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जरा हटके : इस नए साल लाइसेंस नहीं तो म्युजिक नहीं

देहरादून। व्यक्तिगत संस्थानों के खिलाफ़ आदेशों की सीरीज़ जारी करते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बिना लाइसेंस के फोनाग्राफिक परफोर्मेन्स लिमिटेड के कॉपीराईट-सुरक्षित म्युज़िक बजाने पर रोक लगा दी थी, जिसके तहत लोकप्रिय कमर्शियल संस्थान जैसे होटल, रिज़ॉर्ट्स, लाउंज, पब, क्लब, बार आदि जैसे ज़ेको मीडिया एलएलपी (डिस्कवर रिज़ॉर्ट्स), डिजि 1 इलेक्ट्रॉनिक्स, द बार स्टॉक एक्सचेंज, स्नो वर्ल्ड एंटरटेनमेन्ट, अदयर गेट होटल्स, बाईक हॉस्पिटेलिटी, सिद्धिविनायक हॉस्पिटेलिटी, एफएमएल हॉस्पिटेलिटी, साई सिल्क (कलामंदिर), अम्बुजा नेओटिया होल्डिंग्स, जीआरटी होटल्स एण्ड रिज़ॉर्ट्स और देश भर में इनके आउटलेट्स बिना लाइसेंस के इस संगीत को नहीं बजा सकते। हाल ही में कोर्ट द्वारा जारी आदेश बेहद महत्वपूर्ण प्रतीत होता हैं, क्योंकि यह आदेश हर प्रकार के संगीत पर लागू होगा जैसे क्रिसमस, नव वर्ष की पूर्व संध्या पर सार्वजनिक स्थानों या साल भर आयोजनों के दौरान बजाए जाने वाले संगीत पर लागू होगा।
अस्सी साल पुरानी संस्था पीपीएल इंडिया एक म्युज़िक लाइसेंस कंपनी है जिसके पास हिंदी, अंग्रेज़ी, पंजाबी, तमिल, तेलुगु, कन्नड, हरियाणवी, भोजपुरी सहित कई भाषाओं में 4 मिलियन से अधिक घरेलु एवं अन्तर्राष्ट्रीय साउण्ड रिकॉर्डिंग्स का नियन्त्रण करने वाले 350 से अधिक म्युज़िक लेबल्स के ग्राउण्ड परफोर्मेन्स राईट्स हैं। यह कुछ सबसे बड़े रिकॉर्ड लेबल्स जैसे आदित्य म्युज़िक, आनंदा ऑडियो, दीवो, दिलिज दोसांझ, लहरी म्युज़िक, सारेगामा, सोनी म्युज़िक, सोनोटेक, टी-सीरीज़, टाइम्स म्युज़िक, युनिवर्सल म्युज़िक, वार्नर म्युज़िक आदि के रिकॉर्ड किए गए गीतों का उपयोग के राईट्स का नियन्त्रण करती है। कमर्शियल संस्थानों को दोनों प्रकार के लाइसेंस लेने पड़ेंगे, एक साल भर अपने परिसर में बैकग्राउण्ड में कॉपीराईट गीत बजाने के लिए और दूसरा नव वर्ष, क्रिसमस, वैलेंटाईन डे, होली या कॉर्पाेरेट आयोजनों के दौरान संगीत बजाने के लिए, जब लोग संगीत के साथ जश्न मनाते हैं। पीपीएल इंडिया के एमडी एवं सीईओ जी.बी. आयिर ने कहा, ‘‘म्युज़िक कॉपीराईट एक महंगी दुनिया है जहां म्युज़िक कंपनियां संगीत बनाने और इसके अधिग्रहण के लिए बिलियन और ट्रिलियन में निवेश करती हैं। पीपीएल, संगीत बजाने के लिए संस्थानों से जो लाइसेंस शुल्क लेती है, वह बहुत मामूली है और तर्कसंगत/ प्रकाशित शुल्कों पर आधारित है। भारत में संगीत हर मौके का अभिन्न हिस्सा होता है, कई लोग संगीत के इस्तेमाल के लिए शुल्क नहीं चुकानाचाहते, जिससे न सिर्फ मालिकों बल्कि पूरी क्रिएटिव कम्युनिटी को भारी नुकसान होता है। पीपीएल उन सभी संस्थानों को बधाई देना चाहता हे, जिन्होंने आगे बढ़कर सार्वजनिक लाइसेंस लिया है। किंतु उल्लंघन करने वालों के पास अदालत से राहत लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।’’ बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा जारी स्थगन के आदेशों को सुनने के बाद कई संस्थान स्वैच्छिक रूप से आगे आए हैं और पीपीएल से लाइसेंस प्राप्त किया है।

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