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काश्तकारों को सब्जी की पौध उपलब्ध कराई गई

अल्मोड़ा । जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने बताया कि एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना, अल्मोड़ा द्वारा कोरोना संक्रमण काल में जिला प्रशासन को अपना पूर्ण सहयोग उपलब्ध करवाया जा रहा है। इस महामारी के संक्रमण से बचने के लिए ग्राम स्तर पर परियोजना परियोजना के माध्यम से विभिन्न तरह की गतिविधियों को संचालित किया जा रहा है। प्रभागीय परियोजना प्रबन्धक कैलाश चन्द्र भट्ट के मार्गदर्शन में परियोजना द्वारा इस कठिन समय में परियोजना अन्तर्गत आच्छादित भिक्यासैण, ताड़ीख्ेात एवं स्याल्दे विकास खण्ड के कास्तकारों के हितों को ध्यान में रखते हुए लगभग रू.22000.00 धनराशि के 10000 सब्जी पौघ उपलब्ध करवाये हैं।  कास्तकारो को गुणवत्ता युक्त पौध उपलब्ध करवाने की दृष्टि से परियोजना के सहायक प्रबन्धक-कृषि एवं उद्यान प्रदीप सिंह गुसाई द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र, मटेला, अल्मोडा के माध्यम से उत्तम प्रजाति के लौकी, तुरई, टमाटर, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, खीरा, करेला आदि के 10000 पौध सहकारिताओं को उनके सदस्यों की मांग के आधार पर उपलब्ध करवाये गये हैं। उन्होंने बताया कि परियोजना क्षेत्र के कई विकास खण्ड दूरस्थ एवं कृषि एवं उद्यान संबंधी आवश्यक निवेशों की आपूर्ति को ससमय प्राप्त नहीं कर पाते हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए परियोजना द्वारा अपने कास्तकारों को कृषि एवं उद्यान के क्षेत्र में कास्तकारों को धरातलीय सहयेाग प्रदान करने वाले केन्द, ’कृषि विज्ञान केन्द’्र, मटेला से उन्नत किस्म के पौधों को परियोेजना के कास्तकारों को उपलब्ध करवाया गया है।
भिक्यासैण विकास खण्ड की पंचवाटिका, जय नागार्जुन आजीविका संघ, ताड़ीख्ेात विकास खण्ड की नयी उड़ान आजीविका संघ, स्याल्दे विकास खण्ड की मां कलिंका, नयी उम्मीद, चैकोट विकास, देव भूमि एवं किसान जागृति आजीविका संघों को 10000 हजार सब्जी पौधों की आपूर्ति करवायी गयी है। इससे पूर्व भी पंचवाटिका आजीविका संघ द्वारा अपने सदस्यों को कृषि विज्ञान केन्द्र, मटेला से 2500 सब्जी पौध उपलब्ध करवाये जा चुके हैं। उन्होंने ने यह भी बताया कि कई ग्रामों में पूर्व में छोड़ी गयी भूमि में भी कास्तकारों द्वारा खेती आरम्भ की गयी है। जिस कारण सब्जी पौधों की मांग बढ़ रही है। पंचवाटिका आजीविका संघ, सिनौड़ा द्वारा अपने कास्तकारों के लिए अतिशीध्र सब्जी प्रजाति के पौधों की अतिरिक्त मांग केन्द्र को प्रेषित की जानी प्रस्तावित है। परियोजना क्षेत्र से प्राप्त एक जानकारी के आधार पर कोरोना संक्रमण के सकारात्मक प्रभावों के परिणामस्वरूप कई ग्राामों में पूर्व में उपयोग में नहीं लायी जा रही भूमि में इस सीजन में खेती आरम्भ की जा रही है। पर्वतीय कृषि के लिए यह एक सकारात्मक संकेत कहा जा सकता है।

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