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धरती के इतिहास में वैज्ञानिकों ने खोजा ‘मेघालय युग’ जानिये खबर

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अभी हम होलोसीन युग में हैं, इसके कालखंड को बांटकर उससे मेघालय युग अलग किया जा सकता है ‘मेघालय युग’ 4200 साल पहले से लेकर 1950 तक होगा लंदन. भू-वैज्ञानिकों ने धरती के इतिहास में एक नए काल की खोज की है। उन्होंने 4200 साल पहले शुरू हुए धरती के इतिहास को ‘मेघालय युग’ नाम दिया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस दौरान दुनिया में अचानक भीषण सूखा पड़ा था और तापमान में गिरावट आई थी। इससे कई सभ्यताएं खत्म हो गईं थीं। माना जाता है कि धरती का निर्माण 4.6 अरब साल पहले हुआ। इस समय को कई हिस्सों में बांटा गया है। हर हिस्सा अहम घटनाओं जैसे महाद्वीपों का टूटना, पर्यावरण में अचानक आया बदलाव या धरती पर खास तरह के जानवरों और पौधों की उत्पत्ति पर आधारित है। अभी हम जिस काल में रह रहे हैं उसे होलोसीन युग कहा जाता है। यह 11 हजार 700 साल पहले शुरू हुआ था। तब मौसम में अचानक पैदा हुई गर्मी से हम हिम युग से बाहर आए थे। वैज्ञानिकों का मानना है कि होलोसीन युग को भी अलग-अलग भागों में बांटा जा सकता है। इनमें सबसे युवा ‘मेघालय युग’ 4200 साल पहले से लेकर 1950 तक होगा। खेती आधारित सभ्यताओं पर हुआ था ज्यादा असर : मेघालय युग की शुरुआत भयंकर सूखे के साथ हुई, जिसका असर 200 साल तक रहा। इसने मिस्र, यूनान, सीरिया, फिलस्तीन, मेसोपोटामिया, सिंघु घाटी और यांग्त्से नदी घाटी में खेती आधारित सभ्यताओं पर गंभीर रूप से असर डाला। मेघालय में खोज की वजह से पड़ा यह नाम : शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने मेघालय की एक गुफा की छत से टपक कर फर्श पर जमा हुए चूने को इकट्ठा किया। इसने धरती के इतिहास में घटी सबसे छोटी जलवायु घटना को परिभाषित करने में मदद की। लिहाजा, इसे ‘मेघालयन एज’ या ‘मेघालय युग’ नाम दिया गया।

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