्तर सुधार सकते है। वीडियों कांफ्रेंसिंग में काॅमन सर्विस सेन्टर के संचालक द्वारा बताया गया कि चार ग्रामीणों ने ई-मेडिसन सेवा के तहत सीधे दिल्ली के अपोलो अस्पताल के डाॅक्टरों से बात कर चिकित्सकीय परामर्श लिया है। इसी प्रकार कुछ पशुपालकों ने ई-पशु सेवा का लाभ उठाते हुए विशेषज्ञों का परामर्श लिया है। काॅमन सर्विस सेन्टर के लिये लैपटाॅप और प्रिन्टर सरकार द्वारा उपलब्ध कराया गया है। यहां से ग्रामीणों को आवश्यक प्रमाण-पत्र, टिकट बुकिंग आदि सुविधा भी प्राप्त होगी।  इस अवसर पर आईटीडीए के निदेशक अमित सिन्हा तथा मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट भी उपस्थित थे।

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