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परमार्थ निकेतन : एक महीने तक चले योग प्रशिक्षण शिविर का समापन

ऋषिकेश । परमार्थ निकेतन में एक माह से चल रहे योग प्रशिक्षण शिविर का समापन हुआ। इस योग शिविर में चीन से आये योग साधकों ने सहभाग किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के सान्निध्य में सभी योग साधकों को विश्व स्तर स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया। परमार्थ निकेतन में एक माह से चल रहे योग प्रशिक्षण शिविर में चीन से आये 65 योग जिज्ञासुओं को परमार्थ निकेतन के योगाचार्यों, हेमवतीनन्दन बहुगुणा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने योग, ध्यान, वेदमंत्रों और संगीत का प्रशिक्षण दिया। इस दौरान चीनी योगजिज्ञासुओं ने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में आध्यात्मिक प्रवचनों का लाभ लिया।  साथ ही साध्वी भगवती सरस्वती जी ने में योग के विविध आयामों यथा योग के वैज्ञानिक पहलू, इंटीग्रेशन आॅफ योग एण्ड हेल्थ केयर, स्पेशल थेरेपी तकनीक इन योग, योग सूत्र, योग विषय पर विशेष जानकारी प्रदान की। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा, ’’भारत ने विश्व को योग रूपी अमूल्य उपहार दिया है। योग, हिमालय और भारत की संस्कृति है। ’वसुधैव कुटुम्बकम’  को साकार करने के लिये योग एक प्रयोग है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से चरितार्थ भी हो रहा है। योग, व्यक्ति को स्वस्थ, निरोग और योग्य बनाता है। उन्होने योगियों को संदेश दिया कि योग से प्राप्त सकारात्मक ऊर्जा को  पर्यावरण के लियेय नदियों के लिये तथा पूरी धरती को प्रदूषण मुक्त करने के लिये लगाये। स्वामी जी ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम योग के माध्यम से नये-नये प्रयोग करंे और उन प्रयोगों का उपयोग विश्व बन्धुत्व के लियेय समरसता, सद्भावय संस्कारय संस्कृति और शान्ति की स्थापना के लिये करें। अब योग के साथ-साथ पर्यावरण योग भी बहुत जरूरी अतः आईये सभी योगी एक साथ होकर वैश्विक समस्याओं के समाधान हेतु मिलकर कदम बढ़ायंे।चीन से आये योग साधकों ने कहा कि योग का प्रशिक्षण चीन सहित विश्व के अन्य देशों में भी उपलब्ध है परन्तु भारतीय योग पद्धति उत्तम है। हमारे लिये परमार्थ निकेतन का गंगा तट योग और ध्यान के लिये सबसे श्रेष्ठ स्थान है। प्रोफसर, हेमवती नन्दन बहुगुणा एस एस रावत जी ने कहा कि योग, रोगों से मुक्ति की माध्यम है। अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाये जाने के पश्चात अब योग की शक्ति को पूरी दुनिया ने स्वीकार किया है। एक माह से योग और ध्यान की विभिन्न विधाओं  को आत्मसात कर रहे चीन से आये योग साधकों ने परमार्थ निकेतन में ’’ओम’’ और वेद मंत्रों का उच्चारण, हनुमान चालीसा और प्रतिदिन होने वाली गंगा आरती और विश्व शान्ति हवन में भी सहभाग किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने चीन से आये योगियों को एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने तथा ई कचरे को कम करने का संकल्प कराया। इस अवसर पर डाॅ विकास गोखले ने सहभाग किया।

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