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चीन को अमरीका से झगड़ा महंगा पड़ सकता है जानिए खबर…

चीन की आर्थिक तरक्क़ी का एक बड़ा पहलू अमरीका को उसके निर्यात से होने वाली कमाई है. ये ट्रेड सरप्लस (व्यापार अधिशेष) चीन के पक्ष में है. यानी चीन अमरीका से जितना सामान ख़रीदता है उससे कहीं अधिक सामान वो अमरीका को बेचता है. अमरीका और चीन के बीच व्यापार युद्ध (ट्रेड वार) का दायरा इसी तरह बढ़ता गया तो मुमकिन है कि ड्रैगन कहे जाने वाले इस देश को बड़ा नुक़सान उठाना पड़ सकता है. ये रकम तीन लाख 47 हज़ार अमरीकी डॉलर के क़रीब है और दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अगर संरक्षणवादी कदम उठाती रहीं तो इसका सीधा असर चीन पर पड़ेगा. इसी वजह से कुछ विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इस व्यापार युद्ध में अमरीका के बनिस्बत चीन के पास खोने के लिए ज़्यादा है. सोमवार को चीन ने पोर्क और वाइन जैसे 128 से ज़्यादा अमरीकी उत्पादों के आयात पर शुल्क बढ़ाने की घोषणा की. अब इन उत्पादों पर 15 से 25 फ़ीसदी शुल्क देना होगा. बीजिंग से जारी एक बयान में कहा गया कि यह क़दम चीन ने अमरीका के बढ़ाए गए आयात शुल्क से हुए नुक़सान को देखते हुए लिया है. वहीं अमरीका ने इस वैश्विक बाज़ार को बिगाड़ने वाला क़दम बताया. ट्रेड वार की आशंका के चलते वॉल स्ट्रीट भी अछूता नहीं रहा और डाउ जोन्स इंडेक्स 2.7 फ़ीसदी नीचे आ गया. चीन का कहना है कि ये नए आयात शुल्क अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा एल्यूमीनियम और स्टील के आयात पर बढ़ाए गए शुल्क की जवाबी कार्रवाई है. 22 मार्च को अमरीका ने कहा था कि वो चीन पर 60 करोड़ डॉलर का आयात शुल्क लगाने की योजना बना रहा है. बौद्धिक संपदा चोरी करने का आरोप लगाते हुए अमरीका ने देश मे चीन के निवेश को भी सीमित करने की बात कही थी. दरअसल, अमरीका से जितना सामान चीन खरीदता है, उससे कहीं ज़्यादा चीज़ें वो उसे बेचता है. व्हाइट हाउस इस सप्ताह उन चीनी उत्पादों की सूची जारी कर देगा जो नए आयात शुल्क के तहत आएंगे. अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के अनुसार, उत्पाद शुल्क बढ़ाना, चीन के बौद्धिक संपदा चोरी करने के बदले की गई प्रतिक्रिया है.

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