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सड़क की रोशनी में पढाई कर रहा देश का भविष्य हरेंद्र सिंह चौहान

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नोएडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन के बाहर बैठा13 साल का हरेंद्र सिंह चौहान सड़क की रोशनी में पढ़ने की कोशिश करता है। आर्थिक हालत इतनी खराब है कि पढ़ाई के लिए खुद ही पैसे जुटाने होते हैं। इसके लिए वह पढ़ाई के साथ-साथ काम भी करता है। उसके पास एक वजन तौलने की मशीन रखी होती है, जो उसके पैसे कमाने का साधन है। पढ़ने और घरवालों की मदद के मकसद से काम कर रहा हरेंद्र बताता है, ‘मेरे पापा की नौकरी जून में चली गई है। तब मैंने यह मशीन खरीदी थी। मेरे स्कूल के टीचर ने मुझसे रंग, ये -३ शीट्स और फाइल कवर खरीदने के लिए कहा था। मेरे पास पैसे नहीं थे, इसलिए अब मैं इस मशीन की मदद से पैसे कमाता हूं। अपने प्रॉजेक्ट के लिए पैसे इकट्ठे करने के लिए मैंने यहां मेट्रो स्टेशन के बाहर बैठना शुरू कर दिया।’ जब हरेंद्र ग्राहकों का इंतजार कर रहा होता है, उस दौरान वह अपना समय पढ़ने में बिताता है। वह अपनी किताबें साथ लेकर ही बैठता है। श्रीकृष्णा इंटर कॉलेज में नौवीं कक्षा का यह छात्र बताता है, ‘मैं सुबह सात बजे स्कूल जाता हूं और फिर गणित और इंग्लिश की ट्यूशन करता हूं। इसके बाद मैं कंप्यूटर क्लास के लिए जाता हूं। शाम को लगभग सात बजे मैं मेट्रो स्टेशन के बाहर बैठ जाता हूं और नौ बजे तक यहां रहता हूं। मैं 60 से 70 रुपए तक कमा लेता हूं कई बार इससे भी कम मिलता है।’ हालांकि, इन दो महीनों में फुटपाथ पर बैठते- बैठते हरेंद्र ने यहां से गुजरने वाले कई लोगों का ध्यान आकर्षित किया, जो उसकी मदद करते हैं। गुरुवार को हरेंद्र की कहानी सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई, जिसके बाद इसे कई लोगों ने शेयर किया। हरेंद्र ने बताया कि दो लोग उसके पास आए थे, जिन्होंने उससे मेट्रो स्टेशन के बाहर बैठने के लिए मना किया, क्योंकि इससे सरकार की छवि खराब होती है। हालांकि, उन्होंने हरेंद्र को स्कूल फीस और साइकिल देने का ऑफर दिया।

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