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नशे का अड्डा बनता जा रहा उत्तराखंड, स्थिति गम्भीर: मुख्य न्यायाधीश

देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन ने कहा कि उत्तराखंड नशे का अड्डा बनता जा रहा है। 18 से 32 वर्ष के युवा किसी न किसी रूप में नशे की गिरफ्त में हैं। वहीं, 70 फीसद कमजोर तबके के लोग नशे का सेवन कर रहे हैं। ऐसे ही चलता रहा तो आने वाले दिनों में स्थिति बेहद गंभीर होगी। तमाम लोग नशा छोडने चाहते हैं, ऐसे लोगों के लिए राज्य सरकार प्रत्येक जिले में पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के साथ नशे के कारोबार में संलिप्त लोगों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए।  जस्टिस रंगनाथन ने यह बात शनिवार को कौलागढ़ रोड स्थित ओएनजीसी के एएमएन घोष सभागार में संकल्प नशा मुक्त देवभूमि अभियान की शुरुआत करते हुई कही। मुख्य न्यायाधीश ने उत्तराखंड में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि इस पर न्यायपालिका, सरकार और समाज को साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में 40 प्रतिशत लोग शराब का सेवन करते हैं, जबकि उत्तराखंड में 18.8 प्रतिशत लोग शराब का सेवन करते हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि नैनीताल, अल्मोड़ा, ऊधमसिंहनगर व देहरादून में स्थिति काफी गंभीर है। जस्टिस सुधांशु धूलिया ने नालसा की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि नशा दुनिया में पेट्रोलियम और हथियार के बाद तीसरा सबसे बड़ा कारोबार बन गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। इसलिए न्यायपालिका ने संकल्प नशा मुक्त देवभूमि अभियान की शुरुआत की है। कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश ने संकल्प नशा मुक्त देवभूमि पुस्तिका का विमोचन किया। जस्टिस लोकपाल सिंह, मुख्य सचिव उत्पल कुमार, डीजीपी अनिल के रतूड़ी, जस्टिस (रिटायर्ड) यूसी ध्यानी, प्रमुख सचिव नितेश झा, पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था अशोक कुमार, एसएसपी देहरादून अरुण मोहन जोशी व अन्य मौजूद रहे।राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. जीके शर्मा ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैरालीगल वालंटियर्स और टास्क फोर्स की ओर से अक्सर पुलिस को नशे की बिक्री आदि की सूचना दी जाती है, लेकिन इसके बाद भी पुलिस कार्रवाई नहीं करती। सचिव ने प्राधिकरण के दायित्व और अभियान के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नशे के खिलाफ सभी को मिलकर काम करने की जरूरत है। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ.जीके शर्मा ने सभी स्कूल-कॉलेजों को अपने यहां एंटी ड्रग क्लीनिक खोलने को कहा और जल्द ही इसकी रिपोर्ट प्राधिकरण को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संकल्प नशा मुक्त देवभूमि लोकहितकारी राज्य की परिकल्पना पर आधारित है। इसमें शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस और अन्य सभी विभागों को जागरूकता के लिए आगे आना होगा। कार्यक्रम में द्वितीय सत्र में उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति नैनीताल के अध्यक्ष जस्टिस लोकपाल सिंह ने एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी और कहा कि नशे का सेवन करने वालों और मादक पदार्थों की बिक्री करने वालों पर अलग-अलग दंड निर्धारित है। वहीं, किशोर न्याय अधिनियम के तहत बच्चों को मादक पदार्थ या मदिरा बेचने पर सात साल कैद व एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। इस योजना का उद्देश्य समाज को नशे के खिलाफ  जागरूक करने और उन फसलों का उत्पादन बंद कराना है, जिससे मादक पदार्थों का निर्माण होता है। इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर तक जाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा। इस सत्र में जस्टिस (रि.) यूसी ध्यानी, सहायक प्रोफेसर मनोविज्ञान केशव महाविद्यालय दिल्ली ने भी व्याख्यान दिया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नेहा कुशवाहा ने बताया कि नशे को लेकर देहरादून में स्थिति काफी गंभीर है। यहां 25 से 27 वर्ष के युवा नशे की जद में और 11 से 18 वर्ष तक के छात्र भी नशे की गिरफ्त में है। युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए इस पर सभी को साथ मिलकर काम करना होगा।

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