Breaking News:

पूर्व सैनिकों को समान कार्य-समान वेतन का लाभ दिलाने की मांग -

Thursday, October 8, 2026

उत्तराखंड : मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए विशेष अभियान 8 से 10 अक्टूबर -

Thursday, October 8, 2026

जरा हटके : मणिगुह में आंगन मिलन कार्यक्रम, गर्भवती महिलाओं की हुई गोदभराई -

Thursday, October 8, 2026

हरिद्वार : बच्ची से दुष्कर्म की वारदात के बाद पूरे इलाके में हड़कंप, जानिए खबर -

Thursday, October 8, 2026

दून पुलिस ने नेपाली गैंग का सदस्य किया गिरफ्तार, जानिए खबर -

Thursday, October 8, 2026

मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर कांग्रेस ने आपत्ति दर्ज की -

Wednesday, October 7, 2026

मासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम में साधक शिष्यों को प्रबल ध्यान के लिए प्रेरित किया गया, जानिए खबर -

Wednesday, October 7, 2026

12 राज्यों के जनजातीय कलाकारों ने दी शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां -

Wednesday, October 7, 2026

अज्ञान वाहन ने दो पैदल यात्रियों को रौंदा, एक की मौत, एक की हालत गंभीर -

Wednesday, October 7, 2026

सीएम धामी ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों से किया संवाद -

Wednesday, October 7, 2026

महज 300 रूपये के विवाद में बुजुर्ग दंपत्ति समेत तीन की हत्या, प्लंबर गिरफ्तार -

Wednesday, October 7, 2026

आध्यात्मिक क्रिकेट महामहोत्सव : दिल्ली ने हरिद्वार को हराकर किया खिताब अपने नाम -

Monday, October 5, 2026

गढ़ भोज दिवस पर उत्तराखंड की पारंपरिक खाद्य विरासत को मिलेगा नया मंच -

Monday, October 5, 2026

जरा हटके : उत्तराखंड के सांसदों की केवल 18 प्रतिशत सांसद निधि हुई खर्च -

Monday, October 5, 2026

उत्तराखंड : हरिद्वार-वेरावल एसी एक्सप्रेस और हरिद्वार-ओखा एसी एक्सप्रेस के संचालन को स्वीकृति प्रदान -

Monday, October 5, 2026

उत्तराखंड : प्रदेश कैबिनेट की बैठक में लिए गए कई महत्वपूर्ण निर्णय -

Monday, October 5, 2026

जरा हटके : आध्यात्मिक क्रिकेट महामहोत्सव का आयोजन -

Saturday, October 3, 2026

दिल्ली में खेलो मास्टर्स नेशनल गेम्स 2026 का आयोजन 20 नवंबर से, जानिए खबर -

Saturday, October 3, 2026

सौरभ व भूमिका डोईवाला कॉलेज के एनएसएस साईं सृजन पुरस्कार 2026 से हुए सम्मानित -

Saturday, October 3, 2026

देहरादून साइक्लिंग क्लब गांधी जयंती पर खाराखेत पहुंच आंदोलनकारियों को दी श्रद्धांजलि -

Saturday, October 3, 2026



भूख की सत्यता …

hungry

भूख एक ऐसा तत्त्व है जिसका अहसास हमें हमारे जीवन के जन्म के साथ ही होता है l नवजात शिशु को भय , प्यार गुस्सा आदि का ज्ञान नही होता है , पर भूख का होता है I क्या हमने कभी शिशु को गुस्सा करते देखा है ? नहीं , लेकिन जब उसे भूख लगती है वो रो कर अपनी माँ को संकेत देता है कि भूख लग गयी है उसके लिए सबसे प्यारी चीज माँ का ढूध है , तभी हम देखते है कि बचा तब थोड़ा बड़ा होता है तो उसके सामने कोई भी चीज आने पर वह मुह में डालता है I जब चिड़िया के बचे छोटे होते है तो माँ उनके लिए भोजन लाती है , यहाँ तक कि खूंखार शेरनी भी शिकार कर बच्चो को देती है , गाये के बछड़े की पुकार सुन कर गाये को पता लग जाता है कि वे भूख है , यह है भूख I कहते है भूख वह पेट कि आग है जिसके लिए इंसान चोरी , डकैती करता है I गर्भवती माँ के पेट में भी शिशु को भोजन कि भी जरुरत होती है और जन्म के बाद उसे माँ स्तन पान कराती है I शिशु का अच्छे से पेट भरने के लिए माँ कि भी भूख मिटनी चाहिए ताकि ढूध सही आये , पर गरीबो को ये नही मिलता l कहते है दाने दाने पर खाने वाले का नाम लिखा होता है , कहते है ऊपर वाला भूख जरूर उठाता है पर भूखा नही सुलाता , ये बाते सिर्फ कहने मात्र रह गयी है I सोने कि चिड़िया कहलाने वाला देश जिसमें सुख सम्पदा कि कोई कमी नही थी , आज कितने गाँवों और शहरो में लोंगो को भर पेट तो दूर की बात है अच्छा खाना देखने को भी नही मिलता है l आज भी छोटे बच्चे कूड़ेदान से किसी की झूठन उठा कर खाते है l एक और जहां ऐसी दशा है वही दूसरी ओर अमीर लोग सिर्फ एक कप चाय के लिए पांच सितारा होटल में पांच सौ रुपये देने में अपनी शान समझते हैं , कितने क्लब , बार में और महिलाएं पार्लर में १०-१५ हजार रुपये उड़ाती हैं और लोग भोग विलास में पैसा बर्बाद करते हैं l कपडे-जूते हर चीज ब्रांडेड पहनते हैं लेकिन यदि कोई बिखरी उनसे कहे कि कल से कुछ खाया नही तो उनकी करुणा रहित दिल का क्या कहे ? कुछ लोग तो एक-दो रुपये देते हैं और कुछ इंसानियत के मारे होते हैं जो सिर्फ धित्कारते हैं l दिए गए एक-दो रूपये में होगा क्या ? इन एक-दो रुपये में तो अब बिस्कुट भी नही आते हैं जिससे कि भूख शांत हो जाये तो रोटी तो दूर कि बात हैं l लगता हैं लोगों कि आज इंसानियत मर चुकी हैं l हमसे जितनी हो सके मदद करनी चाहिए उन लोगों कि जो रोटी , कपडा , माकन से वंचित हैं l हाँ हम मक्कन नही दे सकते हैं , परंतु रोटी और शिक्षा दे सकते हैं l क्या पता हमें उनकी दुआएं किस मुश्किल से बचाये ? इनकी दुआएं करोड़ो से भी कीमती हैं क्योंकि पैसा-दौलत हमारे साथ जायेगा , जायेंगे तो अच्छे कर्म l

– हिना आज़मी मॉस कम्युनिकेशन साई इंस्टिट्यूट देहरादून

Leave A Comment