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त्रिवेन्द्र सरकार ने लिए कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले , जानिए ख़बर

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देहरादून | मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट में प्राधिकरणों को सशक्त बनाते हुए आवास निर्माण की दिशा में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों के निदान तथा संतुलित नियोजित विकास को ध्यान में रखते हुए राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के दृष्टिगत जनहित में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिये हैं। उत्तराखण्ड भवन निर्माण एवं विकास विनियम 2011 को संसोधित करते हुए देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, अल्मोड़ा व चम्पावत जनपदों के मैदानी व पर्वतीय क्षेत्रों के मध्य के क्षेत्र के नैसर्गिक सौन्दर्य को यथावत एवं अनियंत्रित निर्माण को नियंत्रित करने हेतु फुटहिल क्षेत्रों का निर्धारण सम्बन्धित प्राधिकरण के बोर्ड द्वारा किया जायेगा। फुटहिल के क्षेत्रों में मार्ग की चौड़ाई के अनुसार भवन की ऊचाई अधिकतम 21 मीटर के प्राविधान के साथ मैदानी क्षेत्रों में निर्धारित पहुंच मार्ग की चैड़ाई 25 प्रतिशत कम करने का प्राविधान किया गया है। शेष प्राविधान मैदानी क्षेत्रों के अनुमन्य रहेंगे। आज कैबिनेट में राज्य में पर्यटन, स्वास्थ्य चिकित्सा, आवास आदि क्षेत्रों के प्रोत्साहन हेतु आवश्यक संसोधन का निर्णय लिया गया है। इससे शैक्षिक संस्थानों की स्थापना, स्वास्थ्य के क्षेत्र में लैब व नर्सिंग होम, अस्पतालों की स्थापना, होटल को प्रथम बार उनके स्टार रेटिंग के अनुरूप, उपविधि में व्यवस्था करने व ईको रिजाॅर्ट के मानकों को आसान करने, आवास क्षेत्र में प्रोत्साहन हेतु मार्ग की चौड़ाई तथा भूखण्ड के क्षेत्रफल के अनुसार ऊंचाई अनुमन्य करना, माल/मल्टीपलेक्स एवं सर्विस अर्पाटमेन्ट की स्थापना को आसान करने तथा उत्तराखण्ड के स्थानीय वास्तुकला को बढ़ावा देने के लिये भवनों के थ्ंप्रंकम बनाये जाने की एक अतिरिक्त तल की अनुमन्यता की व्यवस्था की गई है। मिश्रित भू-उपयोग को प्रोत्साहित करने एवं पार्किंग प्राविधानों को युक्ति संगत रखते हुए उपविधियों में उक्त संशोधनों से राज्य में जहां एक ओर पर्वतीय क्षेत्रों में निवेशकों को प्रोत्साहन मिलेगा वहीं आम जन-मानस को भी सुविधा होंगी। राज्य सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष रूप से सर्विस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिये कटिबद्ध है तथा इसी के तहत शिथिलता प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र की कैबिनेट ने एकल आवासीय, छोटे दुकानदारों व्यवसायियों, क्लीनिक पैथोलाॅजी लैब एवं नर्सिंग होम व नर्सरी स्कूल आदि निर्माणों को शमन करने का एक अवसर प्रदान करने का निर्णय लेते हुए एक मुश्त समाधान योजना लागू करने का निर्णय लिया गया है। इससे जहां दुकानदारों को शमन हेतु न्यूनतम 125 वर्ग मीटर भूखण्ड की आवश्यकता थी जिसे 15 वर्ग मीटर करने का निर्णय लिया गया है। वहीं क्लीनिक अब 50 वर्ग मीटर में एवं लैब 100 वर्ग मीटर में एवं नर्सिंग होम 150 वर्ग मीटर में शमन हो सकेंगे। नर्सरी स्कूल अब 300 वर्ग मीटर के भूखण्ड पर शमनित होंगेे। एकल आवासीय घरो को भी इस योजना का लाभ प्राप्त होगा। यह योजना 31 मार्च 2019 तक लागू रहेगी। मिश्रित भू-उपयोग को प्रोत्साहित करने एवं पार्किंग प्राविधानों को युक्ति संगत रखते हुए इस योजना में से प्राप्त धनराशि में से 75 प्रतिशत धनराशि का उपयोग प्राधिकरणों द्वारा पार्किंग, हरित क्षेत्र, एवं स्ट्रीट लाईट हेतु किया जायेगा। शहरों में सुनियोजित विकास हो सके और अनियमित एवं अनियंत्रित निर्माणकर्ताओं पर अंकुश लगाये जा सके इस हेतु एक मुश्त समाधान योजना की अवधि की समाप्ति उपरान्त 01 अप्रेल 2019 से शमन शुल्क में बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया है।

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