Breaking News:

देहरादून : फर्जी प्रमाणपत्रों के मामले में हाईकोर्ट जाएंगे आरटीआई एक्टिविस्ट विकेश सिंह नेगी -

Wednesday, September 16, 2026

दशलक्षण महापर्व : उत्तम क्षमा धर्म की आराधना, आत्मबोध संस्कार शिविर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब -

Wednesday, September 16, 2026

चमोली : अलकनंदा में तैरने उतरा युवक हुआ लापता, तलाश जारी -

Wednesday, September 16, 2026

कल से 17 अक्टूबर तक चलेगा ‘स्वच्छता ही सेवा अभियान -

Wednesday, September 16, 2026

पहचान : सौरभ व भूमिका एनएसएस साईं सृजन पुरस्कार से होंगे सम्मानित -

Saturday, September 12, 2026

पहचान : खिलाडी गंभीर सिंह चौहान और दीपक सिंह रावत ने बढ़ाया उत्तराखंड का मान, जानिए खबर -

Saturday, September 12, 2026

फुटबाल : उत्तराखंड के अनिरुद्ध थापा पहली बार ब्राजील के खिलाफ भारतीय टीम से खेलेंगे फ्रेंडली मैच -

Saturday, September 12, 2026

देहरादून : चित्रकला प्रतियोगिता के प्रतिभागी विद्यार्थियों को किया सम्मानित -

Saturday, September 12, 2026

देहरादून : नशा मुक्ति अभियान का शुभांरभ, 30 सितंबर तक चलेगा नशामुक्ति का विशेष शपथ अभियान -

Friday, September 11, 2026

अजब गजब : 400 करोड़ से अधिक खर्च, फिर भी खेत रहे सूखे -

Friday, September 11, 2026

नेक कार्य : छत पर सौर ऊर्जा, कमरों में ठंडी हवा और बच्चों के सपनों को नई उड़ान -

Friday, September 11, 2026

जरा हटके : ऋषिकेश में अंतिम संस्कार के लिए ले जा रहे बुजुर्ग की खुलीं आंखें, परिजनों ने एम्स में कराया भर्ती -

Friday, September 11, 2026

दहशत का पर्याय बना गुलदार पिंजरे में कैद -

Friday, September 11, 2026

काम की बात : 12 सितंबर को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत -

Thursday, September 10, 2026

दो बाइकों की भिडंत में एक व्यक्ति की मौत, एक घायल -

Wednesday, September 9, 2026

राजनीति : उत्तराखंड में शुद्धिकरण मामले में सियासत से सड़क तक पहुंचा विवाद -

Wednesday, September 9, 2026

चिंताजनक : गुलदार की चहल-कदमी से दहशत -

Wednesday, September 9, 2026

छात्र और छात्रा का शव फंदे से लटका मिला, इलाके में हड़कंप -

Tuesday, September 8, 2026

अजब हाल : आवारा कुत्तों के हमले से 33 भेड़-बकरियों की मौत -

Tuesday, September 8, 2026

इंटर्न डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी -

Tuesday, September 8, 2026



देहरादून : अवैध निर्माण को लेकर एमडीडीडीए पर गरजा उक्रांद

देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल शहर में अवैध निर्माण को लेकर एमडीडीए का घेराव किया और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते एमडीडीए उपाध्यक्ष को ज्ञापन भी सौंपा। इस दौरान यूकेडी कार्यकर्ताओं ने प्राधिकरण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आक्रोश व्यक्त किया। केंद्रीय मीडिया प्रभारी शिवप्रसाद सेमवाल ने कहा कि देहरादून और इसके आस पास के क्षेत्रों में विगत कुछ सालों में बेतहाशा अनियमित निर्माण हो रहे हैं। जिनमें गुछुपानी, पुरकुल, सहस्त्रधारा, शिमला बाईपास, मसूरी रोड, मालदेवता आदि क्षेत्र में कई रिजॉर्ट, होटल, व्यवसायिक इमारत, कॉलोनी या अन्य तरह के निर्माण है। जिनके नक्शे पास नहीं हैं और न ही वे निर्माण नीति नियमानुसार बने हैं। ये भी देखने में आया है कि प्राधिकरण द्वारा अनियमित बने ऐसे निर्माण पर यदि कोई चालान जारी किये गए हैं तो उनमें समय व नियमानुसार कार्यवाही आज तक नहीं हुई है। हद तो ये है कि कई निर्माण हमारी ऐतिहासिक नदियों के किनारो पर बने हुए हैं। जो हमारे पर्यावरण के लिए घातक है और किसी भी हालात में स्वीकार योग्य नहीं है। केंद्रीय प्रवक्ता अनुपम खत्री ने कहा कि हमारी नदियों के किनारो पर कई रिजॉर्ट संचालित हैं जो कि पूर्णतया अवैध निर्माण की श्रेणी में आते हैं। शहरों में या शहर के आसपास ऐसी कई कॉलोनी बन रही हैं जो एमडीडीए से स्वीकृत नहीं हैं पर वहाँ खरीद फरोख्त लगातार जारी है। उक्रांद ने आरोप लगाया कि शिमला बाई पास (सेक्टर 11) में अवैध प्लॉटिंग धड़ल्ले से चल रहे हैं, जिनको  प्राधिकरण द्वारा नोटिस तो जारी किया गया परन्तु आज तक उन पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। इसके लिए पहले भी शिकायत पत्र आपको दिया गया है परन्तु अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई।।यूकेडी केंद्रीय महिला मोर्चा की अध्यक्ष सुलोचना ईष्टवाल और उत्तरा पंत बहुगुणा ने कहा कि कारगी क्षेत्र में भी धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहे हैं और आपका एमडीडीए मूक दर्शक की भूमिका अदा कर रहा है। इन सब तथ्यों और अनियमित हो रहे निर्माण कार्यों को देख कर ये साफ प्रतीत होता है कि एमडीडीए में कार्यरत कर्मचारी जिनका काम निर्माण व्यवस्था को दुरुस्त रखना है वो अपना काम सही से नहीं कर रहे हैं या फिर भ्रष्टाचार में पूरी तरह से लिप्त हो चुके हैं। महानगर अध्यक्ष विजेंद्र रावत ने कहा कि प्राधिकरण में सिर्फ एक ही पटवारी है जबकि प्राधिकरण का क्षेत्र बहुत बड़ा है। ऐसे में लाज़मी हो जाता है कि कम से कम 2 पटवारी प्राधिकरण के पास हो जिससे कामों में पारदर्शिता बने और काम भी जल्द हो सकें।

Leave A Comment