Breaking News:

फुटबाल रेफ्रीयों के लिए फिटनेस और अपडेट वर्कशॉप आयोजक -

Saturday, June 13, 2026

संघर्ष, अनुशासन और आत्मविश्वास की मिसाल बनी बिनीता रावत -

Saturday, June 13, 2026

देहरादून में डेयरी संचालकों का फूटा गुस्सा: आसमान छूते दामों और उत्पीड़न के खिलाफ खोला मोर्चा -

Thursday, June 11, 2026

दागी अधिकारी को MD बनाने के लिए बदले नियम, चयन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल, जानिए खबर -

Thursday, June 11, 2026

पहचान : ऋषिकेश में घर-घर टिफिन पहुंचाने वाली बेटी बनी एसडीएम -

Sunday, June 7, 2026

अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न, जानिए खबर -

Sunday, June 7, 2026

गौ माता : 5 हजार किमी साइकिल यात्रा से दो युवा पहुंचे कार्तिक स्वामी धाम -

Wednesday, June 3, 2026

जरा हटके : ‘कैरी मी बैक’ पॉलिसी से प्लास्टिक मुक्त बनेगा बाबा केदार का धाम -

Wednesday, June 3, 2026

भारत देश विश्व के फीफा वर्ल्ड कप मे 142 रेंकिंग पर है आखिर क्यों …????? -

Wednesday, June 3, 2026

देहरादून से छात्रों का ऐतिहासिक चयन, जानिए खबर -

Wednesday, June 3, 2026

कई बार असफल हुए, रील बनाने लगे पर पेपर नहीं छोड़े, आज इनकम टैक्स अफसर -

Sunday, May 31, 2026

उत्तराखंड से चार खिलाड़ी एक बार फिर एशियन पैरा गेम्स 2026 का बनेंगे हिस्सा -

Sunday, May 31, 2026

प्रो.ढींगरा ने किया साईं सृजन पटल पत्रिका के 22 वें अंक का विमोचन, जानिए खबर -

Sunday, May 31, 2026

उत्तराखंड : गर्मी से राहत के आसार, बारिश का अलर्ट -

Wednesday, May 27, 2026

सड़क पर दो साध्वियों की मौत पर गुस्से में जैन समाज -

Tuesday, May 26, 2026

शिक्षा अंकुर स्कूल में यातायात जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन, जानिए खबर -

Monday, May 25, 2026

आधुनिक जीवन की अपरिहार्य अनिवार्यता है राम राज्य : साध्वी दीपिका भारती -

Sunday, May 24, 2026

बचपन से ही बच्चों में हो राष्ट्र सेवा की भावना : सुरेश दुबे -

Saturday, May 23, 2026

15वॉ समर फुटबाल कैंप 1 जून से 25 जून तक, जानिए खबर -

Saturday, May 23, 2026

मिड-डे मील बनाने वाली का बेटा बना आइएएस -

Wednesday, May 20, 2026



अनेको सांस्कृतिक संगम का अनूठा उदाहरण छठ पर्व

ऋषिकेश। कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्टी को भगवान सूर्य की आराधना की पर्व मनाया जाता है। वेदों, उपनिषदों और अनेक वैदिक ग्रन्थों में भगवान सूर्य की आराधना का उल्लेख किया गया है परन्तु चार दिनों तक चलने वाला यह उत्सव वास्तव में अद्भुत है इसमें उद्यमान सूर्य और अस्त होते सूर्य को अध्र्य देकर व्रत करना एक कठिन तपस्या है। पूर्वांचल की संस्कृति का पर्व छठ पूजा अब पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। चार दिनों तक मनाये जाने वाले इस पर्व में पूर्वांचल लोक संस्कृति की अनूठी झलक दिखायी पड़ती है। छठ पूजा के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने देश वासियों को शुभकामनायें देते हुये कहा कि प्रकृति के सान्निध्य में मनायें जाने वाला यह पर्व सामूहिकता, सादगी और पवित्रता का प्रतीक है। यह पर्व पर्यावरण अनुकूल है। मानव जीवन के लिये सूर्य, नदियों और प्रकृति के महत्व को दर्शाता है। 36 घन्टे का यह पर्व 365 दिनों तक शरीर को सकारात्मक ऊर्जा देता है। शास्त्रों के अनुसार छठ पर्व की शुरूआत महाभारत काल में हुई थी तथा देव माता अदिति ने छठ पूजा का आरम्भ किया था। भगवान सूर्य को आरोग्य का देवता माना जाता है। सूर्य की किरणों में अनेक रोगों को नष्ट करने की क्षमता होती है। सूर्य की किरणे आॅक्सीजन की तरह जीवन के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वामी जी ने कहा कि वास्तव में छठ पूजा हमारे ऋषि-मुनियों के द्वारा अनुसंधान की गयी सूर्य की विशेष पूजा पद्धति है जो की आरोग्य एवं समृद्धि प्रदान करती है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों और विश्व के अनेक देशों से आये श्रद्धालुओं को छठ पूजा का महत्व समझाते हुये कहा कि हमारे पर्व का सीधा सम्बंध हमारी प्रकृति से है। भारतीय संस्कृति वृक्षों, नदियों, पर्वतों और सूर्य, चन्द्रमा, ग्रह नक्षत्रों की पूजा-अर्चना कर यह संदेश देती है कि हमारा जीवन प्रकृति के अनुकूल ही हो। अगर हम प्रकृति के प्रतिकूल आचरण करते है तो न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा बल्कि हमारी आस्था भी आहत होगी अतः उत्सव ऐसे मनाये जो पर्यावरण के अनुकूल हो। आज की परमार्थ गंगा आरती में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सभी श्रद्धालुओं को प्रकृतिमय जीवन जीने का संकल्प कराया। छठ पूजा के अवसर पर परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने स्वामी जी के सान्निध्य में रूद्राक्ष के पौधों लेकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प किया।

Leave A Comment