जरा हटके : आध्यात्मिक क्रिकेट महामहोत्सव का आयोजन
देहरादून जैन भवन स्टेडियम में हुआ आयोजित
देहरादून | सकल दिगंबर जैन समाज, श्री विद्या समय पूर्ण वर्षा योग समिति द्वारा पुण्यार्जक श्रीमती तारिका पाटनी जी (वंडर सीमेंट , आरके मार्बल्स) के सहयोग से वीपीएल आध्यात्मिक क्रिकेट महामहोत्सव देहरादून जैन भवन स्टेडियम में आयोजित किया गया। जिसमें आज प्रातः 7:00 बजे मंदिरजी में शांतिधारा की गई शांतिधारा के पश्चात सभी साधर्मीजनो ने बैनर लेकर रैली के रूप में विद्या समय पूर्ण स्टेडियम की ओर प्रस्थान किया।विद्या पूर्ण लीग मैच आध्यात्मिक क्रिकेट लीग धर्म,संस्कार,अनुशासन एकता,का अनोखा संगम है। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मीडिया समन्वयक मधु जैन ने बताया कि टीम में देहरादून इंदौर विकास नगर तमिलनाडु अहमदाबाद दिल्ली हरियाणा राजस्थान आगरा गाजियाबाद ग्वालियर डोंगरगढ़ ,हरिद्वार महाराष्ट्र से आई हुई टीम ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि माहिन वर्मा (बीसीसीआई के भूतपूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्तमान में उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के सेक्रेटरी) ने टॉस करा कर मैच का शुभारंभ किया। कार्यक्रम समन्वयक अंकुर जैन ने बताया कि आज 16 टीमों के बीच मैच हुआ जिसमे 8 विजेता रही. जिसमें दिल्ली विकास नगर तमिलनाडु हरिद्वार इंदौर ग्वालियर आगरा विजेता रही ।जिसमें बॉलर प्रश्न पूछ रहा है सही जवाब तुरंत देने पर 6 रन 4 रन बॉल लगनी जरुरी है कल क्वार्टर फाइनल होगा परसो सेमी फाइनल एवं फाइनल खेला जाएगा।
पूज्य गुरु माँ श्री पूर्णमति माताजी के मंगल प्रवचन
जीवन रूपी ‘लीग’ में माता का दिव्य मार्गदर्शन
• 1. सच्ची विद्या ही ‘पूर्ण विद्या’ है:
संसार में केवल डिग्रियां या भौतिक ज्ञान जुटाना अधूरी शिक्षा है। माता जी के अनुसार, ‘विद्या पूर्ण’ वह है जो इंसान को अहंकार से मुक्त करे और आत्मज्ञान (स्वयं को जानने की शक्ति) की ओर ले जाए। सांसारिक विद्या हमें जीविका चलाना सिखाती है, जबकि पूर्ण विद्या हमें जीना सिखाती है।
• 2. जीवन एक खेल (लीग) है, इसे खेल भावना से खेलें:
जैसे क्रिकेट या किसी भी लीग मैच में हार-जीत, उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, वैसे ही जीवन भी एक रंगमंच या खेल का मैदान है। सुख और दुख इसके दो पहलू हैं। माता जी की सीख यही होती है कि फल की चिंता किए बिना अपना सर्वश्रेष्ठ ‘परफॉर्मेंस’ दें और कभी भी मुश्किल परिस्थितियों से हार न मानें।
• 3. अनुशासन और नियम
किसी भी लीग को जीतने के लिए कड़े अनुशासन और नियमों का पालन करना पड़ता है। आध्यात्मिक जीवन में भी ध्यान, सदाचार, माता-पिता का सम्मान और सत्य के मार्ग पर चलना ही वह अनुशासन है, जो आपको जीवन की लीग का ‘चैंपियन’ बनाता है।
• 4. संगति और टीम वर्क
लीग में कोई भी अकेला मैच नहीं जीत सकता; उसके लिए पूरी टीम का साथ जरूरी होता है। जीवन में हमारी टीम हमारे परिवार, संस्कार और हमारी संगति (सत्संग) हैं। अच्छी संगति ही हमें कठिन समय में सही रास्ता दिखाती है।
मुख्य अतिथियों बीसीसीआई माहिन वर्मा के प्रेरणादायी उद्बोधन हुए
इस अवसर पर सकल दिगंबर जैन समाज के सभी पदाधिकारी श्री विद्या समय पूर्ण वर्षा योग समिति के सभी सदस्य जैन भवन कार्यकारणी सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी सदस्य गण एवं बड़ी संख्या में बाहर से आए हुए श्रद्धालु उपस्थित रहे सभी श्रद्धालुओं ने पूज्य माता जी के पावन सानिध्य में धर्म लाभ भी प्राप्त किया।





















