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मानवीय भूल से श्रद्धालुओं को खतरा बढ़ा

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देहरादून। केदारनाथ में भीषण आपदा आने के बाद भी संबधित विभाग सचेत होने का नाम नहीं ले रहे हैं, जिसके चलते कभी भी श्रद्धालुओं की जान आफत में आ सकती है। कुछ ऐसा ही केदारनाथ मंदिर के करीब बन रहे घाटों को लेकर देखने को मिल रहा है। मंदिर से करीब 500 मीटर पहले मंदाकिनी और सरस्वती नदी के संगम पर बन रहे घाट सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक बताए जा रहे हैं। ऐसे में इन घाटों पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं के समक्ष प्रतिकूल हालात पैदा हो सकते हैं और उनकी जान खतरे में पड़ सकती है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने यहां पर किए जा रहे पुनर्निर्माण कार्यों को जायजा लेने पर इन घाटों को नदी के मध्य में पाया और इन्हें पीछे खिसकाने का सुझाव दिया, ताकि हालात नियंत्रण में रह सकें। उत्तराखण्ड में 2013 में आई भीषण आपदा के बाद भी सबक लेने का काम नहीं किया जा रहा है, ऐसे में यहां आने वाले श्रद्धालुओं की जान जोखिम में पड़ने का अंदेशा पैदा हो गया है। आपदा के बाद किए जा रहे पुनर्निमाण कार्यों में जिस प्रकार की लापरवाही बरती जा रही है, उससे हालात का सहज ही अनुमान हो जाता है। केदारनाथ मंदिर से पहले जिन घाटों का निर्माण किया जा रहा है उन्हें नदी के मध्य में बनाया जा रहा है। ऐसे में अगर यहां पर श्रद्वालु स्नान के लिए आते हैं और दुर्भाग्य से आपदा आती है तो वह नदी की तेज धारा में बह जाएंगें। यह खुलासा वैज्ञानिकों की जांच के बाद हुआ है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने पुनर्निमाण कार्यों का जायजा लिया तो उन्हें यह घाट मंदाकिनी और सरस्वती नदी के संगम के मध्य में बने नजर आए। जिसे वैज्ञानिकों ने सुरक्षा की दृष्टि से खतरा बताया है।

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