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गरीबी की संघर्ष से इंटरनेशनल स्टार तक

ekta-bisht

देहरादून | आईसीसी की महिला टी-20 और वनडे टीम में जगह बनाने वाली अल्मोड़ा की एकता बिष्ट इकलौती भारतीय बन गईं। गांव से गलियों तक का सफर खेल के रूप में पूरा कर इंटरनेशनल क्रिकेटर बनीं एकता के पिता चाय की दुकान चलाते हैं। इस मौके पर एकता के भाई विनीत सिंह बिष्ट ने एक अखबार के साथ अपनी बहन की पर्सनल लाइफ से जुड़ी बातें शेयर की। मूलतः उत्तराखंड के अल्मोड़ा की रहने वाली एकता सिंह बिष्ट उनके पिता कुंदन सिंह बिष्ट 1988 में आर्मी से हवलदार पद से रिटायर हुए थे रिटायर्मेंट के बाद घर खर्च चलाने के लिए चाय की दुकान खोली थी। उम्रदराज होने के बाद उन्होंने लगभग पांच साल पहले उसे बंद कर दिया। “यह साल 2000 की बात है। उसी मैदान पर एक टूर्नामेंट हो रहा था। एकता भी अपने गांव की टीम से खेल रही थी। उसके बेहतरीन ऑलराउंड परफॉर्मेंस से हमारे गांव की टीम विनर बनी। यह बात जब अल्मोड़ा स्टेडियम के पूर्व कोच लियाकत अली खान को पता चली, उन्होंने इसे स्टेडियम बुला लिया। लियाकत उसका गेम देखकर काफी प्रभावित हुए थे। उन्होंने उसे प्रॉपर ट्रेनिंग देना शुरू किया। वो मीडियम फास्ट बॉलिंग करती थी, लेकिन उन्होंने उसे स्पिन फेंकने की सलाह दी। यहीं से उसका करियर चल पड़ा।”

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