दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म की आराधना की गई, जानिए खबर
Posted by Pehchanexpress Admin on Wednesday, September 23, 2026 · Leave a Comment

देहरादून। पर्वाधिराज पर्युषण दशलक्षण महापर्व के पावन अवसर पर आध्यात्मिक श्रमणी परम पूज्य वात्सल्यमयी आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में देहरादून के गांधी रोड स्थित श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर सहित शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में दशलक्षण महापर्व भव्य एवं धार्मिक वातावरण में संगीतमय भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। महापर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म की आराधना की गई। प्रातःकाल मंदिरों में नित्य नियम पूजन, दशलक्षण पूजन, अभिषेक एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इसके साथ ही आयोजित भव्य आत्मबोध संस्कार शिविर में देहरादून के साथ-साथ विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालु बढ़-चढ़कर सहभागिता कर रहे हैं।
इस अवसर पर पूज्य आर्यिका पूर्णमति माताजी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि उत्तम तप का अर्थ केवल शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं का निरोध करना और आत्मा को विकारों से मुक्त करने का प्रयास करना है। जैन दर्शन में कहा गया है— “इच्छानिरोधस्तपः”, अर्थात इच्छाओं का निरोध ही तप है। तप के माध्यम से कर्मों की निर्जरा होती है और आत्मा की शुद्धि की दिशा में साधक आगे बढ़ता है। जिस प्रकार सोना अग्नि में तपकर अधिक शुद्ध होता है, उसी प्रकार तप रूपी साधना से आत्मा के विकारों का क्षय होता है।
उन्होंने बताया कि जैन शास्त्रों में तप के बारह भेद बताए गए हैं, जिनमें छह बहिरंग तप और छह अंतरंग तप हैं। बहिरंग तप में अनशन, ऊनोदर, वृत्तपरिसंख्यान, रस-परित्याग, विविक्त-शय्यासन तथा कायक्लेश और अंतरंग तप में प्रायश्चित, विनय, वैयावृत्य, स्वाध्याय, व्युत्सर्ग तथा ध्यान शामिल हैं। तप का उद्देश्य आत्मसंयम, आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि के माध्यम से आत्मा को उसके शुद्ध स्वरूप की ओर ले जाना है।
दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत दोपहर 1 बजे स्वर्गीय सुशील चंद्र जैन स्मृति वाद-विवाद प्रतियोगिता श्री महावीर जैन कन्या पाठशाला, तिलक रोड के प्रांगण में आयोजित की गई। वहीं दोपहर 2 बजे जैन मिलन राजुल द्वारा उत्तम तप कर नाटिका प्रस्तुत की गई। रात्रि 8:30 बजे ‘दान का महत्व’ विषय पर प्रेरणादायक नाटिका जैन मिलन राजुल द्वारा प्रस्तुत की गई।
आत्मबोध संस्कार शिविर के अंतर्गत आचार्य भक्ति, सामायिक, शंका समाधान, प्रतिक्रमण, जैन धर्म पर मार्मिक प्रवचन, तत्त्वार्थ सूत्र का अध्ययन, महाआरती, दस धर्मों पर प्रवचन, ‘द आर्ट ऑफ सेल्फ-डिस्कवरी’ ध्यान शिविर तथा प्रश्न मंच सहित विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ध्यान शिविर में बा.ब्र. ऋतु दीदीजी ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन एवं आत्म-अन्वेषण के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मीडिया कोऑर्डिनेटर मधु जैन ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के दौरान प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आगामी कार्यक्रमों में उत्तम त्याग धर्म की आराधना के अवसर पर दोपहर 2 बजे मंगलाचरण तथा रात्रि 8:30 बजे श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर, माजरा, देहरादून द्वारा प्रेरणादायक नाटिका प्रस्तुत की जाएगी।
इस अवसर पर जैन समाज, श्री विद्या-समय-पूर्ण वर्षायोग समिति, जैन भवन कार्यकारिणी सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी एवं सदस्यगण तथा बड़ी संख्या में बाहर से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी श्रद्धालुओं ने पूज्य माताजी के पावन सान्निध्य में धर्मलाभ प्राप्त किया।